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Mandi News: अश्वगंधा की खेती से आत्मनिर्भर बनेंगे किसान
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प्रदेश आयुष विभाग दो लाख पौधे करेगा वितरित, किसान भी किए जाएंगे जागरूक
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संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। हिमाचल में अब अश्वगंधा और अन्य औषधीय पौधों की खेती से भी किसान आत्मनिर्भर बनेंगे। प्रदेश के नौ जिलों में आयुष विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। इसमें किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। हमीरपुर, बिलासपुर, ऊना, कांगड़ा, सोलन, सिरमौर, चंबा और शिमला में लगभग दो लाख पौधे वितरित किए जाएंगे।
अश्वगंधा की खेती से किसानों को औद्योगिक क्षेत्र से लाभान्वित करने के उद्देश्य से प्रशिक्षण भी दिलाया जा रहा है। मोटापा, उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियों के लिए लगातार लाभदायक साबित हो रहे अश्वगंधा के पौधे की जड़ों से दवाओं का निर्माण किया जाता है। आयुष विभाग हमीरपुर, रोहड़ू और बिलासपुर में इन पौधों की नर्सरी विकसित कर रहा है।
परियोजना अधिकारी एवं प्रभारी डॉ उज्ज्वलदीप शर्मा, उपमंडलीय आयुष चिकित्साधिकारी डाॅ. रक्षक पाल, एएमओ पंकज पालसरा, रोटेरियन अजय ठाकुर, विनोद राठौर आदि मौजूद रहे। शुक्रवार को जोगिंद्रनगर पहुंचे आयुष विभाग के मंडी संभाग के उपनिदेशक डाॅ. राजन सिंह ने कहा कि अश्वगंधा का पौधा महज 135 दिन में तैयार होगा। इसके पत्ते का इस्तेमाल अगर किसान बीज अंकुरण के लिए करेंगे तो तीन साल तक यह पौधा खेतों में स्थापित रहता है। इसकी जड़ों को आयुष विभाग को सौंपने पर किसानों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी। बताया कि एक एकड़ भूमि पर अश्वगंधा की खेती से किसानों को हजारों लाखों की आमदनी होगी। पारंपरिक फसलों से हटकर किसानों को अश्वगंधा की खेती से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश में दो लाख पौधों की खेती का लक्ष्य रखा गया है। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। हिमाचल में अब अश्वगंधा और अन्य औषधीय पौधों की खेती से भी किसान आत्मनिर्भर बनेंगे। प्रदेश के नौ जिलों में आयुष विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। इसमें किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। हमीरपुर, बिलासपुर, ऊना, कांगड़ा, सोलन, सिरमौर, चंबा और शिमला में लगभग दो लाख पौधे वितरित किए जाएंगे।
अश्वगंधा की खेती से किसानों को औद्योगिक क्षेत्र से लाभान्वित करने के उद्देश्य से प्रशिक्षण भी दिलाया जा रहा है। मोटापा, उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियों के लिए लगातार लाभदायक साबित हो रहे अश्वगंधा के पौधे की जड़ों से दवाओं का निर्माण किया जाता है। आयुष विभाग हमीरपुर, रोहड़ू और बिलासपुर में इन पौधों की नर्सरी विकसित कर रहा है।
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परियोजना अधिकारी एवं प्रभारी डॉ उज्ज्वलदीप शर्मा, उपमंडलीय आयुष चिकित्साधिकारी डाॅ. रक्षक पाल, एएमओ पंकज पालसरा, रोटेरियन अजय ठाकुर, विनोद राठौर आदि मौजूद रहे। शुक्रवार को जोगिंद्रनगर पहुंचे आयुष विभाग के मंडी संभाग के उपनिदेशक डाॅ. राजन सिंह ने कहा कि अश्वगंधा का पौधा महज 135 दिन में तैयार होगा। इसके पत्ते का इस्तेमाल अगर किसान बीज अंकुरण के लिए करेंगे तो तीन साल तक यह पौधा खेतों में स्थापित रहता है। इसकी जड़ों को आयुष विभाग को सौंपने पर किसानों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी। बताया कि एक एकड़ भूमि पर अश्वगंधा की खेती से किसानों को हजारों लाखों की आमदनी होगी। पारंपरिक फसलों से हटकर किसानों को अश्वगंधा की खेती से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश में दो लाख पौधों की खेती का लक्ष्य रखा गया है। संवाद
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