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Mandi News: हत्या का अभियोग साबित न होने पर आरोपी बरी
Thu, 08 Aug 2024 07:20 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 08 Aug 2024 07:20 PM IST
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तहकीकात में गैरकानूनी तरीका अपनाने पर गृह सचिव, डीजीपी, एसपी को जांच के लिए फैसले की प्रति भेजी
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। हत्या के आरोपी के खिलाफ अभियोग साबित न होने पर अदालत ने एक आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले की तहकीकात गैरकानूनी तरीके से करने के कारण प्रदेश के गृह सचिव, डीजीपी और जिला पुलिस अधीक्षक को फैसले की प्रति प्रेषित करते हुए निष्पक्ष जांच करने और जांच के परिणामों के बारे में अदालत को अवगत करने के लिए कहा है।
सत्र न्यायाधीश के न्यायालय ने बल्ह तहसील के कैहड़ (राजगढ़) निवासी देविंद्र कुमार के खिलाफ भादंसं की धारा 302, 341 और 323 के तहत अभियोग साबित न होने पर उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार शिकायतकर्ता का बेटा वीरेंद्र टांग के इलाज के लिए सुंदरनगर अस्पताल गया हुआ था, जबकि सात और आठ मई 2013 की रात को पुलिस का दल डडौर के पास गश्त पर तैनात था। इसी दौरान उन्हें थाना से सूचना मिली कि एक व्यक्ति को डडौर के कबाड़ी मार्केट में काबू किया गया है। पुलिस ने एक व्यक्ति को सड़क के किनारे लेटा हुआ देखा। उसे चार-पांच लोगों ने घेरा हुआ था। जिनमें आरोपी सहित अन्य लोग शामिल थे। पुलिस को बताया गया कि उक्त व्यक्ति को चोरी करते हुए पकड़ा गया है। वीरेंद्र के पिता को बल्ह थाना से सूचना मिली थी कि वीरेंद्र को मोटरसाइकिल से गिरने के कारण चोटें आई हैं और उसे रत्ती अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। वीरेंद्र को रत्ती से क्षेत्रीय अस्पताल को भेजा गया था। जहां से उसे पीजीआई चंडीगढ़ को रेफर कर दिया गया। चिकित्सकीय परीक्षण में वीरेंद्र के सारे शरीर पर चोटें पाई गई थी। इसके बाद वीरेंद्र की 13 मई को पीजीआई में मौत हो गई थी। पुलिस ने वीरेंद्र के पिता की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर अदालत में अभियोग चलाया था।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है जिससे जाहिर हो कि उसने वीरेंद्र के साथ मारपीट की थी, जिससे उसके सिर पर चोट लगी थी। इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था और यह परिस्थितियों से जाहिर नहीं होता कि आरोपी ने ही इस अपराध को अंजाम दिया हो। अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अभियोग को साबित करने में असफल रहा है। बचाव पक्ष की ओर से इस मामले की पैरवी अधिवक्ता अजय ठाकुर ने की।
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मंडी। हत्या के आरोपी के खिलाफ अभियोग साबित न होने पर अदालत ने एक आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले की तहकीकात गैरकानूनी तरीके से करने के कारण प्रदेश के गृह सचिव, डीजीपी और जिला पुलिस अधीक्षक को फैसले की प्रति प्रेषित करते हुए निष्पक्ष जांच करने और जांच के परिणामों के बारे में अदालत को अवगत करने के लिए कहा है।
सत्र न्यायाधीश के न्यायालय ने बल्ह तहसील के कैहड़ (राजगढ़) निवासी देविंद्र कुमार के खिलाफ भादंसं की धारा 302, 341 और 323 के तहत अभियोग साबित न होने पर उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार शिकायतकर्ता का बेटा वीरेंद्र टांग के इलाज के लिए सुंदरनगर अस्पताल गया हुआ था, जबकि सात और आठ मई 2013 की रात को पुलिस का दल डडौर के पास गश्त पर तैनात था। इसी दौरान उन्हें थाना से सूचना मिली कि एक व्यक्ति को डडौर के कबाड़ी मार्केट में काबू किया गया है। पुलिस ने एक व्यक्ति को सड़क के किनारे लेटा हुआ देखा। उसे चार-पांच लोगों ने घेरा हुआ था। जिनमें आरोपी सहित अन्य लोग शामिल थे। पुलिस को बताया गया कि उक्त व्यक्ति को चोरी करते हुए पकड़ा गया है। वीरेंद्र के पिता को बल्ह थाना से सूचना मिली थी कि वीरेंद्र को मोटरसाइकिल से गिरने के कारण चोटें आई हैं और उसे रत्ती अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। वीरेंद्र को रत्ती से क्षेत्रीय अस्पताल को भेजा गया था। जहां से उसे पीजीआई चंडीगढ़ को रेफर कर दिया गया। चिकित्सकीय परीक्षण में वीरेंद्र के सारे शरीर पर चोटें पाई गई थी। इसके बाद वीरेंद्र की 13 मई को पीजीआई में मौत हो गई थी। पुलिस ने वीरेंद्र के पिता की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर अदालत में अभियोग चलाया था।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है जिससे जाहिर हो कि उसने वीरेंद्र के साथ मारपीट की थी, जिससे उसके सिर पर चोट लगी थी। इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था और यह परिस्थितियों से जाहिर नहीं होता कि आरोपी ने ही इस अपराध को अंजाम दिया हो। अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अभियोग को साबित करने में असफल रहा है। बचाव पक्ष की ओर से इस मामले की पैरवी अधिवक्ता अजय ठाकुर ने की।
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