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Mandi News: मातम में बदल गया बेटी का जन्मदिन, जिंदगीभर रहेगा पिता के जाने का गम
Wed, 02 Oct 2024 05:57 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Wed, 02 Oct 2024 05:57 AM IST
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भाटलुधार के पास नाले में कार गिरने से हुई अमर सिंह की मौत, बेटी के लिए साथ ला रहे थे केक
संवाद न्यूज एजेंसी
बालीचौकी (मंडी)। उपमंडल बालीचौकी की थाची चलौट सड़क पर भाटलुधार के पास सड़क नाले में गिरने से अमर सिंह की दर्दनाक मौत ने परिजनों को झकझोर कर रख दिया है। बेटी के जन्मदिन के लिए केक साथ ला रहे और जश्न की तैयारी में बैठे परिजनों का अब रो रोकर बुरा हाल है। बेटी का जन्मदिन अब मातम में बदल गया है। जिंदगीभर बेटी के जन्मदिन को पिता के जाने का गम रहेगा।
मृतक अमर सिंह के पिता पहले ही मौत हो चुकी है, जबकि बुजुर्ग मां और पत्नी इस हादसे के बाद बेसुध हैं। मृतक की बेटी बार बार अपने पिता को घर आने की बात कह रही है। बेटियां पिता के उनसे नाराज होने की बात कह रही हैं। इसलिए जन्मदिन पर नहीं आने की बात कहते हुए फोन पर उनसे बात करने की जिद पर अड़ी हुई हैं। परिजन मासूम बेटियों के इन प्रश्नों का जवाब नहीं दे पा रहे हैं। मंगलवार दोपहर बाद 35 वर्षीय अमर सिंह का शव पैतृक घर सोमगाड़ के जयरा गांव पहुंचाया गया तो चीख पुकार मच गई।
बता दें कि मृतक अमर सिंह काष्ठ कला में निपुण था। शिमला, रामपुर, कुल्लू, मनाली, सिरमौर सहित पूरे हिमाचल में काष्ठ कला के लिए उनकी मांग थी। उनके पिता भी काष्ठ कला के कारीगर थे, लेकिन छोटी से उम्र में ही उनके पिता का देहांत हो गया था। अपने पिता से विरासत में मिली कला को अमर सिंह ने आगे बढ़ाया था।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बालीचौकी (मंडी)। उपमंडल बालीचौकी की थाची चलौट सड़क पर भाटलुधार के पास सड़क नाले में गिरने से अमर सिंह की दर्दनाक मौत ने परिजनों को झकझोर कर रख दिया है। बेटी के जन्मदिन के लिए केक साथ ला रहे और जश्न की तैयारी में बैठे परिजनों का अब रो रोकर बुरा हाल है। बेटी का जन्मदिन अब मातम में बदल गया है। जिंदगीभर बेटी के जन्मदिन को पिता के जाने का गम रहेगा।
मृतक अमर सिंह के पिता पहले ही मौत हो चुकी है, जबकि बुजुर्ग मां और पत्नी इस हादसे के बाद बेसुध हैं। मृतक की बेटी बार बार अपने पिता को घर आने की बात कह रही है। बेटियां पिता के उनसे नाराज होने की बात कह रही हैं। इसलिए जन्मदिन पर नहीं आने की बात कहते हुए फोन पर उनसे बात करने की जिद पर अड़ी हुई हैं। परिजन मासूम बेटियों के इन प्रश्नों का जवाब नहीं दे पा रहे हैं। मंगलवार दोपहर बाद 35 वर्षीय अमर सिंह का शव पैतृक घर सोमगाड़ के जयरा गांव पहुंचाया गया तो चीख पुकार मच गई।
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बता दें कि मृतक अमर सिंह काष्ठ कला में निपुण था। शिमला, रामपुर, कुल्लू, मनाली, सिरमौर सहित पूरे हिमाचल में काष्ठ कला के लिए उनकी मांग थी। उनके पिता भी काष्ठ कला के कारीगर थे, लेकिन छोटी से उम्र में ही उनके पिता का देहांत हो गया था। अपने पिता से विरासत में मिली कला को अमर सिंह ने आगे बढ़ाया था।
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