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Mandi News: मक्की की फसल पर फॉल आर्मी वर्म का हमला

Wed, 15 Jul 2026 03:48 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jul 2026 03:48 AM IST
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Fall Armyworm attack on the maize crop
48 हजार हेक्टेयर फसल पर मंडराया खतरा
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कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर ने जारी की एडवाइजरी
समय पर नियंत्रण नहीं किया तो बढ़ सकता है नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरनगर (मंडी)। जिले में खरीफ सीजन के दौरान मक्की की फसल पर फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप तेजी से बढ़ने लगा है। कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर ने इसे लेकर किसानों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए समय रहते नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यदि शुरुआती अवस्था में इस कीट पर नियंत्रण नहीं किया गया तो बड़े पैमाने पर फसल को नुकसान पहुंच सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर के प्रभारी एवं वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. पंकज सूद ने बताया कि जिले में करीब 48 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मक्की की खेती होती है जबकि प्रदेशभर में लगभग 2.85 लाख हेक्टेयर भूमि पर मक्की उगाई जाती है। तीन-चार वर्षों से विदेशी मूल का यह आक्रामक कीट किसानों के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इस वर्ष मौसम की अनुकूल परिस्थितियों के कारण हाइब्रिड मक्की की लगभग सभी किस्मों पर इसका प्रकोप अधिक देखा जा रहा है।
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डॉ. सूद ने बताया कि इस कीट का लार्वा पहले पत्तियों और तनों को खाता है और बाद में भुट्टों के भीतर प्रवेश कर उन्हें खोखला कर देता है। इससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होते हैं। उन्होंने किसानों को नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से संपर्क करने की सलाह दी है। रासायनिक नियंत्रण के लिए क्लोरेंट्रानिलिप्रोल (कोराजन) का 0.4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से या इमामेक्टिन बेंजोएट का अनुशंसित मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी गई है। यदि प्रकोप बना रहे तो 15 दिन के अंतराल पर दोबारा स्प्रे करने की भी सिफारिश की गई है।
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इसके अलावा खेतों में वयस्क पतंगों की निगरानी और नियंत्रण के लिए फनल ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है। इससे अंडे देने वाले पतंगों की संख्या कम होगी और लार्वा बनने की प्रक्रिया पर शुरुआती स्तर पर ही रोक लगाई जा सकेगी।
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