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नेरचौक मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में मिलेगी न्यूरोसर्जन सुविधा
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मंडी। नेरचौक मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में विभिन्न श्रेणियों के विभिन्न पदों को सृजित करने की मंजूरी के बाद इसे अपग्रेड करने की कवायद भी तेज होगी। टाइप थ्री ट्रामा सेंटर को टाइप टू में तबदील किया जा रहा है। यदि सरकार मंजूरी देती है तो यहां पर न्यूरोसर्जन और कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) की सेवाएं भी मिलेंगी।
हृदयाघात या अन्य गंभीर बीमारी की स्थिति में यहां पहुंचने वाले मरीजों को तुरंत उपचार मिलेगा। हृदय में स्टेंट डालने या एंजियोग्राफी की स्थिति में ही मरीजों को आईजीएमसी शिमला या टांडा मेडिकल कॉलेज (कांगड़ा) से अटैच किया जाएगा।
कार्डियक मॉनिटर, वेंटीलेटर की संख्या में बढ़ोतरी होने के साथ-साथ तत्काल ऑपरेशन के लिए एक नया आधुनिक थियेटर बनेगा। इससे पांच जिलों मंडी, कुल्लू, हमीरपुर, बिलासपुर और लाहौल-स्पीति के लोगों को फायदा होगा। वर्तमान में नेरचौक मेडिकल कॉलेज में टाइप थ्री ट्रामा सेंटर आपात स्थिति में आने वाले मरीजों का जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
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30 बिस्तर के सेंटर में 300 रोगियों का आपातकाल उपचार
30 बिस्तर के ट्रामा सेंटर में चार चिकित्सक और 10 नर्सों की टीम तैनात रहती है। महीने में करीब 300 मरीज विभिन्न जिलों से पहुंचते हैं। मेडिकल कॉलेज के मुख्य गेट के पास स्थित इस ट्रामा सेंटर में ऑपरेशन थियेटर सहित अन्य सभी व्यवस्थाएं हैं। यहां सीटी स्कैन, एक्स-रे सहित अन्य टेस्टों की सुविधा मौके पर ही मुहैया करवाई जाती हैं। मरीज की हालात सुधरने पर ही उसे वार्ड में शिफ्ट किया जाता है।
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नेरचौक ट्रामा सेंटर को टाइप टू में तबदील किया जा रहा है। इसका प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही यहां पर न्यूरोसर्जन और काडियोलॉजिस्ट को टांडा मेडिकल कॉलेज या आईजीएमसी शिमला से अटैच किया जाएगा। आधुनिक ऑपरेशन थियेटर के अलावा वेंटीलेटर की संख्या भी बढ़ेगी। यहां एक महीने में 300 के करीब मामले आते हैं।
-डॉ. संदीप कालिया, विभागाध्यक्ष ओर्थो एवं प्रभारी ट्रामा सेंटर, नेरचौक मेडिकल कॉलेज
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हृदयाघात या अन्य गंभीर बीमारी की स्थिति में यहां पहुंचने वाले मरीजों को तुरंत उपचार मिलेगा। हृदय में स्टेंट डालने या एंजियोग्राफी की स्थिति में ही मरीजों को आईजीएमसी शिमला या टांडा मेडिकल कॉलेज (कांगड़ा) से अटैच किया जाएगा।
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कार्डियक मॉनिटर, वेंटीलेटर की संख्या में बढ़ोतरी होने के साथ-साथ तत्काल ऑपरेशन के लिए एक नया आधुनिक थियेटर बनेगा। इससे पांच जिलों मंडी, कुल्लू, हमीरपुर, बिलासपुर और लाहौल-स्पीति के लोगों को फायदा होगा। वर्तमान में नेरचौक मेडिकल कॉलेज में टाइप थ्री ट्रामा सेंटर आपात स्थिति में आने वाले मरीजों का जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
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30 बिस्तर के सेंटर में 300 रोगियों का आपातकाल उपचार
30 बिस्तर के ट्रामा सेंटर में चार चिकित्सक और 10 नर्सों की टीम तैनात रहती है। महीने में करीब 300 मरीज विभिन्न जिलों से पहुंचते हैं। मेडिकल कॉलेज के मुख्य गेट के पास स्थित इस ट्रामा सेंटर में ऑपरेशन थियेटर सहित अन्य सभी व्यवस्थाएं हैं। यहां सीटी स्कैन, एक्स-रे सहित अन्य टेस्टों की सुविधा मौके पर ही मुहैया करवाई जाती हैं। मरीज की हालात सुधरने पर ही उसे वार्ड में शिफ्ट किया जाता है।
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नेरचौक ट्रामा सेंटर को टाइप टू में तबदील किया जा रहा है। इसका प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही यहां पर न्यूरोसर्जन और काडियोलॉजिस्ट को टांडा मेडिकल कॉलेज या आईजीएमसी शिमला से अटैच किया जाएगा। आधुनिक ऑपरेशन थियेटर के अलावा वेंटीलेटर की संख्या भी बढ़ेगी। यहां एक महीने में 300 के करीब मामले आते हैं।
-डॉ. संदीप कालिया, विभागाध्यक्ष ओर्थो एवं प्रभारी ट्रामा सेंटर, नेरचौक मेडिकल कॉलेज
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