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Mandi News: पहली फरवरी से मंडी, कुल्लू के निजी अस्पतालों में नहीं चलेगा हिमकेयर

Sun, 28 Jan 2024 11:13 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jan 2024 11:13 PM IST
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Himcare will not run in private hospitals of Mandi and Kullu from February 1st.
मंडी। हिमाचल प्राइवेट डॉक्टर एसोसिएशन (एचपीडीए) मंडी और कुल्लू चैप्टर के सभी सदस्यों ने आपसी सहमति से पहली फरवरी 2024 से हिमकेयर हेल्थ कार्ड के तहत स्वास्थ्य सुविधा न देने का फैसला लिया है। यह बात मंडी जिला से हिमकेयर में सूचीबद्ध 30 और कुल्लू जिला से 13 निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से जारी प्रेस बयान में कही।एसोसिएशन ने बताया कि हिमकेयर और आयुष्मान स्वास्थ्य देखभाल योजना हिमाचल प्रदेश के निवासियों को निजी और सरकारी दोनों अस्पतालों में पूर्ण कैशलेस स्वास्थ्य देखभाल सुविधा का वादा कर रही है और निजी अस्पतालों ने 24 घंटे सेवाएं प्रदान करने के वादे के साथ जिम्मेदारी साझा की है। एसोसिएशन ने कहा कि निजी अस्पतालों को मुश्किल समय का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि निजी अस्पतालों को आठ महीने से राज्य सरकार से करोड़ों का बकाया भुगतान नहीं मिल रहा है, जबकि इसका भुगतान एक माह में हाेना चाहिए।
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एसोसिएशन ने कहा कि अब स्थिति यह है कि राज्य में लगभग हर व्यक्ति के पास यह स्वास्थ्य कार्ड है और वह कैशलेस सुविधा का लाभ उठा रहा है। निजी अस्पताल प्रबंधन को भी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि उन्हें मरीजों को दवा और अन्य स्वास्थ्य उपकरण खुले बाजार से नकद खरीदने पड़ते हैं। एसोसिएशन ने कहा कि निजी अस्पताल सरकार की योजना का सम्मान कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी पीड़ा को अनसुना कर रही है। इस कारण अधिकांश निजी अस्पताल कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। एसोसिएशन ने कहा कि उन्होंने भारी मन से निर्णय लिया है कि वे सरकार से आग्रह करेंगे कि उनकी बकाया राशि 9 प्रतिशत ब्याज के साथ दिया जाए अन्यथा एसोसिएशन के सदस्य मजबूर होकर स्वास्थ्य कार्ड लेना बंद कर देंगे, क्योंकि इनमें कोई नकद रकम मिलने की गारंटी नहीं है।
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उन्होंने कहा कि अगर राज्य भर में निजी स्वास्थ्य संस्थानों का बकाया नहीं चुकाया गया तो फरवरी के पहले सप्ताह में सांकेतिक बंद रहेगा और मांग न माने जाने पर इसे अनिश्चितकालीन कर दिया जाएगा। एसोसिएशन के सदस्य निजी अस्पताल आयुष्मान भारत कार्ड लाभार्थियों की सेवा जारी रखेंगे। बता दें कि कई बड़े अस्पतालों की देनदारी एक से लेकर चार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे में उन्हें अस्पताल का संचालन करना मुश्किल हो रहा है।
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