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Mandi News: आंगनबाड़ी वर्करों ने मनाया काला दिवस, केंद्र के खिलाफ खोला मोर्चा
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मानदेय बढ़ाने, नियमितीकरण और ग्रेच्युटी लागू करने की मांगों पर सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन (सीटू) ने शुक्रवार को काला दिवस मनाते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) मंडी के माध्यम से केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी को मांगपत्र भेजा। यूनियन का आरोप है कि मंत्री स्तर पर दिए गए आश्वासनों के बावजूद उनकी प्रमुख मांगों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
यूनियन की जिला सचिव सुदर्शन, सीटू जिला सचिव राजेश शर्मा और सुरेश सरवाल ने कहा कि वर्ष 2018 से लंबित मानदेय वृद्धि, सर्वोच्च न्यायालय के वर्ष 2022 के फैसले के अनुरूप ग्रेच्युटी लागू करने, फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) की अनिवार्यता समाप्त करने, ऑनलाइन कार्यों के नाम पर हो रहे उत्पीड़न पर रोक लगाने तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने जैसे वादे आज तक पूरे नहीं किए गए हैं।
आरोप लगाया कि बजट 2026-27 में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और अन्य स्कीम वर्करों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। एक ओर केंद्र सरकार श्रम संहिताओं के तहत सभी श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी देने की बात करती है, वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है। साथ ही पूरक पोषण कार्यक्रम की लागत बढ़ाने संबंधी पूर्व घोषणा को भी सरकार ने लागू नहीं किया है।
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यूनियन ने मांग की है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को क्रमशः ग्रेड-3 और ग्रेड-4 सरकारी कर्मचारी के रूप में नियमित किया जाए। नियमितीकरण होने तक कार्यकर्ताओं को 41 हजार रुपये और सहायिकाओं को 35 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए। साथ ही सभी के लिए न्यूनतम 18 हजार रुपये मासिक पेंशन सुनिश्चित की जाए।
इसके अलावा यूनियन ने मांग उठाई कि आंगनबाड़ी कर्मियों को गैर-आईसीडीएस कार्यों जैसे बीएलओ ड्यूटी, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), जनगणना तथा अन्य सर्वेक्षण संबंधी कार्यों से मुक्त किया जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन (सीटू) ने शुक्रवार को काला दिवस मनाते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) मंडी के माध्यम से केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी को मांगपत्र भेजा। यूनियन का आरोप है कि मंत्री स्तर पर दिए गए आश्वासनों के बावजूद उनकी प्रमुख मांगों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
यूनियन की जिला सचिव सुदर्शन, सीटू जिला सचिव राजेश शर्मा और सुरेश सरवाल ने कहा कि वर्ष 2018 से लंबित मानदेय वृद्धि, सर्वोच्च न्यायालय के वर्ष 2022 के फैसले के अनुरूप ग्रेच्युटी लागू करने, फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) की अनिवार्यता समाप्त करने, ऑनलाइन कार्यों के नाम पर हो रहे उत्पीड़न पर रोक लगाने तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने जैसे वादे आज तक पूरे नहीं किए गए हैं।
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आरोप लगाया कि बजट 2026-27 में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और अन्य स्कीम वर्करों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। एक ओर केंद्र सरकार श्रम संहिताओं के तहत सभी श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी देने की बात करती है, वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है। साथ ही पूरक पोषण कार्यक्रम की लागत बढ़ाने संबंधी पूर्व घोषणा को भी सरकार ने लागू नहीं किया है।
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यूनियन ने मांग की है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को क्रमशः ग्रेड-3 और ग्रेड-4 सरकारी कर्मचारी के रूप में नियमित किया जाए। नियमितीकरण होने तक कार्यकर्ताओं को 41 हजार रुपये और सहायिकाओं को 35 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए। साथ ही सभी के लिए न्यूनतम 18 हजार रुपये मासिक पेंशन सुनिश्चित की जाए।
इसके अलावा यूनियन ने मांग उठाई कि आंगनबाड़ी कर्मियों को गैर-आईसीडीएस कार्यों जैसे बीएलओ ड्यूटी, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), जनगणना तथा अन्य सर्वेक्षण संबंधी कार्यों से मुक्त किया जाए।