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Mandi News: जोनल अस्पताल में सैंपल को लेकर लैब-तकनीशियन और नर्सों में विवाद
Thu, 29 May 2025 12:51 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 29 May 2025 12:51 AM IST
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सीएमओ को भेजा शिकायत पत्र, लैब-तकनीशियन ने कहा-नर्सों के व्यवहार से रोज हो रहीं झड़पें
क्रॉसर
सैंपल लेने आ रहे मरीजों के परिजन लैब में कर रहे विवाद
चार बार पहले भी भेज चुके हैं चीफ लैब तकनीशियन नर्सों को रिमाइंडर
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। जोनल अस्पताल मंडी के वार्डों में सैंपल कलेक्शन को लेकर लैब तकनीशियन और नर्सों में विवाद गहरा गया है। चीफ लैब कम टेक्नीशियन ने इसे लेकर मुख्य चिकित्साधिकारी को शिकायत पत्र भेजा है। शिकायत पत्र में आरोप है कि अस्पताल के वार्डों में नमूनों (रक्त/ऊतक/अंग) का संग्रह, लेबलिंग, प्रेषण स्टाफ नर्सों की जिम्मेदारी है, लेकिन वे जिम्मेदारी से भागकर मरीज के अभिभावकों को लैब में भेज रही हैं।
लैब पहुंचकर मरीज के परिवार के लोग लड़ाई-झगड़ा कर रहे हैं। लैब टेक्नीशियन की ओर से स्टाफ नर्सों को वार्डों में सैंपल कलेक्शन के बारे में पहले ही चार रिमाइंडर दिए गए हैं। इसके बावजूद उनके लापरवाह व्यवहार के कारण रोजाना झड़पें हो रही हैं। उनका कहना है कि लैब में दस कर्मचारी हैं जो अलग-अलग कार्य कर रहे हैं। दिन में 150 से 200 के सैंपल और 400 से 500 मरीजों के टेस्ट किए जा रहे हैं।
कई बार रिपोर्ट देने में देरी हो रही है। मरीजों के अभिभावक परेशान होकर सरकारी काम में बाधा डाल रहे हैं। लैब तकनीशियन का कहना है कि सोमवार को लैब में जब रिपोर्ट लिख रहे थे और एनईसी के मेडिकल के लिए दोबारा सैंपल ले रहे थे। तब दोपहर 1:15 बजे परिचारक आए और हमें दैनिक रिपोर्ट लिखने नहीं दी। उन्हें बाहर जाने के लिए कहा लेकिन वे लैब से बाहर नहीं निकले और मुख्य तकनीशियन की कुर्सी पर बैठ गए। कुछ वहां बैठ गए, जहां एचबीएसएजी और सीरोलॉजी सैंपल प्रक्रिया में थे।
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उस समय वहां कोई सुरक्षा गार्ड नहीं था। जब उनसे जाने के लिए कहा गया तो उन्होंने लैब नहीं छोड़ी। दोपहर 2 बजे नमूना लेकर वापस आए तो उन्होंने हमें शिकायत करने की धमकी दी और अपना परिचय एक सैन्यकर्मी और एक वकील के रूप में दिया। उन्होंने सीएमओ से मांग की है कि कार्यालय में लापरवाही के बारे में लगातार चेतावनी देते रहें, क्योंकि इससे संस्थान में अनावश्यक बाधा और एफआईआर भी हो सकती है। उधर, मामले को लेकर कई बार अस्पताल के एमएस धर्मचंद वर्मा से संपर्क किया लेकिन उन्होंने इसे लेकर कोई उचित जवाब देना जरूरी नहीं समझा।
कोट्स
-मामला ध्यान में आया है। एमएस से जानकारी ली गई है। उनके अनुसार मामले के समाधान के लिए कमेटी गठित की जाएगी। इसके बाद इसका समाधान निकाला जाएगा। ड्यूटी रोस्टर की जिम्मेदारी एमएस कार्यालय की है।
-डाॅ. दिपाली, मुख्य चिकित्साधिकारी
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क्रॉसर
सैंपल लेने आ रहे मरीजों के परिजन लैब में कर रहे विवाद
चार बार पहले भी भेज चुके हैं चीफ लैब तकनीशियन नर्सों को रिमाइंडर
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। जोनल अस्पताल मंडी के वार्डों में सैंपल कलेक्शन को लेकर लैब तकनीशियन और नर्सों में विवाद गहरा गया है। चीफ लैब कम टेक्नीशियन ने इसे लेकर मुख्य चिकित्साधिकारी को शिकायत पत्र भेजा है। शिकायत पत्र में आरोप है कि अस्पताल के वार्डों में नमूनों (रक्त/ऊतक/अंग) का संग्रह, लेबलिंग, प्रेषण स्टाफ नर्सों की जिम्मेदारी है, लेकिन वे जिम्मेदारी से भागकर मरीज के अभिभावकों को लैब में भेज रही हैं।
लैब पहुंचकर मरीज के परिवार के लोग लड़ाई-झगड़ा कर रहे हैं। लैब टेक्नीशियन की ओर से स्टाफ नर्सों को वार्डों में सैंपल कलेक्शन के बारे में पहले ही चार रिमाइंडर दिए गए हैं। इसके बावजूद उनके लापरवाह व्यवहार के कारण रोजाना झड़पें हो रही हैं। उनका कहना है कि लैब में दस कर्मचारी हैं जो अलग-अलग कार्य कर रहे हैं। दिन में 150 से 200 के सैंपल और 400 से 500 मरीजों के टेस्ट किए जा रहे हैं।
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कई बार रिपोर्ट देने में देरी हो रही है। मरीजों के अभिभावक परेशान होकर सरकारी काम में बाधा डाल रहे हैं। लैब तकनीशियन का कहना है कि सोमवार को लैब में जब रिपोर्ट लिख रहे थे और एनईसी के मेडिकल के लिए दोबारा सैंपल ले रहे थे। तब दोपहर 1:15 बजे परिचारक आए और हमें दैनिक रिपोर्ट लिखने नहीं दी। उन्हें बाहर जाने के लिए कहा लेकिन वे लैब से बाहर नहीं निकले और मुख्य तकनीशियन की कुर्सी पर बैठ गए। कुछ वहां बैठ गए, जहां एचबीएसएजी और सीरोलॉजी सैंपल प्रक्रिया में थे।
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उस समय वहां कोई सुरक्षा गार्ड नहीं था। जब उनसे जाने के लिए कहा गया तो उन्होंने लैब नहीं छोड़ी। दोपहर 2 बजे नमूना लेकर वापस आए तो उन्होंने हमें शिकायत करने की धमकी दी और अपना परिचय एक सैन्यकर्मी और एक वकील के रूप में दिया। उन्होंने सीएमओ से मांग की है कि कार्यालय में लापरवाही के बारे में लगातार चेतावनी देते रहें, क्योंकि इससे संस्थान में अनावश्यक बाधा और एफआईआर भी हो सकती है। उधर, मामले को लेकर कई बार अस्पताल के एमएस धर्मचंद वर्मा से संपर्क किया लेकिन उन्होंने इसे लेकर कोई उचित जवाब देना जरूरी नहीं समझा।
कोट्स
-मामला ध्यान में आया है। एमएस से जानकारी ली गई है। उनके अनुसार मामले के समाधान के लिए कमेटी गठित की जाएगी। इसके बाद इसका समाधान निकाला जाएगा। ड्यूटी रोस्टर की जिम्मेदारी एमएस कार्यालय की है।
-डाॅ. दिपाली, मुख्य चिकित्साधिकारी