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प्राकृतिक खेती करने से 90 फीसदी तक घट गई लागत
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मैहरन पंचायत में आयोजित शिविर में भाग लेते किसान।
- फोटो : Mandi
करसोग (मंडी)। उपमंडल करसोग में किसान अब रासायनिक खेती को छोड़कर प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। तीन सालों में उपमंडल के विभिन्न क्षेत्रों में 2718 किसानों ने रासायनिक खेती छोड़ दी है। वे प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
रासायनिक खेती की तुलना में किसानों की कृषि पैदावार लेने पर आने वाली लागत 80 से 90 फीसदी तक घट गई है। प्राकृतिक खेती से उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ने के साथ-साथ मूल्य भी अच्छा मिल रहा है। इससे किसानों की आर्थिक सेहत भी सुधरी है।
कृषि विभाग विकासखंड करसोग के सहायक तकनीकी प्रबंधक लेखराज ने सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती पर मैहरन पंचायत में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया। इसमें भी किसानों को रासायनिक खेती को छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाने पर प्रेरित किया। कहा कि करसोग में पिछले तीन सालों में हजारों किसान सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती की तकनीक अपना रहे हैं। उपमंडल में अब 166 हेक्टेयर भूमि में प्राकृतिक खेती की जा रही है। आने वाले समय में और भी किसान रासायनिक खेती को छोड़ सकते हैं। सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती के मास्टर ट्रेनर कैप्टन नेतराम शर्मा ने भी किसानों को प्राकृतिक खेती के फायदों के बारे में जानकारी दी।
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इस दौरान किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, अग्नि अस्त्र आदि तैयार करने की विधि भी बताई गई। कृषि विभाग हर पंच
ायत में वार्ड स्तर पर शिविर आयोजित कर किसानों को सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती की जानकारी दे रहा है।
कृषि विभाग विकासखंड करसोग के सहायक तकनीकी प्रबंधक लेखराज ने बताया कि सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती की जानकारी देने के लिए मैहरन पंचायत में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर लगाया गया। लोगों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि तीन सालों में 2718 किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं।
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रासायनिक खेती की तुलना में किसानों की कृषि पैदावार लेने पर आने वाली लागत 80 से 90 फीसदी तक घट गई है। प्राकृतिक खेती से उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ने के साथ-साथ मूल्य भी अच्छा मिल रहा है। इससे किसानों की आर्थिक सेहत भी सुधरी है।
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कृषि विभाग विकासखंड करसोग के सहायक तकनीकी प्रबंधक लेखराज ने सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती पर मैहरन पंचायत में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया। इसमें भी किसानों को रासायनिक खेती को छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाने पर प्रेरित किया। कहा कि करसोग में पिछले तीन सालों में हजारों किसान सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती की तकनीक अपना रहे हैं। उपमंडल में अब 166 हेक्टेयर भूमि में प्राकृतिक खेती की जा रही है। आने वाले समय में और भी किसान रासायनिक खेती को छोड़ सकते हैं। सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती के मास्टर ट्रेनर कैप्टन नेतराम शर्मा ने भी किसानों को प्राकृतिक खेती के फायदों के बारे में जानकारी दी।
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इस दौरान किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, अग्नि अस्त्र आदि तैयार करने की विधि भी बताई गई। कृषि विभाग हर पंच
ायत में वार्ड स्तर पर शिविर आयोजित कर किसानों को सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती की जानकारी दे रहा है।
कृषि विभाग विकासखंड करसोग के सहायक तकनीकी प्रबंधक लेखराज ने बताया कि सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती की जानकारी देने के लिए मैहरन पंचायत में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर लगाया गया। लोगों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि तीन सालों में 2718 किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं।
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