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Mandi News: 400 से अधिक घर सराज क्षेत्र में हुए क्षतिग्रस्त

Sat, 05 Jul 2025 12:09 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 05 Jul 2025 12:09 AM IST
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More than 400 houses were damaged in Saraj area
थुनाग (मंडी)। सराज में मानसून की पहली बारिश ने तबाही का तांडव दिखाया है। बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने करीब 20 हजार लोगों को विस्थापन के कगार पर ला खड़ा किया है। थुनाग, देजी, पखरैर, जरोल, पांडवशीला, जंजैहली क्षेत्रों से दर्जनों परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए हैं। कुछ ने रिश्तेदारों के घर में पनाह ली है। लोगों में 30 जून की भयानक रात का खौफ है कि कहीं इसकी पुनरावृत्ति न हो।
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सराज में चारों तरफ तबाही के निशान, कीचड़ ही कीचड़ है। खड्डों, नालों ने भौगोलिक स्थिति बदल दी है। मकान, स्कूल जैसे सार्वजनिक प्रतिष्ठान मलबे में मिल गए हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, 400 से अधिक घर, 200 से ज्यादा गोशालाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। खेत खलिहान फसलों सहित नाले में समा गए हैं। कनेक्टिविटी टूटने से कई गांवों की सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है।
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सराज के बाखली, कुकलाह, थुनाग, लंबाथाच, जरोल, पांडवशीला, चैड़ाखड्ड, शिवा खड्ड, खबलेच, जैंशला, केल्टी, चिऊणी, सुराह, डेजी, बूंग रैलचौक, ढीम कटारू, तुंगाधार, पखरैर, बगस्याड़, शरण, मुरहाग, शिकावरी, लेहथाच, शिल्हीबागी, बागाचनोगी, भाटकीधार, कलहणी, ब्रेयोगी, गतू, मैहरीधार, रूहमणी और काकड़धार जैसे क्षेत्रों में खतरा बरकरार है।
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सराज की अधिकांश आबादी नालों, खड्डों और छोटी-छोटी पहाड़ियों के किनारे बसी है। बाखली खड्ड, डेजी खड्ड, रूहाड़ागाड़, चिमटीखड्ड, बूढ़ा केदार की तीर्थन खड्ड, घुमराला नाला, भराड़ा गाड, चिऊणी खड्ड और शिवा खड्ड जैसे क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। थुनाग बाजार पिछले तीन वर्षों से मानसून की मार झेल रहा है।
उधर, हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने आपदा को प्राकृतिक से ज्यादा मानव-निर्मित बताया। कहा कि सराज की मिट्टी नाजुक है। सरकारों ने विकास के नाम पर नालों के किनारे अवैज्ञानिक निर्माण किए।

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महीने पहले से ही सभी पंचायत प्रतिनिधियों को मानसून के दौरान अलर्ट रहने को कहा गया है। नागरिकों को नदी नालों और खतरे वाली जगह पर न जाने और ऑरेंज अलर्ट की सूचना मिलते होते ही फौरन सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है। बरसात अप्रत्याशित है इसकी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। सतर्कता ही बचाव है।
-अपूर्व देवगन, डीसी मंडी
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