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Mandi News: जिला परिषद वार्ड कोट में भाजपा की प्रचंड जीत
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बग्गी (मंडी)। जिला परिषद चुनाव के कोट वार्ड में भाजपा समर्थित प्रत्याशी प्रेम सिंह राणा उर्फ पाल ने कांग्रेस उम्मीदवार पंकज चौधरी उर्फ पिंकू को 2116 मतों के भारी अंतर से पराजित कर दिया।
प्रेम राणा को 6827 मत प्राप्त हुए, जबकि कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी पंकज चौधरी 4711 मतों पर सिमट गए। कोट वार्ड में भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसके अपने ही बागी थे।
पार्टी की ओर से प्रेम सिंह राणा को समर्थित उम्मीदवार घोषित किए जाने से नाराज भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष रविंद्र राणा, युवा नेता राकेश ठाकुर और रमेश गुमरा चुनाव मैदान में उतर गए थे।
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प्रेम सिंह राणा की व्यक्तिगत लोकप्रियता, लंबे समय से जनता के बीच सक्रियता और संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं की एकजुटता के चलते बागी उम्मीदवार चुनाव में प्रभाव नहीं छोड़ पाए और सीमित मतों तक ही सिमट गए। जहां भाजपा के बागी प्रभावी नहीं हो पाए, वहीं कांग्रेस के लिए उसके ही बागी सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुए। वार्ड के अनारक्षित होने के बाद कांग्रेस के भीतर सामान्य वर्ग से उम्मीदवार बनाए जाने की मांग उठी थी, लेकिन पार्टी ने अनुसूचित वर्ग से संबंधित पंकज चौधरी को समर्थित प्रत्याशी घोषित कर दिया।
इसके बाद नाराज होकर जंग बहादुर राठौर और मुमताज मांडा चुनावी मैदान में उतर गए। इससे कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक बिखर गया और कार्यकर्ताओं में भी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
कांग्रेस की हार का सबसे बड़ा कारण संगठनात्मक एकजुटता की कमी और टिकट चयन को लेकर उपजा असंतोष रहा। भाजपा के भीतर विरोध के बावजूद विधायक विनोद कुमार प्रेम सिंह राणा की उम्मीदवारी पर अडिग रहे। संवाद
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प्रेम राणा को 6827 मत प्राप्त हुए, जबकि कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी पंकज चौधरी 4711 मतों पर सिमट गए। कोट वार्ड में भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसके अपने ही बागी थे।
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पार्टी की ओर से प्रेम सिंह राणा को समर्थित उम्मीदवार घोषित किए जाने से नाराज भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष रविंद्र राणा, युवा नेता राकेश ठाकुर और रमेश गुमरा चुनाव मैदान में उतर गए थे।
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प्रेम सिंह राणा की व्यक्तिगत लोकप्रियता, लंबे समय से जनता के बीच सक्रियता और संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं की एकजुटता के चलते बागी उम्मीदवार चुनाव में प्रभाव नहीं छोड़ पाए और सीमित मतों तक ही सिमट गए। जहां भाजपा के बागी प्रभावी नहीं हो पाए, वहीं कांग्रेस के लिए उसके ही बागी सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुए। वार्ड के अनारक्षित होने के बाद कांग्रेस के भीतर सामान्य वर्ग से उम्मीदवार बनाए जाने की मांग उठी थी, लेकिन पार्टी ने अनुसूचित वर्ग से संबंधित पंकज चौधरी को समर्थित प्रत्याशी घोषित कर दिया।
इसके बाद नाराज होकर जंग बहादुर राठौर और मुमताज मांडा चुनावी मैदान में उतर गए। इससे कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक बिखर गया और कार्यकर्ताओं में भी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
कांग्रेस की हार का सबसे बड़ा कारण संगठनात्मक एकजुटता की कमी और टिकट चयन को लेकर उपजा असंतोष रहा। भाजपा के भीतर विरोध के बावजूद विधायक विनोद कुमार प्रेम सिंह राणा की उम्मीदवारी पर अडिग रहे। संवाद