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Mandi News: देव कमरूनाग मेले में उमड़ेगी आस्था, आज और कल होंगे दर्शन
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देव कमरूनाग मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। स्त्रोत- जागरूक पाठक
75 पुलिस जवान संभालेंगे सुरक्षा और यातायात व्यवस्था
श्रद्धालुओं के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहर (मंडी)। जिला मंडी के अधिष्ठाता एवं आराध्य देव कमरूनाग का ऐतिहासिक दो दिवसीय मेला 14 और 15 जून को श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया जाएगा। समंदर तल से करीब 9,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित कमरूनाग झील और मंदिर में हजारों श्रद्धालु देव दर्शन के लिए पहुंचेंगे तथा पवित्र झील में आस्था की डुबकी लगाएंगे। मेला कमेटी और प्रशासन ने आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
तोष के घने जंगलों के बीच स्थित कमरूनाग झील श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। लोग देव कमरूनाग को वर्षा के देवता के रूप में पूजते हैं, जबकि अनेक श्रद्धालु उन्हें भगवान विष्णु का अंशावतार भी मानते हैं। मान्यता है कि मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु झील में सोना, चांदी, आभूषण और नकदी अर्पित करते हैं। इसी कारण इस झील को ‘देव कोष’ के नाम से भी जाना जाता है।
एसडीएम गोहर देवी सिंह ने बताया कि प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से मेले का शांतिपूर्ण एवं सफल आयोजन सुनिश्चित किया जाएगा।
तीन मार्गों से पहुंच सकते हैं श्रद्धालु
कमरूनाग मंदिर तक पहुंचने के लिए रोहांडा से लगभग छह किलोमीटर की पैदल चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। इसके अलावा धंग्यारा तथा कुकड़ीगलू-सरोआ मार्ग से भी श्रद्धालु मंदिर पहुंच सकते हैं। खुंडा-मुंडा तक सड़क सुविधा उपलब्ध होने से यात्रा पहले की अपेक्षा काफी सुगम हो गई है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए सराय की व्यवस्था भी उपलब्ध है।
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मेले के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू
मेले के सफल आयोजन को लेकर पुलिस प्रशासन ने विशेष यातायात योजना लागू की है। डीएसपी मुख्यालय दिनेश कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए चैलचौक-कुकड़ीगलू-फंग्यार-सरोआ तथा चैलचौक-कटलोग-शाला मार्ग से आवाजाही की अनुमति रहेगी। वापसी के लिए खुंडा-मुंडा, झौर और जाच्छ मार्ग निर्धारित किए गए हैं, ताकि यातायात जाम की स्थिति से बचा जा सके। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए 75 पुलिस और होमगार्ड जवान तैनात किए गए हैं, जिनमें आठ महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
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श्रद्धालुओं के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहर (मंडी)। जिला मंडी के अधिष्ठाता एवं आराध्य देव कमरूनाग का ऐतिहासिक दो दिवसीय मेला 14 और 15 जून को श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया जाएगा। समंदर तल से करीब 9,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित कमरूनाग झील और मंदिर में हजारों श्रद्धालु देव दर्शन के लिए पहुंचेंगे तथा पवित्र झील में आस्था की डुबकी लगाएंगे। मेला कमेटी और प्रशासन ने आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
तोष के घने जंगलों के बीच स्थित कमरूनाग झील श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। लोग देव कमरूनाग को वर्षा के देवता के रूप में पूजते हैं, जबकि अनेक श्रद्धालु उन्हें भगवान विष्णु का अंशावतार भी मानते हैं। मान्यता है कि मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु झील में सोना, चांदी, आभूषण और नकदी अर्पित करते हैं। इसी कारण इस झील को ‘देव कोष’ के नाम से भी जाना जाता है।
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एसडीएम गोहर देवी सिंह ने बताया कि प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से मेले का शांतिपूर्ण एवं सफल आयोजन सुनिश्चित किया जाएगा।
तीन मार्गों से पहुंच सकते हैं श्रद्धालु
कमरूनाग मंदिर तक पहुंचने के लिए रोहांडा से लगभग छह किलोमीटर की पैदल चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। इसके अलावा धंग्यारा तथा कुकड़ीगलू-सरोआ मार्ग से भी श्रद्धालु मंदिर पहुंच सकते हैं। खुंडा-मुंडा तक सड़क सुविधा उपलब्ध होने से यात्रा पहले की अपेक्षा काफी सुगम हो गई है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए सराय की व्यवस्था भी उपलब्ध है।
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मेले के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू
मेले के सफल आयोजन को लेकर पुलिस प्रशासन ने विशेष यातायात योजना लागू की है। डीएसपी मुख्यालय दिनेश कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए चैलचौक-कुकड़ीगलू-फंग्यार-सरोआ तथा चैलचौक-कटलोग-शाला मार्ग से आवाजाही की अनुमति रहेगी। वापसी के लिए खुंडा-मुंडा, झौर और जाच्छ मार्ग निर्धारित किए गए हैं, ताकि यातायात जाम की स्थिति से बचा जा सके। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए 75 पुलिस और होमगार्ड जवान तैनात किए गए हैं, जिनमें आठ महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।