Mandi Disaster: 10 महीने बाद भी नहीं भरे आपदा के जख्म, फिर मंडराने लगा खतरा; मानसून से पहले सहमे सराज के लोग
Mandi Disaster: मंडी जिले के सराज क्षेत्र में पिछले साल आई भीषण आपदा के करीब 10 महीने बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। थुनाग, जंजैहली, छतरी, बगस्याड और चिऊणी क्षेत्र में जर्जर सड़कें, पहाड़ियों में दरारें और अधूरे सुरक्षा कार्य लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं। प्री-मानसून की शुरुआत के साथ ग्रामीणों को फिर तबाही का डर सताने लगा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सराज की पहाड़ियों में मौसम बदल रहा है और इसी के साथ लोगों की चिंता भी बढ़ने लगी है। दोपहर बाद उमड़ते बादल और हल्की फुहारें उन पुराने जख्मों को फिर से ताजा कर रही हैं, जिसने पिछले साल पूरे क्षेत्र को तबाही की ओर धकेल दिया था। करीब 10 महीने बीत जाने के बावजूद थुनाग, जंजैहली, छतरी, बगस्याड और चिऊणी के कई गांव आज भी उस आपदा के असर से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाए हैं।
थुनाग-जंजैहली मार्ग पर जगह-जगह भूस्खलन के निशान अब भी मौजूद हैं। कई संपर्क मार्गों पर सफर जोखिम भरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कुछ इलाकों में हल्की बारिश के दौरान भी पत्थर गिरने लगते हैं, जिसके चलते रात के समय आवाजाही लगभग बंद हो जाती है। केलटी, गाड़ागुशैण वाया रेशन और आसपास की सड़कों पर टूटे डंगे आज भी हालात की गंभीरता बयां कर रहे हैं। आपदा का असर सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है। जिन परिवारों ने घर गंवाए थे, उनमें से कई अब भी सामान्य जीवन में नहीं लौट पाए हैं। कुछ लोग रिश्तेदारों के यहां रह रहे हैं, तो कुछ अस्थायी ढांचों में किसी तरह जीवन गुजार रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था भी अधर में है। सुराह, भेखली और रेशन जैसे क्षेत्रों में स्कूल अब भी अस्थायी भवनों में चल रहे हैं। लंबाथाच कॉलेज का निर्माणाधीन साइंस ब्लॉक भी मलबे और सुरक्षा कार्यों के बीच फंसा हुआ है, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले साल की आपदा के बाद बड़े स्तर पर सुरक्षा और पुनर्वास के वादे किए गए थे, लेकिन एक साल बाद भी कई इलाके असुरक्षित बने हुए हैं। मानसून से पहले उम्मीद थी कि हालात सुधरेंगे, लेकिन ज़मीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
21 मासूम जिंदगियों की मौत और सैकड़ों जमींदोज हुए मकान चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा नहीं बन सकते थे। हालात अब भी पूरी तरह सही नहीं हो पाए हैं।- चतर सिंह, चिऊणी
नेताओं को सिर्फ वोट की चिंता है, हमारे मलबे में दबे भविष्य से किसी को कोई सरोकार नहीं। हालात सुधारे नहीं गए तो आने वाली बरसात में फिर तबाही होगी।- नरेश कुमार, धरोटधार
हालात सुधारने पर देना होगा ध्यान
क्षतिग्रस्त हुई सड़कों पर एक साल में तीन दर्जन से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं, लेकिन चुनाव में इस लापरवाही पर चर्चा नहीं। हालात सुधारने की तरफ ध्यान देना होगा।- ललित कुमार, जंजैहली
अस्थायी भवनों में चल रहे हैं स्कूल
केलटी, जंजैहली, गाड़ागुशैण वाया रेशन बस सेवा ठप है। स्कूल आज भी अस्थायी भवनों में चल रहे हैं। लंबाथाच कॉलेज का साइंस ब्लॉक आज भी मलबे ढेर में दबा है। -पिकू टोकरा, लंबाथाच
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.