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Mandi News: सड़क हादसे में घायल युवक की दावा याचिका खारिज
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मंडी। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी)-2 मंडी ने सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक की 95 लाख रुपये की मुआवजा दावा याचिका खारिज कर दी। अधिकरण ने माना कि हादसा चालक की अपनी लापरवाही से हुआ था। ऐसे में बीमा कंपनी पर मुआवजा देने की जिम्मेदारी नहीं बनती।
एमएसीटी-2 मंडी ने यह फैसला खीलेश्वर निवासी गांव सारण, तहसील औट जिला मंडी की याचिका पर सुनाया। याचिका के अनुसार 13 जून 2017 को खीलेश्वर अपने मित्र वीरेंद्र के साथ मोटरसाइकिल पर पराशर झील जा रहा था। सुहरा के पास ग्राम पंचायत सेगली द्वारा लगाए गए अस्थायी बैरियर से बाइक टकरा गई। हादसे में उसकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आईं और वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो गया।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि सड़क पर धूल और भारी ट्रैफिक के कारण उसे बैरियर दिखाई नहीं दिया। उसने उपचार पर 20 लाख रुपये से अधिक खर्च होने और भविष्य में भी इलाज की जरूरत बताई। साथ ही खुद को मोटर मेकेनिक बताते हुए रोजगार प्रभावित होने की बात कही।
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मामले में वाहन मालिक और बीमा कंपनी को पक्षकार बनाया गया था। बीमा कंपनी ने अदालत में दलील दी कि हादसे के समय वाहन स्वयं याचिकाकर्ता चला रहा था और उसके खिलाफ थाना पधर में प्राथमिकी भी दर्ज हुई थी। इसलिए वह तीसरे पक्ष की श्रेणी में नहीं आता।
अधिकरण ने अपने फैसले में कहा कि दुर्घटना याचिकाकर्ता की खुद की लापरवाही से हुई। अदालत ने माना कि खीलेश्वर अपने चाचा हेमराज से बाइक लेकर चला रहा था। ऐसे में वह कानूनन वाहन मालिक के स्थान पर माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के फैसलों का हवाला देते हुए अधिकरण ने कहा कि ऐसे मामलों में चालक बीमा कंपनी से मुआवजा नहीं मांग सकता।
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एमएसीटी-2 मंडी ने यह फैसला खीलेश्वर निवासी गांव सारण, तहसील औट जिला मंडी की याचिका पर सुनाया। याचिका के अनुसार 13 जून 2017 को खीलेश्वर अपने मित्र वीरेंद्र के साथ मोटरसाइकिल पर पराशर झील जा रहा था। सुहरा के पास ग्राम पंचायत सेगली द्वारा लगाए गए अस्थायी बैरियर से बाइक टकरा गई। हादसे में उसकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आईं और वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो गया।
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याचिकाकर्ता ने दावा किया कि सड़क पर धूल और भारी ट्रैफिक के कारण उसे बैरियर दिखाई नहीं दिया। उसने उपचार पर 20 लाख रुपये से अधिक खर्च होने और भविष्य में भी इलाज की जरूरत बताई। साथ ही खुद को मोटर मेकेनिक बताते हुए रोजगार प्रभावित होने की बात कही।
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मामले में वाहन मालिक और बीमा कंपनी को पक्षकार बनाया गया था। बीमा कंपनी ने अदालत में दलील दी कि हादसे के समय वाहन स्वयं याचिकाकर्ता चला रहा था और उसके खिलाफ थाना पधर में प्राथमिकी भी दर्ज हुई थी। इसलिए वह तीसरे पक्ष की श्रेणी में नहीं आता।
अधिकरण ने अपने फैसले में कहा कि दुर्घटना याचिकाकर्ता की खुद की लापरवाही से हुई। अदालत ने माना कि खीलेश्वर अपने चाचा हेमराज से बाइक लेकर चला रहा था। ऐसे में वह कानूनन वाहन मालिक के स्थान पर माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के फैसलों का हवाला देते हुए अधिकरण ने कहा कि ऐसे मामलों में चालक बीमा कंपनी से मुआवजा नहीं मांग सकता।