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Mandi News: गोहर और थुनाग में धूल फांक रहे करोड़ों रुपये के ज्यूडिशियल पेपर

Sun, 27 Oct 2024 10:26 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Updated Sun, 27 Oct 2024 10:26 AM IST
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Judicial papers worth crores of rupees gathering dust in Gohar and Thunag
थुनाग (मंडी)। हिमाचल सरकार ने एक अप्रैल 2024 से प्रदेशभर में नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पेपर की बिक्री पर पूर्णतया रोक लगा दी है। इसके बाद से सभी ट्रेजरी कार्यालयों में नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पेपर की बिक्री बंद हो गई है। अब छपे हुए नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पेपर का एक बड़ा स्टॉक ट्रेजरी कार्यालयों के लॉकर में धूल फांक रहा है।
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सरकार ने ई-स्टांप पेपर के लिए स्टांप विक्रेताओं को अधिकृत एकत्रीकरण केंद्रों के रूप में स्थापित किया है। मगर अधिकांश स्टांप वेंडर कंप्यूटर कार्यों में दक्ष नहीं हैं। इस वजह से उनकी निर्भरता छपे हुए नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर है। सब-ट्रेजरी कार्यालय थुनाग में 1.22 करोड़ रुपये के नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पेपर और सात लाख रुपये के कोर्ट फीस टिकट उपलब्ध हैं।
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वहीं, सब-ट्रेजरी कार्यालय गोहर में एक करोड़ रुपये के नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पेपर और 10 लाख रुपये के कोर्ट फीस टिकट हैं। इन ट्रेजरी कार्यालयों में पड़े नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पेपर की कुल कीमत करोड़ों रुपये में है। इनकी बिक्री न होने से सरकार को भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है।
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स्टांप विक्रेताओं के लिए तय है एक वर्ष की समयसीमा
सरकार ने अधिकृत स्टांप विक्रेताओं को भौतिक ई-स्टांप पेपर से ई-स्टांप प्रणाली अपनाने के लिए एक वर्ष की समय सीमा तय की है। स्टांप विक्रेताओं को न्यूनतम कमीशन अदा कर इस पोर्टल के माध्यम से ई-स्टांप तैयार करने के लिए अधिकृत किया गया है। सरकार का मानना है कि लोगों को घर-द्वार पर बेहतर सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए विभिन्न विभागों में तकनीक के अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है। इससे सरकारी विभागों के कामकाज में भी पारदर्शिता आएगी।

अधिकतर विक्रेताओं के पास ऑनलाइन सुविधा नहीं : वेंडर
थुना के स्टांप वेंडर ओम प्रकाश ने बताया कि अधिकतर विक्रेताओं के पास ऑनलाइन सुविधा नहीं है। इससे उनकी बिक्री प्रभावित हो रही है। गोहर के स्टांप विक्रेता देवेंद्र शर्मा ने कहा कि ऑफलाइन स्टांप पेपर आसानी से उपलब्ध होते हैं, जबकि ई-स्टांप के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। वर्तमान में स्टांप विक्रेताओं के लिए स्टांप पेपर विक्रय की अधिकतम सीमा 20,000 रुपये प्रतिदिन है, लेकिन ई-स्टांप प्रणाली अपनाने के बाद यह सीमा बढ़ाकर 2 लाख रुपये प्रतिदिन कर दी गई है।


नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर की बिक्री सरकार के आदेशानुसार बंद है। हालांकि, कोर्ट फीस टिकट बेचे जा रहे हैं। स्टॉक में पड़े नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पेपर के संबंध में अभी सरकार से कोई आदेश नहीं आया है।
- हेमराज, ट्रेजरी ऑफिसर थुनाग।
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