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केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों से कृषि क्षेत्र संकट में : नारायण चौहान
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किसानों की मांगों को लेकर संघर्ष तेज करेगी किसान सभा
बालीचौकी में हुआ किसान सभा का सम्मेलन, 13 सदस्यीय कमेटी गठित
संवाद न्यूज एजेंसी
बालीचौकी (मंडी)। हिमाचल किसान सभा लोकल कमेटी बालीचौकी का सम्मेलन शुक्रवार को हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन किसान सभा राज्य कमेटी के उपाध्यक्ष नारायण चौहान ने किया। उन्होंने कहा कि किसान सभा आजादी से पहले से ही किसानों की जमीन और उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ती आ रही है। केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों के चलते कृषि क्षेत्र गंभीर संकट से गुजर रहा है। कृषि सब्सिडी में कटौती, विकास के नाम पर जमीन अधिग्रहण और खेती की बढ़ती लागत के कारण कृषि लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है। आरोप लगाया कि सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के अपने वादे से पीछे हट रही है।
सम्मेलन को किसान सभा राज्य कमेटी के सदस्य महेंद्र राणा ने भी संबोधित किया। इस दौरान स्मार्ट मीटर के विरोध और मनरेगा को बचाने के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए गए। सम्मेलन में 13 सदस्यीय लोकल कमेटी का गठन किया गया। इसमें हीरालाल को अध्यक्ष, इंद्र सिंह को सचिव और केहर सिंह को कोषाध्यक्ष चुना गया। सम्मेलन में किसानों और बागवानों की विभिन्न मांगों को लेकर क्षेत्र में संघर्ष को और तेज करने का निर्णय लिया गया।
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बालीचौकी में हुआ किसान सभा का सम्मेलन, 13 सदस्यीय कमेटी गठित
संवाद न्यूज एजेंसी
बालीचौकी (मंडी)। हिमाचल किसान सभा लोकल कमेटी बालीचौकी का सम्मेलन शुक्रवार को हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन किसान सभा राज्य कमेटी के उपाध्यक्ष नारायण चौहान ने किया। उन्होंने कहा कि किसान सभा आजादी से पहले से ही किसानों की जमीन और उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ती आ रही है। केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों के चलते कृषि क्षेत्र गंभीर संकट से गुजर रहा है। कृषि सब्सिडी में कटौती, विकास के नाम पर जमीन अधिग्रहण और खेती की बढ़ती लागत के कारण कृषि लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है। आरोप लगाया कि सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के अपने वादे से पीछे हट रही है।
सम्मेलन को किसान सभा राज्य कमेटी के सदस्य महेंद्र राणा ने भी संबोधित किया। इस दौरान स्मार्ट मीटर के विरोध और मनरेगा को बचाने के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए गए। सम्मेलन में 13 सदस्यीय लोकल कमेटी का गठन किया गया। इसमें हीरालाल को अध्यक्ष, इंद्र सिंह को सचिव और केहर सिंह को कोषाध्यक्ष चुना गया। सम्मेलन में किसानों और बागवानों की विभिन्न मांगों को लेकर क्षेत्र में संघर्ष को और तेज करने का निर्णय लिया गया।
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