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Mandi News: झीड़ी में प्रस्तावित फ्लाईओवर का विरोध
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नगवाईं (मंडी)। कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर झीड़ी में प्रस्तावित करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के विरोध में झीड़ी पंचायत और आसपास के क्षेत्रों के लोग आगे आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फ्लाईओवर के निर्माण से क्षेत्र की सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय संरचना बुरी तरह प्रभावित होगी। प्रभावितों ने मांग की है कि फ्लाईओवर के स्थान पर गोल चौक (राउंड अबाउट) जैसे व्यावहारिक और सुरक्षित विकल्प पर विचार किया जाए।
ग्रामीणों का आरोप है कि फ्लाईओवर की योजना बनाते समय न तो पंचायत को विश्वास में लिया गया और न ही स्थानीय हितधारकों से कोई परामर्श किया गया। प्रस्तावित फ्लाईओवर के कारण ग्रामीणों को खेतों, जल स्रोतों, बस ठहराव, श्मशान, सरकारी कार्यालयों और अन्य संस्थानों तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटना पड़ेगा, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि झीड़ी पंचायत के लगभग 500 युवा रिवर राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग जैसे साहसिक पर्यटन से जुड़े हैं, जबकि 2000 से अधिक लोग इन गतिविधियों से परोक्ष रूप से रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। फ्लाईओवर बनने से यह पूरा रोजगार तंत्र समाप्त हो जाएगा। साथ ही होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट और दुकानें भी प्रभावित होंगी, जो पूरी तरह पर्यटन गतिविधियों पर निर्भर हैं।
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झीड़ी फ्लाईओवर हटाओ समिति के अध्यक्ष चंद्र शमशेर सिंह चौहान और सचिव धर्मवीर पठानिया ने एनएचएआई की ओर से स्थान को ‘ब्लैक पॉइंट’ बताए जाने के दावे पर सवाल उठाए हैं। कहा कि पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पिछले दो वर्षों में यहां कोई बड़ी दुर्घटना दर्ज नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि 5-6 करोड़ रुपये में गोल चैक बनाकर समस्या का समाधान किया जा सकता है। करीब 60 करोड़ रुपये का फ्लाईओवर अनावश्यक और जनविरोधी है।
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फ्लाईओवर पुलिस एवं एसडीएम बालीचौकी के आग्रह पर ही सुरक्षा सलाहकार की ओर से तैयार मानकों अनुसार अनुमोदित हुआ है। इस कार्य के लिए ठेकेदार का चयन भी हो चुका है। जल्द ही कार्य प्रारंभ होगा।
-वरुण चारी, परियोजना निदेशक, एनएचएआई पीआईयू मंडी
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ग्रामीणों का आरोप है कि फ्लाईओवर की योजना बनाते समय न तो पंचायत को विश्वास में लिया गया और न ही स्थानीय हितधारकों से कोई परामर्श किया गया। प्रस्तावित फ्लाईओवर के कारण ग्रामीणों को खेतों, जल स्रोतों, बस ठहराव, श्मशान, सरकारी कार्यालयों और अन्य संस्थानों तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटना पड़ेगा, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होगा।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि झीड़ी पंचायत के लगभग 500 युवा रिवर राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग जैसे साहसिक पर्यटन से जुड़े हैं, जबकि 2000 से अधिक लोग इन गतिविधियों से परोक्ष रूप से रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। फ्लाईओवर बनने से यह पूरा रोजगार तंत्र समाप्त हो जाएगा। साथ ही होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट और दुकानें भी प्रभावित होंगी, जो पूरी तरह पर्यटन गतिविधियों पर निर्भर हैं।
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झीड़ी फ्लाईओवर हटाओ समिति के अध्यक्ष चंद्र शमशेर सिंह चौहान और सचिव धर्मवीर पठानिया ने एनएचएआई की ओर से स्थान को ‘ब्लैक पॉइंट’ बताए जाने के दावे पर सवाल उठाए हैं। कहा कि पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पिछले दो वर्षों में यहां कोई बड़ी दुर्घटना दर्ज नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि 5-6 करोड़ रुपये में गोल चैक बनाकर समस्या का समाधान किया जा सकता है। करीब 60 करोड़ रुपये का फ्लाईओवर अनावश्यक और जनविरोधी है।
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फ्लाईओवर पुलिस एवं एसडीएम बालीचौकी के आग्रह पर ही सुरक्षा सलाहकार की ओर से तैयार मानकों अनुसार अनुमोदित हुआ है। इस कार्य के लिए ठेकेदार का चयन भी हो चुका है। जल्द ही कार्य प्रारंभ होगा।
-वरुण चारी, परियोजना निदेशक, एनएचएआई पीआईयू मंडी