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पांच साल बाद 11 से 13 अगस्त तक मनाया जाएगा काहिका उत्सव

Fri, 06 Aug 2021 11:00 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 06 Aug 2021 11:00 PM IST
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Kahika festival will be celebrated after five years from 11 to 13 August
द्रंग के सुराहण गांव में काहिका उत्सव के दौरान देव खेल खेलते गूर। फाइल फोटो - फोटो : Mandi
द्रंग (मंडी)। पधर उपमंडल के सुराहण में काहिका उत्सव 11 से 13 अगस्त तक मनाया जाएगा। देव समागम की तैयारियां शुरू हो गई हैं। गांव के लोग साफ-सफाई में व्यस्त हैं। काहिका उत्सव की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसे हर पांच साल बाद मनाया जाता है।
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चौहारघाटी के देवाधिदेव हुरंग नारायण उत्सव में मुख्य रस्म निभाते हैं। नड़ जाति के लोगों की इस देव समागम में मुख्य भूमिका रहती है। कोरोना महामारी के चलते केवल मात्र देव कारज की परंपरा निभाई जाएगी। मेला स्थल पर किसी भी प्रकार की दुकानें लगाने आदि पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
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शुक्रवार को ग्राम पंचायत सीयून, ग्वाली और डलाह के पंचायत प्रतिनिधियों की विशेष बैठक देव कारदार समिति अध्यक्ष लेख राम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई।
इसमें देव समागम की तैयारियों के साथ व्यवस्था के लिए चर्चा की। तीन दिवसीय काहिका उत्सव में देव हुरंग नारायण के मुख्य कारदार राजू राम, पुजारी कमर सिंह, गूर कमल देव और भाग सिंह, भंडारी मान सिंह, नड़ सोमदेव विशेष सेवाएं देंगे। काहिका मेला सुराहन गांव में आराध्य देव सूत्रधारी ब्रह्मा की उपस्थिति में घाटी के देवाधिदेव हुरंग नारायण को समर्पित है।
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नड़ को जमीन में दफनाने के उपरांत देव शक्ति से किया जाएगा जिंदा
देवाधिदेव हुरंग नारायण मेले में शामिल होने के लिए अपने मूल मंदिर से शनिवार को रवाना होंगे। भ्रमण के दौरान देव हुरंग नारायण सुधार, धरमेहड़, झटिंगरी होते हुए ग्वालन गांव पहुंचेंगे। नौ अगस्त को देवता का ठहराव ग्वालन गांव में होगा।
दस अगस्त को फुटाखल गांव में देवता शिरकत करेंगे। 11 अगस्त को घोघरधार पहुंचेंगे। शाम को घोघरधार में मुरगन उत्सव मनाया जाएगा। इस दौरान देव हुरंग नारायण नारायण खुह की परिक्रमा करेंगे। 12 अगस्त को सुराहण में छिद्रा रस्म निभाई जाएगी।

13 अगस्त को सुराहण गांव में नड़रगड़ा रस्म निभाई जाएगी। इस दौरान नड़ को जमीन में दफनाने के उपरांत देव शक्ति से जिंदा किया जाएगा। जनमत है कि देव शक्ति से नड़ जिंदा न हो तो देवता की तमाम संपत्ति नड़ परिवार की हो जाती है। ऐसा वाकया अब तक देखने को नहीं मिला है। चौदह अगस्त को हारका उत्सव का आयोजन किया जाएगा।
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