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Mandi News: मध्यस्थ का फैसला बरकरार, एनएचएआई की याचिका खारिज
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फोरलेन के लिए अधिगृहीत जमीन का 44.20 लाख रुपये प्रति बीघा मुआवजा रहेगा कायम
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। फोरलेन के लिए अधिगृहीत जमीन का मुआवजा बढ़ाकर 44.20 लाख रुपये प्रति बीघा करने के मध्यस्थ के फैसले को जिला न्यायाधीश मंडी की अदालत ने बरकरार रखा है। अदालत ने एनएचएआई की याचिका खारिज कर दी। सक्षम प्राधिकारी ने पहले मुआवजा 36 लाख रुपये प्रति बीघा तय किया था, जिसे मध्यस्थ एवं मंडलायुक्त मंडी ने 19 जून 2023 के अवार्ड में बढ़ाकर 44.20 लाख रुपये कर दिया था। एनएचएआई ने दूसरे मुहाल के पूर्व अवार्ड को आधार बनाने पर आपत्ति जताई थी। अदालत ने कहा कि मध्यस्थ ने उपलब्ध साक्ष्यों और पूर्व अवार्ड पर विचार के बाद बाजार मूल्य तय किया था। धारा 34 के तहत अदालत मध्यस्थ के समक्ष पेश साक्ष्यों का दोबारा मूल्यांकन नहीं कर सकती। अदालत ने बढ़े मुआवजे पर वैधानिक लाभ और ब्याज भी बरकरार रखा तथा दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च वहन करने के आदेश दिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। फोरलेन के लिए अधिगृहीत जमीन का मुआवजा बढ़ाकर 44.20 लाख रुपये प्रति बीघा करने के मध्यस्थ के फैसले को जिला न्यायाधीश मंडी की अदालत ने बरकरार रखा है। अदालत ने एनएचएआई की याचिका खारिज कर दी। सक्षम प्राधिकारी ने पहले मुआवजा 36 लाख रुपये प्रति बीघा तय किया था, जिसे मध्यस्थ एवं मंडलायुक्त मंडी ने 19 जून 2023 के अवार्ड में बढ़ाकर 44.20 लाख रुपये कर दिया था। एनएचएआई ने दूसरे मुहाल के पूर्व अवार्ड को आधार बनाने पर आपत्ति जताई थी। अदालत ने कहा कि मध्यस्थ ने उपलब्ध साक्ष्यों और पूर्व अवार्ड पर विचार के बाद बाजार मूल्य तय किया था। धारा 34 के तहत अदालत मध्यस्थ के समक्ष पेश साक्ष्यों का दोबारा मूल्यांकन नहीं कर सकती। अदालत ने बढ़े मुआवजे पर वैधानिक लाभ और ब्याज भी बरकरार रखा तथा दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च वहन करने के आदेश दिए।