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Mandi News: पांगणा में महाभारत कालीन स्थलों का अध्ययन कर लौटा अमेरिकी नागरिक
Mon, 29 Jul 2024 06:59 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Mon, 29 Jul 2024 06:59 AM IST
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पांगणा में पहुंचे अमेरिकी नागरिक पीटर के साथ स्थानीय निवासी डॉ. जगदीश शर्मा और अन्य। -स्रोत :
करसोग (मंडी)। करसोग के पांगणा में महाभारत कालीन कई घटना स्थल हैं। हाल ही में अमेरिका के एक नागरिक पीटर ने यहां पर आकर इन स्थलों और घटनाओं का अध्ययन किया और शूटिंग भी की। उन्होंने यहां पर तत्तापानी, कामाक्षा मंदिर, थला सहित कई स्थानों के नजारों को कैमरे में किया कैद किया।
जन-कल्याण मंच पांगणा-सुुकेत के अध्यक्ष डाॅ. हिमेंद्र बाली हिम का कहना है कि परशुराम ने हिमाचल प्रदेश की सतलुज घाटी क्षेत्र में सुकेत राज्य से प्रवेश किया। परशुराम ने इस कालावधि में शिमला जिले के पूर्ववर्ती क्षेत्र सुन्नी के राजा सहस्रार्जुन का वध कर अपने पिता की मृत्यु का प्रतिशोध लिया था। सुकेत का शिवालिकीय क्षेत्र से तत्तापानी प्रवेश द्वार रहा है। यहीं सप्त ऋषियों में एक जमदग्नि की तपोभूमि रही है।
परशुराम ने पांगणा के पश्चिम में घाड़ी, पज्याणु और झंडयारा में अस्थायी बस्तियों का निर्माण किया। तदोपरांत पांगणा में भैरव व शाक्त तंत्र परंपरा की स्थापना की। परशुराम ने इसी क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए करसोग के काओ में कामाख्या शक्ति पीठ, ममेल में महाकाल, बुशहर के नीरथ में सूर्य नारायण, दत्तनगर में दत्तात्रेय एवं बाहरी सराज में अंबिका देवी की स्थापना कर सनातन धर्म को प्रतिष्ठित किया।
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जन-कल्याण मंच पांगणा-सुुकेत के अध्यक्ष डाॅ. हिमेंद्र बाली हिम का कहना है कि परशुराम ने हिमाचल प्रदेश की सतलुज घाटी क्षेत्र में सुकेत राज्य से प्रवेश किया। परशुराम ने इस कालावधि में शिमला जिले के पूर्ववर्ती क्षेत्र सुन्नी के राजा सहस्रार्जुन का वध कर अपने पिता की मृत्यु का प्रतिशोध लिया था। सुकेत का शिवालिकीय क्षेत्र से तत्तापानी प्रवेश द्वार रहा है। यहीं सप्त ऋषियों में एक जमदग्नि की तपोभूमि रही है।
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परशुराम ने पांगणा के पश्चिम में घाड़ी, पज्याणु और झंडयारा में अस्थायी बस्तियों का निर्माण किया। तदोपरांत पांगणा में भैरव व शाक्त तंत्र परंपरा की स्थापना की। परशुराम ने इसी क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए करसोग के काओ में कामाख्या शक्ति पीठ, ममेल में महाकाल, बुशहर के नीरथ में सूर्य नारायण, दत्तनगर में दत्तात्रेय एवं बाहरी सराज में अंबिका देवी की स्थापना कर सनातन धर्म को प्रतिष्ठित किया।
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