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मंडी: माता जालपा मंदिर में बरसी अखरोटों की बारिश, सायर पर्व पर आशीर्वाद लेने उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
Thu, 17 Sep 2026 03:01 PM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 17 Sep 2026 03:01 PM IST
सार
मंडी जिले के नाचन क्षेत्र के सरोआ स्थित माता जालपा भगवती मंदिर में सायर पर्व पर अनोखी देव परंपरा देखने को मिली। माता के गूर बिंदर कुमार ने मंदिर की छत से श्रद्धालुओं पर अखरोट बरसाए। भक्तों ने अखरोटों को माता का प्रसाद और आशीर्वाद मानकर ग्रहण किया। इस अवसर पर करीब एक माह बाद कमरुघाटी के कई देवी-देवताओं के मंदिरों के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। जानें विस्तार से...
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गूर ने श्रद्धालुओं पर अखरोट बरसाए।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
नाचन क्षेत्र के सरोआ स्थित प्रसिद्ध माता जालपा भगवती मंदिर में सायर पर्व के अवसर पर वीरवार को आस्था और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। माता के गूर बिंदर कुमार ने मंदिर की छत से श्रद्धालुओं पर अखरोट बरसाए। अखरोट पाने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में भक्त उमड़ पड़े।
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श्रद्धालुओं ने अखरोटों को माता का प्रसाद और आशीर्वाद मानकर ग्रहण किया। लोगों ने माता के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। अखरोटों की इस परंपरा के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा।
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सदियों से चली आ रही है अखरोट बरसाने की परंपरा
स्थानीय मान्यता के अनुसार सायर पर्व पर माता जालपा भगवती की दिव्य शक्ति उनके गूर पर उतरती है। इसके बाद गूर मंदिर की छत से श्रद्धालुओं पर अखरोट बरसाते हैं। मान्यता है कि माता की कृपा के प्रतीक इन अखरोटों को प्रसाद के रूप में घर ले जाने से सुख-समृद्धि बनी रहती है। माता के गूर बिंदर कुमार ने बताया कि अखरोट बरसाने की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस परंपरा को निभाने के लिए हर वर्ष सायर पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं।
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लोकगीतों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों से गूंजा मंदिर परिसर
सायर पर्व के चलते सरोआ में दिनभर धार्मिक उत्साह बना रहा। मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ लोकगीत और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनें गूंजती रहीं। घंटियों की मंगल ध्वनि से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय नजर आया।
श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे भक्तों ने भी देव परंपरा में भाग लिया।
करीब एक माह बाद खुले देवस्थलों के कपाट
सायर पर्व पर करीब एक माह बाद कमरुघाटी के विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इनमें बड़ा देव कमरुनाग, शिकारी माता और जालपा माता सहित अन्य प्रमुख देवस्थल शामिल रहे। कपाट खुलते ही मंदिरों में पूजा-अर्चना शुरू हो गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने देव दर्शन कर आशीर्वाद लिया। सायर पर्व के साथ क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियां तेज हो गईं और मंदिरों में भक्तों की आवाजाही बढ़ गई।
सायर पर्व के चलते सरोआ में दिनभर धार्मिक उत्साह बना रहा। मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ लोकगीत और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनें गूंजती रहीं। घंटियों की मंगल ध्वनि से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय नजर आया।
श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे भक्तों ने भी देव परंपरा में भाग लिया।
करीब एक माह बाद खुले देवस्थलों के कपाट
सायर पर्व पर करीब एक माह बाद कमरुघाटी के विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इनमें बड़ा देव कमरुनाग, शिकारी माता और जालपा माता सहित अन्य प्रमुख देवस्थल शामिल रहे। कपाट खुलते ही मंदिरों में पूजा-अर्चना शुरू हो गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने देव दर्शन कर आशीर्वाद लिया। सायर पर्व के साथ क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियां तेज हो गईं और मंदिरों में भक्तों की आवाजाही बढ़ गई।