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Mandi News: सरकाघाट काॅलेज के प्राचार्य को सूचना न देने पर पांच हजार रुपये जुर्माना
Fri, 21 Mar 2025 11:07 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Fri, 21 Mar 2025 11:07 PM IST
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मंडी। राज्य सूचना आयुक्त ने सूचना उपलब्ध नहीं कराने पर सरकाघाट काॅलेज के प्राचार्य पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। सूचना आयुक्त डॉ. एसएस गुलेरिया ने राजकीय महाविद्यालय सरकाघाट के प्राचार्य और सह जनसूचना अधिकारी रिखी राम कौंडल को उक्त जुर्माना लगाया है।
आयुक्त ने अपने आदेश में यह जुर्माना राशि सरकाघाट तहसील के चम्यानू (नबाही) निवासी अपीलकर्ता संतोष कुमार को बतौर मुआवजा देने को कहा है। अपीलकर्ता संतोष कुमार ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत कॉलेज से कुछ सूचनाएं मांगी थीं। प्राचार्य व सह जनसूचना अधिकारी ने 27 मई 2024 को अपीलकर्ता को उत्तर भेजते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया था।
इस उत्तर से असंतुष्ट होकर, अपीलकर्ता ने 5 जून 2024 को अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) के समक्ष प्रथम अपील दायर की, जिसका निपटारा 25 जून 2024 को इस निर्देश के साथ हुआ था कि जन सूचना अधिकारी अपीलकर्ता को सही और प्रासांगिक जानकारी निशुल्क तुरंत प्रदान करे, लेकिन इसके बाद भी अपीलकर्ता को सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।
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ऐसे में अपीलकर्ता संतोष कुमार ने राज्य सूचना आयुक्त के समक्ष अपील दायर की। इस पर सूचना आयुक्त ने दोनों पक्षों को विस्तार से सुना। राज्य सूचना आयुक्त ने अपने आदेश में कहा कि प्राचार्य व सह जनसूचना अधिकारी सूचना देने में न तो देरी का कारण स्पष्ट कर पाए और न ही सही तरीके से सूचना प्रदान कर पाए। इसके अलावा, जनसूचना अधिकारी ने अपीलकर्ता को अनावश्यक रूप से परेशान किया है। इसके चलते अधिनियम की धारा 19(8)(b) के प्रावधानों के तहत उन्होंने अपीलकर्ता को पांच हजार रुपये का मुआवजा प्रदान करने का आदेश सुनाया है। वहीं, आयुक्त ने कहा कि वे आदेश जारी होने के 15 दिन के भीतर अपीलकर्ता को मांगी जानकारी निशुल्क प्रदान करें और इसकी सूचना इस आयोग को दें।
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आयुक्त ने अपने आदेश में यह जुर्माना राशि सरकाघाट तहसील के चम्यानू (नबाही) निवासी अपीलकर्ता संतोष कुमार को बतौर मुआवजा देने को कहा है। अपीलकर्ता संतोष कुमार ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत कॉलेज से कुछ सूचनाएं मांगी थीं। प्राचार्य व सह जनसूचना अधिकारी ने 27 मई 2024 को अपीलकर्ता को उत्तर भेजते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया था।
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इस उत्तर से असंतुष्ट होकर, अपीलकर्ता ने 5 जून 2024 को अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) के समक्ष प्रथम अपील दायर की, जिसका निपटारा 25 जून 2024 को इस निर्देश के साथ हुआ था कि जन सूचना अधिकारी अपीलकर्ता को सही और प्रासांगिक जानकारी निशुल्क तुरंत प्रदान करे, लेकिन इसके बाद भी अपीलकर्ता को सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।
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ऐसे में अपीलकर्ता संतोष कुमार ने राज्य सूचना आयुक्त के समक्ष अपील दायर की। इस पर सूचना आयुक्त ने दोनों पक्षों को विस्तार से सुना। राज्य सूचना आयुक्त ने अपने आदेश में कहा कि प्राचार्य व सह जनसूचना अधिकारी सूचना देने में न तो देरी का कारण स्पष्ट कर पाए और न ही सही तरीके से सूचना प्रदान कर पाए। इसके अलावा, जनसूचना अधिकारी ने अपीलकर्ता को अनावश्यक रूप से परेशान किया है। इसके चलते अधिनियम की धारा 19(8)(b) के प्रावधानों के तहत उन्होंने अपीलकर्ता को पांच हजार रुपये का मुआवजा प्रदान करने का आदेश सुनाया है। वहीं, आयुक्त ने कहा कि वे आदेश जारी होने के 15 दिन के भीतर अपीलकर्ता को मांगी जानकारी निशुल्क प्रदान करें और इसकी सूचना इस आयोग को दें।