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दिवाली में झुलसने वालों को बेहतर उपचार देने के लिए क्षेत्रीय अस्पताल पूरी तरह तैयार
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क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में मौजूद पांच बिस्तर वाला बर्न यूनिट संवाद
- फोटो : Mandi
मंडी। दिवाली के त्योहार पर आग की घटनाओं से निपटने के लिए जहां अग्निशमन विभाग पूरी तरह तैयार है, वहीं लोगों को बेहतर उपचार देने के लिए भी क्षेत्रीय अस्पताल मंडी और मेडिकल कॉलेज नेरचौक में तैयारियां पूरी कर ली हैं।
क्षेत्रीय अस्पताल और मेडिकल कॉलेज नेरचौक में आग से झुलसने वालों के लिए सर्जिकल वार्ड के साथ 5-10 बिस्तरों का बर्न वार्ड बनाया गया है। बर्न पीड़ितों को आपातकाल वार्ड में भी प्राथमिक उपचार देने की सुविधा रहती है। यहां विशेषज्ञ चिकित्सक सहित 24 घंटे चिकित्सक और स्टाफ मौजूद रहता है। हालांकि जिले के अन्य पीएचसी और सीएचसी में भी आग से झुलसने पर लोगों को प्राथमिक उपचार की सुविधा रहती है। बर्न की प्रतिशतता को देखते हुए उन्हें बड़े अस्पतालों के लिए रेफर किया जाता है। आग से अत्यधिक झुलसने पर बर्न वार्डों में विशेष व्यवस्था रहती है। जहां मरीज के जले हुए भाग से कपड़ों को हटाकर सबसे अलग रखा जाता है, ताकि मरीज के घाव में संक्रमण न फैल सके। वहीं, दूरदराज में होने वाली आग लगने की घटनाओं में झुलसने वाले लोगों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 24 घंटे 108 वाहन सेवा तैनात रहती है।
क्षेत्रीय अस्पताल मंडी के चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश ठाकुर ने बर्न मामलों में बरती जाने वाली सावधानी की जानकारी देते हुए बताया कि हर वर्ष दीपावली के दौरान पटाखों से जलने के बहुत से मामले अस्पताल पहुंचते हैं। जिला भर के अस्पतालों में लोगों को प्राथमिक उपचार देने की व्यवस्था रहती है। जलने की प्रतिशतता को देखते हुए उन्हें बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता है। हालांकि क्षेत्रीय अस्पताल मंडी मौजूूद सुविधाओं के चलते बहुत कम लोगों को रेफर किया जाता है।
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जलने पर क्या करें, क्या न करें
चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश ने लोगों से आह्वान किया कि जलने पर तुरंत जख्म पर ठंडा पानी या बर्फ लगा दें, ताकि उस जगह फफोले न उभर सकें। एंटीसेप्टिक क्रीम लगाने के बाद तुरंत अस्पताल पहुंच कर चिकित्सक से सलाह लें। घरेलू उपचार से बचें। कहा कि पटाखों से उठने वाला धुआं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रहता है। जिसका सबसे ज्यादा असर सांस के रोगियों पर पड़ता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि पटाखे न चलाकर इस बार धुआं रहित दिवाली मनाएं।
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क्षेत्रीय अस्पताल और मेडिकल कॉलेज नेरचौक में आग से झुलसने वालों के लिए सर्जिकल वार्ड के साथ 5-10 बिस्तरों का बर्न वार्ड बनाया गया है। बर्न पीड़ितों को आपातकाल वार्ड में भी प्राथमिक उपचार देने की सुविधा रहती है। यहां विशेषज्ञ चिकित्सक सहित 24 घंटे चिकित्सक और स्टाफ मौजूद रहता है। हालांकि जिले के अन्य पीएचसी और सीएचसी में भी आग से झुलसने पर लोगों को प्राथमिक उपचार की सुविधा रहती है। बर्न की प्रतिशतता को देखते हुए उन्हें बड़े अस्पतालों के लिए रेफर किया जाता है। आग से अत्यधिक झुलसने पर बर्न वार्डों में विशेष व्यवस्था रहती है। जहां मरीज के जले हुए भाग से कपड़ों को हटाकर सबसे अलग रखा जाता है, ताकि मरीज के घाव में संक्रमण न फैल सके। वहीं, दूरदराज में होने वाली आग लगने की घटनाओं में झुलसने वाले लोगों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 24 घंटे 108 वाहन सेवा तैनात रहती है।
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क्षेत्रीय अस्पताल मंडी के चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश ठाकुर ने बर्न मामलों में बरती जाने वाली सावधानी की जानकारी देते हुए बताया कि हर वर्ष दीपावली के दौरान पटाखों से जलने के बहुत से मामले अस्पताल पहुंचते हैं। जिला भर के अस्पतालों में लोगों को प्राथमिक उपचार देने की व्यवस्था रहती है। जलने की प्रतिशतता को देखते हुए उन्हें बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता है। हालांकि क्षेत्रीय अस्पताल मंडी मौजूूद सुविधाओं के चलते बहुत कम लोगों को रेफर किया जाता है।
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जलने पर क्या करें, क्या न करें
चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश ने लोगों से आह्वान किया कि जलने पर तुरंत जख्म पर ठंडा पानी या बर्फ लगा दें, ताकि उस जगह फफोले न उभर सकें। एंटीसेप्टिक क्रीम लगाने के बाद तुरंत अस्पताल पहुंच कर चिकित्सक से सलाह लें। घरेलू उपचार से बचें। कहा कि पटाखों से उठने वाला धुआं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रहता है। जिसका सबसे ज्यादा असर सांस के रोगियों पर पड़ता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि पटाखे न चलाकर इस बार धुआं रहित दिवाली मनाएं।