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Mandi News: चेक बाउंस के मामले में दोषी को एक माह की सजा
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मंडी। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी करसोग की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए एक माह के साधारण कारावास सजा का फैसला सुनाया है। अदालत ने 1.35 लाख रुपये मुआवजा अदा करने के आदेश दिए हैं।
मामले के तथ्यों के अनुसार आरोपी कृष्ण लाल निवासी माहूनांग ने वर्ष 2018 में किसान क्रेडिट कार्ड के तहत हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक चुराग शाखा से 1,08,000 रुपये का ऋण लिया था। बाद में बकाया राशि चुकाने के लिए आरोपी ने 16 सितंबर 2022 को 1,12,000 रुपये का चेक बैंक के पक्ष में जारी किया, जो 20 सितंबर 2022 को प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया।
बैंक ने 27 सितंबर 2022 को आरोपी को कानूनी नोटिस भेजकर निर्धारित अवधि में भुगतान करने को कहा, लेकिन आरोपी ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद 3 नवंबर 2022 को न्यायालय में शिकायत दर्ज की गई। सुनवाई के दौरान बैंक ने दस्तावेजी साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए, जबकि आरोपी आरोपों का खंडन करता रहा और कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
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अदालत ने पाया कि आरोपी ने वैध देनदारी के निर्वहन के लिए चेक जारी किया था। आरोपी नोटिस के बावजूद भुगतान करने में विफल रहा, जिससे उस पर एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत अपराध सिद्ध हुआ। सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा का फैसला सुनाया। आरोपी को आवेदन पर अपील के लिए एक माह तक सजा स्थगित करने की राहत भी दी गई है।
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मामले के तथ्यों के अनुसार आरोपी कृष्ण लाल निवासी माहूनांग ने वर्ष 2018 में किसान क्रेडिट कार्ड के तहत हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक चुराग शाखा से 1,08,000 रुपये का ऋण लिया था। बाद में बकाया राशि चुकाने के लिए आरोपी ने 16 सितंबर 2022 को 1,12,000 रुपये का चेक बैंक के पक्ष में जारी किया, जो 20 सितंबर 2022 को प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया।
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बैंक ने 27 सितंबर 2022 को आरोपी को कानूनी नोटिस भेजकर निर्धारित अवधि में भुगतान करने को कहा, लेकिन आरोपी ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद 3 नवंबर 2022 को न्यायालय में शिकायत दर्ज की गई। सुनवाई के दौरान बैंक ने दस्तावेजी साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए, जबकि आरोपी आरोपों का खंडन करता रहा और कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
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अदालत ने पाया कि आरोपी ने वैध देनदारी के निर्वहन के लिए चेक जारी किया था। आरोपी नोटिस के बावजूद भुगतान करने में विफल रहा, जिससे उस पर एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत अपराध सिद्ध हुआ। सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा का फैसला सुनाया। आरोपी को आवेदन पर अपील के लिए एक माह तक सजा स्थगित करने की राहत भी दी गई है।