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फर्जी ऋण आवंटन मामला : पूर्व कमेटी के सदस्यों की पहचान तक नहीं
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हमीरपुर। कृषि सहकारी सभा संगरोह में कथित फर्जी ऋण आवंटन और करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के मामले में कार्रवाई की रफ्तार पर सवाल उठने लगे हैं। एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी तत्कालीन प्रबंधन कमेटी के सदस्यों के नाम-पते तक स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। वहीं, सभा के पूर्व सचिव की संपत्ति का ब्योरा भी करीब एक साल बाद सहकारिता विभाग को मिला है। दूसरी ओर, सभा में निवेश करने वाले लोग अपनी रकम वापस पाने के लिए विभाग और लोक उपभोक्ता अदालतों के चक्कर काटने के लिए मजबूर हैं।
सहकारिता विभाग ने पूर्व सचिव और तत्कालीन प्रबंधन कमेटी की संपत्ति अटैच करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए तहसीलदार टौणीदेवी से पत्राचार किया था। विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस संबंध में कई बार रिमाइंडर भेजे गए, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। राजस्व विभाग का कहना है कि सहकारिता विभाग से मिले पत्र में कमेटी के सदस्यों के नाम-पते का पूरा ब्योरा ही उपलब्ध नहीं था। अब पूर्व सचिव की जमीन की जमाबंदी का ब्योरा विभाग को सौंपा गया है, जबकि कमेटी के सदस्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।
पहले जांच में सामने आई थीं 10 खामियां
संगरोह सभा में कथित फर्जी ऋण और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सहकारिता विभाग की धारा 69(2) के तहत जांच हुई। जांच में ऑडिट पैरा समेत 10 बिंदुओं पर खामियां सामने आई थीं। जांच अधिकारी ने 18 मार्च 2025 को रिपोर्ट विभाग को सौंपी थी। इसके बाद पूर्व सचिव के खिलाफ कार्रवाई और कथित गबन व धोखाधड़ी की पुलिस जांच के लिए शिकायत करने के निर्देश दिए गए थे। मामले की जांच विजिलेंस स्तर पर भी चल रही है।
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अपने पैसे के लिए कार्यालयों में भटक रहे लोग
सहकारी सभा में निवेश करने वाले लोग एफडी और आरडी की मियाद पूरी होने के बाद पैसे के लिए तरस रहे हैं। कुछ खाताधारक उपभोक्ता अदालत में मामले को उठा चुके है। अपने ही पैसे के लिए लोग वर्षों से इंतजार कर रहे हैं।
सभा के पूर्व सचिव और तत्कालीन कमेटी की संपत्ति अटैच करने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए तहसीलदार टौणीदेवी को पत्राचार किया गया है। इस विषय पर कोई जवाब नहीं आया है। कई बार रिमाइंडर भी भेजे गए हैं।
-- रवि कुमार, सहायक पंजीयक, सहकारिता विभाग हमीरपुर
सहकारिता विभाग से मिले पत्र में पूर्व सचिव और कमेटी के नाम-पते का ब्योरा नहीं था। विभाग को पत्र भेजकर जानकारी मांगी गई थी। पूर्व सचिव का ब्योरा मिलने के बाद उनकी जमीन की जमाबंदी शुक्रवार को विभाग को सौंप दी गई है। पूर्व कमेटी के सदस्यों के नाम-पते की जानकारी भी मांगी गई है।
-- देशराज कटवाल, नायब तहसीलदार, टौणीदेवी
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सहकारिता विभाग ने पूर्व सचिव और तत्कालीन प्रबंधन कमेटी की संपत्ति अटैच करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए तहसीलदार टौणीदेवी से पत्राचार किया था। विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस संबंध में कई बार रिमाइंडर भेजे गए, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। राजस्व विभाग का कहना है कि सहकारिता विभाग से मिले पत्र में कमेटी के सदस्यों के नाम-पते का पूरा ब्योरा ही उपलब्ध नहीं था। अब पूर्व सचिव की जमीन की जमाबंदी का ब्योरा विभाग को सौंपा गया है, जबकि कमेटी के सदस्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।
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पहले जांच में सामने आई थीं 10 खामियां
संगरोह सभा में कथित फर्जी ऋण और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सहकारिता विभाग की धारा 69(2) के तहत जांच हुई। जांच में ऑडिट पैरा समेत 10 बिंदुओं पर खामियां सामने आई थीं। जांच अधिकारी ने 18 मार्च 2025 को रिपोर्ट विभाग को सौंपी थी। इसके बाद पूर्व सचिव के खिलाफ कार्रवाई और कथित गबन व धोखाधड़ी की पुलिस जांच के लिए शिकायत करने के निर्देश दिए गए थे। मामले की जांच विजिलेंस स्तर पर भी चल रही है।
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अपने पैसे के लिए कार्यालयों में भटक रहे लोग
सहकारी सभा में निवेश करने वाले लोग एफडी और आरडी की मियाद पूरी होने के बाद पैसे के लिए तरस रहे हैं। कुछ खाताधारक उपभोक्ता अदालत में मामले को उठा चुके है। अपने ही पैसे के लिए लोग वर्षों से इंतजार कर रहे हैं।
सभा के पूर्व सचिव और तत्कालीन कमेटी की संपत्ति अटैच करने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए तहसीलदार टौणीदेवी को पत्राचार किया गया है। इस विषय पर कोई जवाब नहीं आया है। कई बार रिमाइंडर भी भेजे गए हैं।
सहकारिता विभाग से मिले पत्र में पूर्व सचिव और कमेटी के नाम-पते का ब्योरा नहीं था। विभाग को पत्र भेजकर जानकारी मांगी गई थी। पूर्व सचिव का ब्योरा मिलने के बाद उनकी जमीन की जमाबंदी शुक्रवार को विभाग को सौंप दी गई है। पूर्व कमेटी के सदस्यों के नाम-पते की जानकारी भी मांगी गई है।