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Mandi News: बदलती जीवनशैली से बढ़ रहे किडनी रोगी, सही खानपान ही बचाव
Thu, 13 Mar 2025 12:13 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 13 Mar 2025 12:13 AM IST
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मंडी/जोगिंद्रनगर। बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ती लापरवाही के कारण किडनी रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जंक फूड, शराब, अत्यधिक एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन, हाई ब्लड प्रेशर और अनियंत्रित शुगर किडनी खराब होने के प्रमुख कारण बन रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार 20 साल की उम्र में ही कई युवा किडनी की गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। मंडी जिले में ही 89 मरीजों को निशुल्क डायलिसिस सुविधा दी जा रही है, लेकिन डायलिसिस यूनिटों के विस्तार के बावजूद संसाधनों की कमी से मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा।
विशेषज्ञों के मुताबिक किडनी खराब होने के दो प्रमुख कारण हैं एक्यूट और क्रोनिक। एक्यूट किडनी फेल्योर अचानक अत्यधिक दवाइयों, संक्रमण या किसी अन्य कारण से हो सकता है। क्रोनिक किडनी डिजीज धीरे-धीरे तीन महीने या उससे अधिक समय में विकसित होती है, जिसमें किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगती है। शुगर और हाई ब्लड प्रेशर किडनी को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, हेपेटाइटिस जैसी बीमारियां भी लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
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किडनी को स्वस्थ रखने के उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किडनी को स्वस्थ बनाए रखने के लिए संतुलित आहार और सही जीवनशैली जरूरी है।
- प्रोटीन युक्त आहार : अंडा, मछली, दूध-दही, हरी सब्जियां और फल सेवन करें।
- पर्याप्त पानी :
दिन में 2-3 लीटर पानी पिएं।
- नियमित व्यायाम :
रोजाना योग और वॉक को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
- दवाइयों का सीमित सेवन :
बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स और दर्द निवारक दवाएं न लें।
- शराब और नशे से बचाव :
अधिक मात्रा में शराब और नशीले पदार्थों का सेवन किडनी को नुकसान पहुंचाता है।
उच्च रक्तचाप, शुगर बढ़ने और समय पर दवाई न लेने, अत्याधिक एंटीबायोटिक दवाई लेने से किडनी मरीजों की बढ़ोतरी हो रही है। मरीजों को जब तक किडनी खराब होने का पता चलता है, तब तक स्थिति गंभीर हो जाती है। इसलिए समय पर जांच और संतुलित जीवनशैली अपनाकर इस गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है। -रितुल कपूर, स्वास्थ्य अधिकारी, द हंस फाउंडेशन मंडी।
जोगिंद्रनगर में मरीजों का आंकड़ा 50 के पार
जोगिंद्रनगर में किडनी के मरीजों का आंकड़ा 50 से पार कर चुका है। इनमें 23 मरीज नागरिक अस्पताल जोगेंद्रनगर में उपचाराधीन हैं। डायलिसिस यूनिट के प्रभारी डॉ. शुभम के मुताबिक शुगर और ब्लड प्रेशर के मरीजों में किडनी के संक्रमण का अधिक खतरा रहता है। पेट के निचले हिस्से में दर्द, आंखों में सूजन, सांस की दिक्कत और पेशाब में जलन किडनी के संक्रमित मरीजों के मुख्य लक्षण है।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार 20 साल की उम्र में ही कई युवा किडनी की गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। मंडी जिले में ही 89 मरीजों को निशुल्क डायलिसिस सुविधा दी जा रही है, लेकिन डायलिसिस यूनिटों के विस्तार के बावजूद संसाधनों की कमी से मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा।
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विशेषज्ञों के मुताबिक किडनी खराब होने के दो प्रमुख कारण हैं एक्यूट और क्रोनिक। एक्यूट किडनी फेल्योर अचानक अत्यधिक दवाइयों, संक्रमण या किसी अन्य कारण से हो सकता है। क्रोनिक किडनी डिजीज धीरे-धीरे तीन महीने या उससे अधिक समय में विकसित होती है, जिसमें किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगती है। शुगर और हाई ब्लड प्रेशर किडनी को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, हेपेटाइटिस जैसी बीमारियां भी लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
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किडनी को स्वस्थ रखने के उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किडनी को स्वस्थ बनाए रखने के लिए संतुलित आहार और सही जीवनशैली जरूरी है।
- प्रोटीन युक्त आहार : अंडा, मछली, दूध-दही, हरी सब्जियां और फल सेवन करें।
- पर्याप्त पानी :
दिन में 2-3 लीटर पानी पिएं।
- नियमित व्यायाम :
रोजाना योग और वॉक को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
- दवाइयों का सीमित सेवन :
बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स और दर्द निवारक दवाएं न लें।
- शराब और नशे से बचाव :
अधिक मात्रा में शराब और नशीले पदार्थों का सेवन किडनी को नुकसान पहुंचाता है।
उच्च रक्तचाप, शुगर बढ़ने और समय पर दवाई न लेने, अत्याधिक एंटीबायोटिक दवाई लेने से किडनी मरीजों की बढ़ोतरी हो रही है। मरीजों को जब तक किडनी खराब होने का पता चलता है, तब तक स्थिति गंभीर हो जाती है। इसलिए समय पर जांच और संतुलित जीवनशैली अपनाकर इस गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है। -रितुल कपूर, स्वास्थ्य अधिकारी, द हंस फाउंडेशन मंडी।
जोगिंद्रनगर में मरीजों का आंकड़ा 50 के पार
जोगिंद्रनगर में किडनी के मरीजों का आंकड़ा 50 से पार कर चुका है। इनमें 23 मरीज नागरिक अस्पताल जोगेंद्रनगर में उपचाराधीन हैं। डायलिसिस यूनिट के प्रभारी डॉ. शुभम के मुताबिक शुगर और ब्लड प्रेशर के मरीजों में किडनी के संक्रमण का अधिक खतरा रहता है। पेट के निचले हिस्से में दर्द, आंखों में सूजन, सांस की दिक्कत और पेशाब में जलन किडनी के संक्रमित मरीजों के मुख्य लक्षण है।