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Mandi News: अंधेरे से लग रहा डर, आंखों में घूम रहा तबाही का मंजर
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मंडी। अब अंधेरा होते डर लगने लगा है। आंखों में तबाही का मंजर घूम रहा है। जाएं भी कहां, कुछ तो रिश्तेदारों के घर रातें गुजारने को मजबूर हैं। जिन पड़ोसियों के घर सुरक्षित हैं, वहां भी प्रभावित लोग रह रहे हैं। 30 जून की रात वाला भयानक मंजर एक बार फिर उनके जहन में आ रहा है। 13 किलोमीटर जंगल के रास्ते बगस्याड़ पहुंचकर वहां से बस के माध्यम से मंडी पहुंचे कमलेश ठाकुर ने बताया कि प्राकृतिक आपदा ने सब कुछ छीन लिया है। घर, रास्ते, सड़कें सभी तहस नहस हो गए हैं।
जोनल अस्पताल मंडी के निकट सराजी ढाबा का संचालन करने वाले कमलेश ठाकुर का घर थुनाग से करीब दो किलोमीटर आगे जंजैहली की ओर है। कमलेश ठाकुर ने बताया कि 30 जून को उनके घर में देवता के आगमन पर समारोह था। रात को झमाझम बारिश हो रही थी।करीब 11:30 बजे अचानक बिजली चली गई। ताया के लड़के ने फोन कर सूचना दी कि साथ लगती खड्ड का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके बाद मोबाइल नेटवर्क ठप हो गया। सुबह होने पर बगस्याड़ तक के दायरे में सब कुछ तबाह हो गया।
वह किसी तरह जंगल के रास्ते जान जोखिम में डाल कर बगस्याड़ पहुंचा। इसके बाद बस से मंडी पहुंचा। भाई और ढाबे में कार्य करने वाले अन्य साथी अभी भी घरों में ही फंसे हुए हैं। तबाही का मंजर दिमाग में ही घूम रहा है।
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थुनाग पंचायत में दिनेश का मकान फिर ढहा
कमलेश ठाकुर ने बताया कि थुनाग में पंचायत घर के साथ उसके दोस्त का घर पिछली बरसात में तहस नहस हो गया था। इस बार फिर उसके घर का नामोनिशान मिट गया है। दो बार घर के तबाह होने से वह पूरी तरह टूट गया है। थुनाग में ऐसे बहुत लोग और दुकानदार हैं, जिनकी उम्र भर की कमाई से बनाए आशियाने तबाह हो गए हैं।
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जोनल अस्पताल मंडी के निकट सराजी ढाबा का संचालन करने वाले कमलेश ठाकुर का घर थुनाग से करीब दो किलोमीटर आगे जंजैहली की ओर है। कमलेश ठाकुर ने बताया कि 30 जून को उनके घर में देवता के आगमन पर समारोह था। रात को झमाझम बारिश हो रही थी।करीब 11:30 बजे अचानक बिजली चली गई। ताया के लड़के ने फोन कर सूचना दी कि साथ लगती खड्ड का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके बाद मोबाइल नेटवर्क ठप हो गया। सुबह होने पर बगस्याड़ तक के दायरे में सब कुछ तबाह हो गया।
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वह किसी तरह जंगल के रास्ते जान जोखिम में डाल कर बगस्याड़ पहुंचा। इसके बाद बस से मंडी पहुंचा। भाई और ढाबे में कार्य करने वाले अन्य साथी अभी भी घरों में ही फंसे हुए हैं। तबाही का मंजर दिमाग में ही घूम रहा है।
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थुनाग पंचायत में दिनेश का मकान फिर ढहा
कमलेश ठाकुर ने बताया कि थुनाग में पंचायत घर के साथ उसके दोस्त का घर पिछली बरसात में तहस नहस हो गया था। इस बार फिर उसके घर का नामोनिशान मिट गया है। दो बार घर के तबाह होने से वह पूरी तरह टूट गया है। थुनाग में ऐसे बहुत लोग और दुकानदार हैं, जिनकी उम्र भर की कमाई से बनाए आशियाने तबाह हो गए हैं।
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