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कमीशन, बैचवाइज आधार पर भर्ती कर्मियों से भेदभाव कर रही सरकार
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मंडी। कमीशन और बैचवाइज से भर्ती हुए प्रदेश के 60 हजार कर्मचारियों से सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। प्रदेश अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन ने यह आरोप लगाया है। संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि जब प्रदेश सरकार एक वर्ग विशेष के शिक्षकों की पैरवी सुप्रीम कोर्ट तक कर सकती है तो फिर संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नियुक्त कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
संगठन के प्रदेशाध्यक्ष मनीष गर्ग एवं महासचिव अनिल सेन ने कहा है कि वर्तमान सरकार शिक्षा विभाग में कार्यरत पैरा शिक्षकों को नोशनल आधार पर 2015 से नियमित और वरिष्ठता का लाभ दे सकती है तो प्रदेश के सभी विभागों में संवैधानिक प्रक्रिया के अंतर्गत कमीशन और बैचवाइज आधार पर भर्ती अनुबंध एवं अनुबंध से नियमित कर्मचारियों को बैक डेट से वरिष्ठता लाभ कयों नहीं दे सकती। कहा कि प्रदेश सरकार बताए, 60 हजार अनुबंध और अनुबंध से नियमित कर्मचारी भी तो नोशनल आधार पर वरिष्ठता की मांग कर रहे हैं फिर उनके साथ ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों। संगठन के पदाधिकारी पिछले 7 महीनों में 60 से अधिक ज्ञापन सीएम को भेज चुके हैं। विभिन्न मंचों के माध्यम से प्रदेश सरकार और सीएम के समक्ष मांगें रखी गईं लेकिन सरकार पर कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सीएम 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा के मिशन रिपीट होने का दावा करते हैं, परंतु कर्मचारियों की जायज मांगों को अगर इस तरह अनदेखा किया गया तो सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब तक संगठन की मांगें पूरी नहीं हो जातीं तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
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संगठन के प्रदेशाध्यक्ष मनीष गर्ग एवं महासचिव अनिल सेन ने कहा है कि वर्तमान सरकार शिक्षा विभाग में कार्यरत पैरा शिक्षकों को नोशनल आधार पर 2015 से नियमित और वरिष्ठता का लाभ दे सकती है तो प्रदेश के सभी विभागों में संवैधानिक प्रक्रिया के अंतर्गत कमीशन और बैचवाइज आधार पर भर्ती अनुबंध एवं अनुबंध से नियमित कर्मचारियों को बैक डेट से वरिष्ठता लाभ कयों नहीं दे सकती। कहा कि प्रदेश सरकार बताए, 60 हजार अनुबंध और अनुबंध से नियमित कर्मचारी भी तो नोशनल आधार पर वरिष्ठता की मांग कर रहे हैं फिर उनके साथ ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों। संगठन के पदाधिकारी पिछले 7 महीनों में 60 से अधिक ज्ञापन सीएम को भेज चुके हैं। विभिन्न मंचों के माध्यम से प्रदेश सरकार और सीएम के समक्ष मांगें रखी गईं लेकिन सरकार पर कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सीएम 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा के मिशन रिपीट होने का दावा करते हैं, परंतु कर्मचारियों की जायज मांगों को अगर इस तरह अनदेखा किया गया तो सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब तक संगठन की मांगें पूरी नहीं हो जातीं तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
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