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Mandi News: संकरी सड़कों में फंस जाती है गाड़ी, ऊंचाई वाले क्षेत्र में आग लगे तो निपटना मुश्किल
Wed, 23 Oct 2024 05:35 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Wed, 23 Oct 2024 05:35 PM IST
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जोगिंद्रनगर दमकल विभाग लड़भडोल से लेकर नेरी लांगणा तक 14 कर्मियों के सहारे दे रहा सेवाएं
अभियान-6
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से जोगिंद्रनगर में दमकल विभाग के लिए आग की घटनाओं से निपटना चुनौतीपूर्ण है। गांवों को जाने वाली सड़कें तंग होने से बड़ी फायर गाड़ी फंस जाती है, जबकि छोटी गाड़ी में 300 लीटर पानी होता है, यह आग बुझाने के लिए पर्याप्त नहीं है। जोगिंद्रनगर दमकल विभाग के पास मौजूदा समय में लड़भड़ोल, चौंतड़ा से लेकर 58 पंचायतों का जिम्मा है। 14 कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन फायरमैन जैसा एक अहम पद अभी भी खाली है।
कई गांवों में संपर्क मार्ग तंग होने पर बड़ी गाड़ी को घटनास्थल तक पहुंचाने में विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। क्षेत्र में सड़क से ऊंचाई पर पहाड़ी में घर हैं तो विभाग के पास पास 150 फुट तक ही पंप के जरिये पानी को खींचने की क्षमता है, जबकि उतराई में आधा किलोमीटर तक पाइप के सहारे आग को बुझाया जा सकता है। बड़ी चुनौती उपमंडल के दूरदराज इलाकों में सेवाओं का निर्वहन करने की है।
लड़भड़ोल और नेरी लांगणा क्षेत्र की पंचायतों में आग लगने की सूचना पर दमकम विभाग को एक घंटा मौके पर पहुंचने में लगता है। इतने समय में दमकल विभाग के आने से पहले आग तांडव मचा चुकी होती है। इसके अलावा जोगिंद्रनगर शहर के निकटवर्ती गांव आरठी के संपर्क मार्ग, ढ़ेलू पंचायत के संपर्क मार्ग, यौरा और आरठी, टिकरू सहित अन्य संपर्क मार्गों में दमकल विभाग को बड़ी गाड़ी ले जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हालांकि छोटी गाड़ी है, लेकिन उसमें पानी की क्षमता 300 लीटर ही है।
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असुरक्षित भवन में कार्यालय, तिरपाल से ढककर चला रहे काम
जोगिंद्रनगर में 2012 में दमकल विभाग की चौकी खोली गई थी, लेकिन 12 साल बाद भी विभाग को अपना कार्यालय नहीं मिल पाया है। वर्तमान में असुरक्षित भवन में कार्यालय चल रहा है। हालात ये हैं कि कार्यालय की छत्तों पर तिरपाल डालकर काम चलाया जा रहा है। हालांकि दमकल विभाग को कार्यालय के लिए जमीन तो उपलब्ध हो गई है, लेकिन जमीन के लिए रास्ता उपलब्ध नहीं हो पाया है। ऐसे में विभाग को अपनी गाड़ियां सड़क पर खड़ी करनी पड़ रही हैं। स्थानीय लोग कई बार यहां सब स्टेशन खोलने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक नेताओं से आश्वासनों के सिवा कुछ नहीं मिल पाया है। लडभड़ोल क्षेत्र में भी दमकल कार्यालय मंजूर हुआ था लेकिन वह कागजों में ही सिमट कर रह गया है।
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दीपावली पर सतर्क रहने की अपील
ग्रामीण परिवेश वाले जोगिंद्रनगर में बड़ी संख्या में इन दिनों लोग घास काटकर सुखा रहे हैं। ऐसे में दीपावली के दौरान सतर्क रहने की जरूरत है। एक चिंगारी भी आग की घटना को अंजाम दे सकती है। दमकल विभाग जोगिंद्रनगर के प्रभारी कर्म सिंह ने बताया कि शहरी क्षेत्र में आग बुझाने में ज्यादा समस्या नहीं आती, लेकिन ग्रामीण इलाकों में आग बुझाना बेहद चुनौतीपूर्ण है। गाड़ी और स्टाफ को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है। उपमंडल में आग की घटनाओं से निपटने के लिए त्योहारी सीजन में सभी कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।
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अभियान-6
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से जोगिंद्रनगर में दमकल विभाग के लिए आग की घटनाओं से निपटना चुनौतीपूर्ण है। गांवों को जाने वाली सड़कें तंग होने से बड़ी फायर गाड़ी फंस जाती है, जबकि छोटी गाड़ी में 300 लीटर पानी होता है, यह आग बुझाने के लिए पर्याप्त नहीं है। जोगिंद्रनगर दमकल विभाग के पास मौजूदा समय में लड़भड़ोल, चौंतड़ा से लेकर 58 पंचायतों का जिम्मा है। 14 कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन फायरमैन जैसा एक अहम पद अभी भी खाली है।
कई गांवों में संपर्क मार्ग तंग होने पर बड़ी गाड़ी को घटनास्थल तक पहुंचाने में विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। क्षेत्र में सड़क से ऊंचाई पर पहाड़ी में घर हैं तो विभाग के पास पास 150 फुट तक ही पंप के जरिये पानी को खींचने की क्षमता है, जबकि उतराई में आधा किलोमीटर तक पाइप के सहारे आग को बुझाया जा सकता है। बड़ी चुनौती उपमंडल के दूरदराज इलाकों में सेवाओं का निर्वहन करने की है।
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लड़भड़ोल और नेरी लांगणा क्षेत्र की पंचायतों में आग लगने की सूचना पर दमकम विभाग को एक घंटा मौके पर पहुंचने में लगता है। इतने समय में दमकल विभाग के आने से पहले आग तांडव मचा चुकी होती है। इसके अलावा जोगिंद्रनगर शहर के निकटवर्ती गांव आरठी के संपर्क मार्ग, ढ़ेलू पंचायत के संपर्क मार्ग, यौरा और आरठी, टिकरू सहित अन्य संपर्क मार्गों में दमकल विभाग को बड़ी गाड़ी ले जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हालांकि छोटी गाड़ी है, लेकिन उसमें पानी की क्षमता 300 लीटर ही है।
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असुरक्षित भवन में कार्यालय, तिरपाल से ढककर चला रहे काम
जोगिंद्रनगर में 2012 में दमकल विभाग की चौकी खोली गई थी, लेकिन 12 साल बाद भी विभाग को अपना कार्यालय नहीं मिल पाया है। वर्तमान में असुरक्षित भवन में कार्यालय चल रहा है। हालात ये हैं कि कार्यालय की छत्तों पर तिरपाल डालकर काम चलाया जा रहा है। हालांकि दमकल विभाग को कार्यालय के लिए जमीन तो उपलब्ध हो गई है, लेकिन जमीन के लिए रास्ता उपलब्ध नहीं हो पाया है। ऐसे में विभाग को अपनी गाड़ियां सड़क पर खड़ी करनी पड़ रही हैं। स्थानीय लोग कई बार यहां सब स्टेशन खोलने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक नेताओं से आश्वासनों के सिवा कुछ नहीं मिल पाया है। लडभड़ोल क्षेत्र में भी दमकल कार्यालय मंजूर हुआ था लेकिन वह कागजों में ही सिमट कर रह गया है।
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दीपावली पर सतर्क रहने की अपील
ग्रामीण परिवेश वाले जोगिंद्रनगर में बड़ी संख्या में इन दिनों लोग घास काटकर सुखा रहे हैं। ऐसे में दीपावली के दौरान सतर्क रहने की जरूरत है। एक चिंगारी भी आग की घटना को अंजाम दे सकती है। दमकल विभाग जोगिंद्रनगर के प्रभारी कर्म सिंह ने बताया कि शहरी क्षेत्र में आग बुझाने में ज्यादा समस्या नहीं आती, लेकिन ग्रामीण इलाकों में आग बुझाना बेहद चुनौतीपूर्ण है। गाड़ी और स्टाफ को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है। उपमंडल में आग की घटनाओं से निपटने के लिए त्योहारी सीजन में सभी कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।