{"_id":"69317741994cd244bf0afc8d","slug":"complaint-filed-prematurely-in-cheque-bounce-case-dismissed-mandi-news-c-90-1-ssml1045-178227-2025-12-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: चेक बाउंस मामले में समय से पहले दायर शिकायत खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: चेक बाउंस मामले में समय से पहले दायर शिकायत खारिज
Fri, 05 Dec 2025 05:27 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Fri, 05 Dec 2025 05:27 AM IST
विज्ञापन
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मंडी की अदालत ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मंडी की अदालत ने हिंदूजा लेलैंड फाइनेंस लिमिटेड की ओर से दायर चेक बाउंस की शिकायत को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामला कानूनी रूप से समय से पहले दायर किया गया था। अदालत ने कहा कि शिकायत दाखिल करने से पहले आवश्यक वैधानिक अवधि पूरी नहीं हुई थी।
मामले के तथ्यों के अनुसार प्रदीप कुमार निवासी जिला शिमला ने वाहन लोन के 3 लाख रुपये की देनदारी के बदले कंपनी को 25 मार्च 2022 को 2,36,000 रुपये का चेक दिया था। यह चेक यूको बैंक की शाखा कुफरी पर जारी हुआ था। चेक 8 अप्रैल 2022 को बैंक की ओर से अपर्याप्त धनराशि के आधार पर लौटाया गया। इसके बाद कंपनी ने 20 अप्रैल 2022 को कानूनी नोटिस जारी कर 21 अप्रैल 2022 को रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजा।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता कंपनी यह साबित नहीं कर पाई कि नोटिस आरोपी को कब मिला। जब नोटिस की वास्तविक तारीख उपलब्ध न हो तो कानून के मुताबिक उसकी डिलीवरी 30 दिन बाद मानी जाती है। इस हिसाब से नोटिस की संभावित डिलीवरी 20 मई 2022 मानी जाएगी।
विज्ञापन
अदालत ने माना कि आरोपी को भुगतान करने के लिए 15 दिन का समय मिलना चाहिए था, जो 4 जून 2022 को पूरा होता, लेकिन कंपनी ने शिकायत 10 मई 2022 को ही दायर कर दी, यानी नोटिस की मानी गई डिलीवरी से 10 दिन पहले ही। इसलिए शिकायत को अदालत ने कानूनी रूप से अधूरी और समयपूर्व बताते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि शिकायत वैधानिक शर्तें पूरी न होने के कारण कानून की नजर में शिकायत कहलाने योग्य ही नहीं है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मंडी की अदालत ने हिंदूजा लेलैंड फाइनेंस लिमिटेड की ओर से दायर चेक बाउंस की शिकायत को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामला कानूनी रूप से समय से पहले दायर किया गया था। अदालत ने कहा कि शिकायत दाखिल करने से पहले आवश्यक वैधानिक अवधि पूरी नहीं हुई थी।
मामले के तथ्यों के अनुसार प्रदीप कुमार निवासी जिला शिमला ने वाहन लोन के 3 लाख रुपये की देनदारी के बदले कंपनी को 25 मार्च 2022 को 2,36,000 रुपये का चेक दिया था। यह चेक यूको बैंक की शाखा कुफरी पर जारी हुआ था। चेक 8 अप्रैल 2022 को बैंक की ओर से अपर्याप्त धनराशि के आधार पर लौटाया गया। इसके बाद कंपनी ने 20 अप्रैल 2022 को कानूनी नोटिस जारी कर 21 अप्रैल 2022 को रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजा।
विज्ञापन
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता कंपनी यह साबित नहीं कर पाई कि नोटिस आरोपी को कब मिला। जब नोटिस की वास्तविक तारीख उपलब्ध न हो तो कानून के मुताबिक उसकी डिलीवरी 30 दिन बाद मानी जाती है। इस हिसाब से नोटिस की संभावित डिलीवरी 20 मई 2022 मानी जाएगी।
विज्ञापन
अदालत ने माना कि आरोपी को भुगतान करने के लिए 15 दिन का समय मिलना चाहिए था, जो 4 जून 2022 को पूरा होता, लेकिन कंपनी ने शिकायत 10 मई 2022 को ही दायर कर दी, यानी नोटिस की मानी गई डिलीवरी से 10 दिन पहले ही। इसलिए शिकायत को अदालत ने कानूनी रूप से अधूरी और समयपूर्व बताते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि शिकायत वैधानिक शर्तें पूरी न होने के कारण कानून की नजर में शिकायत कहलाने योग्य ही नहीं है।