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Mandi News: सड़क होती तो राख होने से बच जाता मकान
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बालीचौकी (मंडी)। उपमंडल के कशौड़ क्षेत्र के टिटली गांव के लिए अगर सड़क सुविधा होती तो पांच भाइयों को अपने सपनों के आशियाने से हाथ नहीं धोना पड़ता। उनकी आंखों के सामने मकान धू-धू कर नहीं जलता। सड़क सुविधा होती तो दमकल टीम मौके पर पहुंचकर घर जलने से बचा सकती थी। ग्रामीणों ने मोर्चा तो संभाला लेकिन घर जलने से बचा नहीं पाए। क्षेत्र में आग की घटनाओं का बार-बार होना अब चिंता का विषय बन गया है।
आग की घटना से बेघर हुए परिवारों के सदस्यों को अब ठंड में खुले आसमान के तले तंबू में रातें गुजारना पड़ेंगी। पांच भाइयों के इस मकान में 50 सदस्य रहते थे। परिवार के सदस्यों को सामुदायिक भवन में शिफ्ट कर दिया है। सभी कुछ जल कर राख हो जाने से अनाज भी शेष नहीं बचा है। ग्रामीणों ने अब इन प्रभावितों के भोजन की व्यवस्था की है। कपड़ों सहित अन्य इंतजाम भी किया है।
बुजुर्ग मंगलु राम का कहना है कि घरों में मवेशियों के लिए रखा हुआ चारा भी आग की घटनाओं का कारण बन रहा है। कुछ घरों में नाजुक तारों की वायरिंग भी आग की वजह बन जाती है। पंचायत के प्रधान चंद्रशेखर का कहना है अगर टिटली गांव में अगर सड़क होती तो शायद घर बच सकता था। प्रभावित परिवारों के बच्चों की किताबें और अन्य सामग्री भी जलकर राख हो गई है।
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आग की घटना से बेघर हुए परिवारों के सदस्यों को अब ठंड में खुले आसमान के तले तंबू में रातें गुजारना पड़ेंगी। पांच भाइयों के इस मकान में 50 सदस्य रहते थे। परिवार के सदस्यों को सामुदायिक भवन में शिफ्ट कर दिया है। सभी कुछ जल कर राख हो जाने से अनाज भी शेष नहीं बचा है। ग्रामीणों ने अब इन प्रभावितों के भोजन की व्यवस्था की है। कपड़ों सहित अन्य इंतजाम भी किया है।
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बुजुर्ग मंगलु राम का कहना है कि घरों में मवेशियों के लिए रखा हुआ चारा भी आग की घटनाओं का कारण बन रहा है। कुछ घरों में नाजुक तारों की वायरिंग भी आग की वजह बन जाती है। पंचायत के प्रधान चंद्रशेखर का कहना है अगर टिटली गांव में अगर सड़क होती तो शायद घर बच सकता था। प्रभावित परिवारों के बच्चों की किताबें और अन्य सामग्री भी जलकर राख हो गई है।
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