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Mandi News: बीपीएल में चयन के लिए जी का जंजाल बना आय प्रमाण पत्र
Thu, 24 Apr 2025 05:14 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 24 Apr 2025 05:14 AM IST
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थुनाग (मंडी)। प्रदेश सरकार ने बीपीएल चयन के लिए आवेदन मांगे हैं। आवेदन के आधार पर ही बीपीएल परिवार का चयन होगा। बीपीएल आवेदन पत्र के साथ आय प्रमाण पत्र अनिवार्य कर रखा है। आय प्रमाण पत्र बनवाना बीपीएल में शामिल होने वाले इच्छुक लोगों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। आय प्रमाण पत्र में किसान सम्मान निधि और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जुड़ने से आवेदकों की आय 50 हजार रुपये से ज्यादा बन रही है जो सरकार द्वारा निर्धारित मापदंड से बहुत अधिक है।
प्रदेश सरकार ने मनरेगा में 100 दिन काम करने को भी बीपीएल चयन का आधार बनाया है। 100 दिन की मजदूरी 30 हजार रुपये सालाना बनती है। इससे मनरेगा मजदूर भी बीपीएल के लाभ से वंचित हो रहे हैं। इसके अलावा विधवा, एकल नारी, दिव्यांग और बुजुर्ग सामाजिक पेंशन धारकों की आय भी आय प्रमाण पत्र में जोड़ने से ये लोग भी बीपीएल चयन से बाहर हो जाएंगे।
पंचायत समिति सदस्य सराज और किसान सभा सदस्य बिहारी लाल ने कहा कि पहले सर्वे हो, फिर आवेदन मंगवाए जाने चाहिए। अभी सिर्फ बीपीएल के लिए आय प्रमाण पत्र बन रहे हैं। इसमें पुराने लोग आएंगे जो वर्षों से बीपीएल में जमे है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बीपीएल मुक्त करने का खेल है।
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माकपा लोक कमेटी सचिव महेंद्र राणा ने आरोप लगाया है कि प्रक्रिया से ऐसा लगता है कि सरकार पहले से शामिल अपात्र लोगों को सूची में रखना चाहती है। आय का कोई उचित मापदंड न होने के कारण मात्र बीपीएल परिवारों को ही 50 हजार से कम आय प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं। बहुत से अपात्र लोग जिनके बैंक खातों से लाखों रुपये का लेनदेन होता है, उन्हें 50,000 से कम आय दी जा रही है। जो पात्र हैं, जिन्हें असल में बीपीएल सूची में होना चाहिए, उन्हें आय प्रमाण पत्र नहीं मिल रहे। आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल है और आय प्रमाण पत्र को बनाने में एक सप्ताह का समय लगता है।
श्रमिक कामगार संघ के प्रदेशाध्यक्ष संतराम ने सरकार से सही मापदंड तय करने और आवेदन करने की समय सीमा भी बढ़ाने का आग्रह किया है।
आय प्रमाण पत्र आवेदक के सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर बनाया जाता है। आय प्रमाण में आवेदक को सामाजिक सुरक्षा पेंशन, मनरेगा सहित सभी स्रोतों से होने वाली आय का ब्यौरा देना होता है। जमीन की आय की वेरिफिकेशन पटवारी करता है। पहले से बीपीएल में शामिल लोगों की वेरिफिकेशन भी करवाई जा रही है।
-रजत सेठी, तहसीलदार थुनाग
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प्रदेश सरकार ने मनरेगा में 100 दिन काम करने को भी बीपीएल चयन का आधार बनाया है। 100 दिन की मजदूरी 30 हजार रुपये सालाना बनती है। इससे मनरेगा मजदूर भी बीपीएल के लाभ से वंचित हो रहे हैं। इसके अलावा विधवा, एकल नारी, दिव्यांग और बुजुर्ग सामाजिक पेंशन धारकों की आय भी आय प्रमाण पत्र में जोड़ने से ये लोग भी बीपीएल चयन से बाहर हो जाएंगे।
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पंचायत समिति सदस्य सराज और किसान सभा सदस्य बिहारी लाल ने कहा कि पहले सर्वे हो, फिर आवेदन मंगवाए जाने चाहिए। अभी सिर्फ बीपीएल के लिए आय प्रमाण पत्र बन रहे हैं। इसमें पुराने लोग आएंगे जो वर्षों से बीपीएल में जमे है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बीपीएल मुक्त करने का खेल है।
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माकपा लोक कमेटी सचिव महेंद्र राणा ने आरोप लगाया है कि प्रक्रिया से ऐसा लगता है कि सरकार पहले से शामिल अपात्र लोगों को सूची में रखना चाहती है। आय का कोई उचित मापदंड न होने के कारण मात्र बीपीएल परिवारों को ही 50 हजार से कम आय प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं। बहुत से अपात्र लोग जिनके बैंक खातों से लाखों रुपये का लेनदेन होता है, उन्हें 50,000 से कम आय दी जा रही है। जो पात्र हैं, जिन्हें असल में बीपीएल सूची में होना चाहिए, उन्हें आय प्रमाण पत्र नहीं मिल रहे। आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल है और आय प्रमाण पत्र को बनाने में एक सप्ताह का समय लगता है।
श्रमिक कामगार संघ के प्रदेशाध्यक्ष संतराम ने सरकार से सही मापदंड तय करने और आवेदन करने की समय सीमा भी बढ़ाने का आग्रह किया है।
आय प्रमाण पत्र आवेदक के सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर बनाया जाता है। आय प्रमाण में आवेदक को सामाजिक सुरक्षा पेंशन, मनरेगा सहित सभी स्रोतों से होने वाली आय का ब्यौरा देना होता है। जमीन की आय की वेरिफिकेशन पटवारी करता है। पहले से बीपीएल में शामिल लोगों की वेरिफिकेशन भी करवाई जा रही है।
-रजत सेठी, तहसीलदार थुनाग