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देवताओं पर भारी रहीं असुरी शक्तियां
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मंडी के सेहली में मां बगलामुखी होम जाग में मां का गुणगान करते और नाचते श्रद्धालु।
- फोटो : Mandi
मंडी। तुंगल घाटी के सेहली स्थित माता बगलामुखी मंदिर में बुधवार रात को वार्षिक जाग होम का आयोजन किया गया। इसमें आस पास के गांवों से भारी संख्या में लोगों ने माता के दरबार में हाजिरी भरी। माता ने अपने गूर के माध्यम से भादो महीने में देवताओं और असुरी शक्तियों के बीच चल रहे युद्ध का परिणाम सुनाया।
गूर अमरजीत के माध्यम से बताया गया कि देश के विभिन्न स्थानों पर लड़े गए सात युद्धों में इस बार चार स्थानों पर असुरी शक्तियां और तीन स्थानों पर देवताओं की जीत हुई। कुल मिलाकर असुरी शक्तियों का पलड़ा भारी रहा। मान्यता है कि यदि देवताओं की जीत होती है तो जान-माल का नुकसान कम होता है।
फसलों की भरमार रहती है। हर जगह खुशहाली रहती है, और यदि असुरी शक्तियों की जीत होती है तो जानमाल का नुकसान, प्राकृतिक आपदाएं, धन-धान्य की हानि, अल्प मौतें होती हैं। अमरजीत ने बताया कि जाग से पूर्व मंदिर में ठाकुर भजन मंडली साई के कलाकारों ने माता का गुणगान किया। मंदिर में भंडारे का भी आयोजन किया। इधर तुंगल क्षेत्र के आराध्य देव सत बालाकामेश्वर मंदिर में भी जाग होम का आयोजन किया।
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रात ठीक 12 बजे देवता अपने छरनाटों और देवलुओं के साथ भंडार से निकल कर मंदिर पहुंचे। यहां असुरी शक्तियों और देवताओं की हार जीत का वृत्तांत सुनाया।
देवता ने अपने गूर धर्म सिंह के माध्यम से बताया कि बंगाल की खाड़ी के तट पर शुरू हुआ युद्ध दिल्ली, जम्मू, पंजाब होते हुए हिमाचल के पधर क्षेत्र स्थित घोघड़धार में लड़ा गया। सात दिनों तक चले युद्ध का परिणाम सिद्धपासा फेंक कर किया गया। इसमें इस बार चार स्थानों पर असुरी शक्तियां और तीन स्थानों पर देवताओं की जीत हुई। संवाद
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गूर अमरजीत के माध्यम से बताया गया कि देश के विभिन्न स्थानों पर लड़े गए सात युद्धों में इस बार चार स्थानों पर असुरी शक्तियां और तीन स्थानों पर देवताओं की जीत हुई। कुल मिलाकर असुरी शक्तियों का पलड़ा भारी रहा। मान्यता है कि यदि देवताओं की जीत होती है तो जान-माल का नुकसान कम होता है।
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फसलों की भरमार रहती है। हर जगह खुशहाली रहती है, और यदि असुरी शक्तियों की जीत होती है तो जानमाल का नुकसान, प्राकृतिक आपदाएं, धन-धान्य की हानि, अल्प मौतें होती हैं। अमरजीत ने बताया कि जाग से पूर्व मंदिर में ठाकुर भजन मंडली साई के कलाकारों ने माता का गुणगान किया। मंदिर में भंडारे का भी आयोजन किया। इधर तुंगल क्षेत्र के आराध्य देव सत बालाकामेश्वर मंदिर में भी जाग होम का आयोजन किया।
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रात ठीक 12 बजे देवता अपने छरनाटों और देवलुओं के साथ भंडार से निकल कर मंदिर पहुंचे। यहां असुरी शक्तियों और देवताओं की हार जीत का वृत्तांत सुनाया।
देवता ने अपने गूर धर्म सिंह के माध्यम से बताया कि बंगाल की खाड़ी के तट पर शुरू हुआ युद्ध दिल्ली, जम्मू, पंजाब होते हुए हिमाचल के पधर क्षेत्र स्थित घोघड़धार में लड़ा गया। सात दिनों तक चले युद्ध का परिणाम सिद्धपासा फेंक कर किया गया। इसमें इस बार चार स्थानों पर असुरी शक्तियां और तीन स्थानों पर देवताओं की जीत हुई। संवाद