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Mandi News: हिंदू शिक्षकों ने तराशा हलिम का हुनर, विदेश में अर्थशास्त्री के रूप में बनाई पहचान
Fri, 07 Nov 2025 06:40 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Fri, 07 Nov 2025 06:40 AM IST
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सुंदरनगर (मंडी)। सुंदरनगर के मुस्लिम बाहुल्य गांव डिनक के निवासी 75 साल के बुजुर्ग हलिम अंसारी अपने गांव के सबसे अधिक पढ़े लिखे और विदेश में बड़ी कंपनियों में सेवा दे चुके हैं। हिंदू शिक्षकों ने हलिम का हुनर तराशा और विदेश में उन्होंने अर्थशास्त्री के रूप में पहचान बनाई। अपने समुदाय में अपनी उच्च पढ़ाई, वाकपटुता और कानूनी जानकार होने की वजह से इनके पास दूर-दूर से लोग सलाह मशविरा करने आते हैं। विदेश में करीब 40 साल रहने की वजह से आज भी लोग उनको अपने नाम से कम और अमेरिकन के नाम से अधिक पहचानते हैं।
हलिम अंसारी जिला के ऐसे पहले युवा रहे हैं जिन्होंने साठ के दशक में मैट्रिक तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद मंडी कॉलेज में उच्च शिक्षा के लिए दाखिला लिया। इसके बाद कश्मीर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए और पीएचडी की। उसी दौरान इन्होंने इसी विश्वविद्यालय में शिक्षण भी किया। यही वजह है कि आज इनके अपने गांव के कई मुस्लिम युवक डॉक्टर, इंजीनियर और आईआईटी तक पहुंचे हैं। कश्मीर में शिक्षण के दौरान विश्वविद्यालय के जर्मन प्रोफेसर ने उनकी प्रतिभा को जाना और जर्मनी वापस लौटते ही उन्हें जर्मनी बुला लिया। हलिम अंसारी जर्मनी होते हुए अमेरिका पहुंच गए और करीब 40 साल तक वहां बड़ी कंपनियों में आर्थिक सलाहकार के रूप में सेवाएं दीं। इसके अलावा नोबल पुरस्कार विजेता विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. अमर्त्य सेन के साथ अफ्रीका में उनके प्रोजेक्ट में काम किया।
विदेश में रहते हुए भी उनकी जड़े अपने गांव और परिवार से जुड़ी रही। यही वजह है कि वह साल में एक बार जरूर अपने गांव लौटते थे। अब पूरी तरह से वह वापस अपने देश आ गए हैं। मगर अभी कई कंपनियां इनसे विदेश से भी सलाह लेती हैं। क्योंकि अपने समय में वह अमेरिका में चर्चित अर्थशास्त्री के रूप में जाने जाते थे।
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मैं इस मुकाम तक उन हिंदू शिक्षकों की वजह से पहुंचा हूं, जिन्होंने मुझे तराशने में कोई कमी नहीं रखी। आज उन्हीं के प्रताप से दुनिया में एक अर्थशास्त्री और वक्ता के रूप में पहचान मिली है। मेरी इच्छा है कि हमारे युवा भी शिक्षा के महत्व को समझे और अज्ञानता के अंधकार से छुटकारा पाएं।
-हलिम अंसारी, अर्थशास्त्री, निवासी डिनक, सुंदरनगर
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हलिम अंसारी जिला के ऐसे पहले युवा रहे हैं जिन्होंने साठ के दशक में मैट्रिक तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद मंडी कॉलेज में उच्च शिक्षा के लिए दाखिला लिया। इसके बाद कश्मीर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए और पीएचडी की। उसी दौरान इन्होंने इसी विश्वविद्यालय में शिक्षण भी किया। यही वजह है कि आज इनके अपने गांव के कई मुस्लिम युवक डॉक्टर, इंजीनियर और आईआईटी तक पहुंचे हैं। कश्मीर में शिक्षण के दौरान विश्वविद्यालय के जर्मन प्रोफेसर ने उनकी प्रतिभा को जाना और जर्मनी वापस लौटते ही उन्हें जर्मनी बुला लिया। हलिम अंसारी जर्मनी होते हुए अमेरिका पहुंच गए और करीब 40 साल तक वहां बड़ी कंपनियों में आर्थिक सलाहकार के रूप में सेवाएं दीं। इसके अलावा नोबल पुरस्कार विजेता विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. अमर्त्य सेन के साथ अफ्रीका में उनके प्रोजेक्ट में काम किया।
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विदेश में रहते हुए भी उनकी जड़े अपने गांव और परिवार से जुड़ी रही। यही वजह है कि वह साल में एक बार जरूर अपने गांव लौटते थे। अब पूरी तरह से वह वापस अपने देश आ गए हैं। मगर अभी कई कंपनियां इनसे विदेश से भी सलाह लेती हैं। क्योंकि अपने समय में वह अमेरिका में चर्चित अर्थशास्त्री के रूप में जाने जाते थे।
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मैं इस मुकाम तक उन हिंदू शिक्षकों की वजह से पहुंचा हूं, जिन्होंने मुझे तराशने में कोई कमी नहीं रखी। आज उन्हीं के प्रताप से दुनिया में एक अर्थशास्त्री और वक्ता के रूप में पहचान मिली है। मेरी इच्छा है कि हमारे युवा भी शिक्षा के महत्व को समझे और अज्ञानता के अंधकार से छुटकारा पाएं।
-हलिम अंसारी, अर्थशास्त्री, निवासी डिनक, सुंदरनगर