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Mandi News: राहत के नाम पर मजाक, घरों से गाद निकालने में ही खर्च हो एक लाख

Fri, 28 Jul 2023 11:36 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 28 Jul 2023 11:36 PM IST
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Joke in the name of relief, one lakh should be spent only in removing silt from the houses
औट में राहत राशि को लेकर प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों ने की नारेबाजी
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बाढ़ प्रभावितों ने प्रशासन पर लगाया भेदभाव करने का आरोप


संवाद न्यूज एजेंसी

नगवाईं (मंडी) । स्नोर घाटी के बाढ़ प्रभावितों ने शुक्रवार को औट तहसील के बाहर आकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन की ओर से स्नोर घाटी के बाढ़ प्रभावितों से भेदभाव करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि 9 और 10 जुलाई को ब्यास में आई बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई, जिससे नदी के आसपास के मकानों और उपजाऊ जमीन को भारी नुकसान हुआ और फसलें बर्बाद हो गईं। राहत के नाम पर किसी को 10 तो किसी को 20 हजार रुपये मिले हैं। कुछ का आरोप है कि उन्हें कुछ भी नहीं मिला है।
इस आपदा की घड़ी में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बाढ़ प्रभावितों को उचित राहत राशि प्रदान करने का आश्वासन दिया था, लेकिन स्थानीय लोगों के नुकसान का न तो उचित मूल्यांकन करवाया गया और न ही नुकसान को देखते हुए उचित राहत राशि प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि राहत राशि के नाम पर स्थानीय बाढ़ प्रभावितों को ठगा गया है। व्यापार मंडल औट के प्रधान विनोद सिंह चावला ने बताया कि घरों में घुसी बाढ़ की रेत और गाद निकालने के लिए ही लोगों को पचास हजार से लेकर एक लाख रुपये चुकाने पड़े हैं।
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उन्होंने बताया प्रशासन की ओर से स्नोर के बाढ़ प्रभावितों की सुध नहीं ली जा रही है । उन्हें राहत देने के स्थान पर उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लोग परेशानी में हैं और प्रशासन बाढ़ प्रभावितों से मजाक कर रहा है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं, मारकंडेय टैक्सी ऑपरेटर यूनियन के प्रधान डोला सिंह महंत ने बताया कि व्यास नदी में खुलेआम हो रही डंपिंग से बाढ़ ने विकराल रूप धारण किया और व्यास अपने तटों को तोड़ते हुए लोगों के घरों में जा घुसी, जिससे प्रभावितों को अत्यधिक नुकसान झेलना पड़ा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि नदियों में डंपिंग करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। स्थानीय महिला सुषमा सूद ने बताया कि लारजी परियोजना के लिए बनी झील को पहले विद्युत विभाग ने पानी से भरा, फिर उसमें हवा में ही डंगे लगा दिए । इससे भी बाढ़ प्रभावितों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सभी बाढ़ प्रभावितों को हुए नुकसान का जल्द उचित मूल्यांकन कर राहत राशि प्रदान की जाए और नदी किनारे घरों और जमीनों की सुरक्षा के लिए शीघ्र ही पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
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इस मौके पर कार्यकारी एसडीएम बालीचौकी नीतेश ठाकुर ने बताया कि बाढ़ प्रभावितों को अभी तक सिर्फ अंतरिम राहत राशि प्रदान की गई है, जब पूरी रिपोर्ट बन जाएगी तो सभी बाढ़ प्रभावितों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। इस अवसर पर व्यापार मंडल औट के प्रधान विनोद सिंह चावला, ग्राम पंचायत औट के उप प्रधान श्याम वैद्य, ग्राम पंचायत जला काशना के प्रधान गुड्डू, मारकंडा टैक्सी ऑपरेटर यूनियन औट के प्रधान डोला सिंह महंत, निशांत, विनय, रविंदर सिंह, सोनू हांडा, संजय सोहल, हेमराज, गीतानंद, चंद्रमणि, दीपक, रामी, जगदीश, सुषमा सूद, पुष्पा, विजया, विक्की, आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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