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Mandi News: सावधान...मोबाइल बना रहा मनोरोगी, मंडी अस्पताल में दोगुना हो गए मरीज
Thu, 05 Sep 2024 06:00 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 05 Sep 2024 06:00 AM IST
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मंडी। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव बढ़ी समस्या बन चुकी है। मोबाइल और लैपटॉप का अत्याधिक उपयोग, खेलकूद से दूरी, काम की चिंता के कारण मनोरोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाल के आंकड़ों के अनुसार क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में मनोरोगियों की संख्या दोगुनी हो गई है।
क्षेत्रीय मंडी अस्पताल मंडी की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अनीता कहती हैं कि तनाव से पीड़ित मरीजों को निजी और सामाजिक जीवन में तालमेल बैठाने में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जो उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। मरीज निजी और सामाजिक कार्यों में भी तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी ओपीडी में मनोरोगियों की संख्या बढ़ रही है। पहले औसतन 15 रोगी आते थे। अब 30 से अधिक की ओपीडी हो जाती है। कई मरीज सामने आने से कतराते हैं। जांच नहीं करवाने के कारण हमेशा मनोरोग से पीड़ित रहते हैं। जांच न करवाने का कारण समाज का उनके प्रति क्या दृष्टिकोण रहेगा, यह प्रमुख रहता है। अधिकतर युवा, उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाएं देने वाले परीक्षार्थी, रोजगार नहीं होने और नौकरी अथवा बिजनेस में अधिक काम का बोझ होने पर लोग मनोरोग का शिकार हो रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि मनोरोग को उपचार संभव है। ओपीडी में रोजाना 30 से अधिक मनोरोगी आते हैं। उनकी काउंसलिंग की जाती है और अधिक परेशानी होने पर उच्च संस्थानों में भी भेजा जाता है। 15 या 30 दिनों की दवाइयां देने के बाद उनको दोबारा रूटीन चेकअप को बुलाया जाता है।
मनोरोग के लक्षण
असामान्य या अतार्किक विचार
अकारण क्रोध या चिड़चिड़ापन कमजोर एकाग्रता और याददाश्त
बातचीत को समझने में कठिनाई
नींद या भूख में कमी या वृद्धि
आत्महत्या के विचार या जीवन जीने लायक न लगने की भावना
तनाव को नियंत्रण में रखने के उपाय
मनोवैज्ञानिक चिकित्सा : थेरेपी और मनोविश्लेषणात्मक चिकित्सा तनाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
व्यायाम : नियमित व्यायाम चिंता और अवसाद को कम करने में मदद करता है।
संतुलित आहार : संतुलित और पौष्टिक आहार मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
सामाजिक समर्थन : अच्छा सामाजिक समर्थन नेटवर्क बनाए रखना भी तनाव को कम करने में सहायक होता है।
अवैध दवाओं और शराब से बचाव : इनसे बचना आवश्यक है क्योंकि ये तनाव और मानसिक समस्याओं को बढ़ा सकते हैं।
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क्षेत्रीय मंडी अस्पताल मंडी की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अनीता कहती हैं कि तनाव से पीड़ित मरीजों को निजी और सामाजिक जीवन में तालमेल बैठाने में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जो उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। मरीज निजी और सामाजिक कार्यों में भी तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि उनकी ओपीडी में मनोरोगियों की संख्या बढ़ रही है। पहले औसतन 15 रोगी आते थे। अब 30 से अधिक की ओपीडी हो जाती है। कई मरीज सामने आने से कतराते हैं। जांच नहीं करवाने के कारण हमेशा मनोरोग से पीड़ित रहते हैं। जांच न करवाने का कारण समाज का उनके प्रति क्या दृष्टिकोण रहेगा, यह प्रमुख रहता है। अधिकतर युवा, उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाएं देने वाले परीक्षार्थी, रोजगार नहीं होने और नौकरी अथवा बिजनेस में अधिक काम का बोझ होने पर लोग मनोरोग का शिकार हो रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि मनोरोग को उपचार संभव है। ओपीडी में रोजाना 30 से अधिक मनोरोगी आते हैं। उनकी काउंसलिंग की जाती है और अधिक परेशानी होने पर उच्च संस्थानों में भी भेजा जाता है। 15 या 30 दिनों की दवाइयां देने के बाद उनको दोबारा रूटीन चेकअप को बुलाया जाता है।
मनोरोग के लक्षण
असामान्य या अतार्किक विचार
अकारण क्रोध या चिड़चिड़ापन कमजोर एकाग्रता और याददाश्त
बातचीत को समझने में कठिनाई
नींद या भूख में कमी या वृद्धि
आत्महत्या के विचार या जीवन जीने लायक न लगने की भावना
तनाव को नियंत्रण में रखने के उपाय
मनोवैज्ञानिक चिकित्सा : थेरेपी और मनोविश्लेषणात्मक चिकित्सा तनाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
व्यायाम : नियमित व्यायाम चिंता और अवसाद को कम करने में मदद करता है।
संतुलित आहार : संतुलित और पौष्टिक आहार मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
सामाजिक समर्थन : अच्छा सामाजिक समर्थन नेटवर्क बनाए रखना भी तनाव को कम करने में सहायक होता है।
अवैध दवाओं और शराब से बचाव : इनसे बचना आवश्यक है क्योंकि ये तनाव और मानसिक समस्याओं को बढ़ा सकते हैं।