{"_id":"6824e79a0b6cc004e7031b15","slug":"a-crowd-of-devotees-gathered-at-the-hoom-of-dev-chunjwala-mandi-news-c-90-1-ssml1045-155968-2025-05-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: देव चुंजवाला के हूम में उमड़ा भक्तों का सैलाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: देव चुंजवाला के हूम में उमड़ा भक्तों का सैलाब
Thu, 15 May 2025 12:27 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 15 May 2025 12:27 AM IST
विज्ञापन
चुंजवाला धार पर देव श्री चुंजवाला के वार्षिक हूम (जाग) उत्सव में उमड़ा भक्तों का जनसैलाब। स्त्र
- फोटो : पीड़ितों की समस्याएं सुनतीं महिला आयोग की सदस्य अनीता गुप्ता।
थुनाग (मंडी)। साढ़े नौ हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित चुंजवाला धार पर देव श्री चुंजवाला के वार्षिक हूम (जाग) उत्सव में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर और बागीथाच गढ़ में इतनी भीड़ जुटी कि पैर रखने की जगह भी नहीं बची।
20 से 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य देवता के दर्शन कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस उत्सव के लिए देव रथ को देवता की मुख्य कोठी कांडा से वाद्य यंत्रों और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ चुंजवाला के मूल मंदिर तक लाया गया।
पूरी रात भक्तों ने देव आराधना में भाग लिया और देव रथ को गर्भगृह में प्रवेश करवाया गया। देव आज्ञा से देवता के गूर ने देव खेल के दौरान श्रद्धालुओं की समस्याओं का समाधान भी किया। देव समाज में देव श्री चुंजवाला को महादेव शिव का अवतार माना जाता है। इस वार्षिक हूम में देवता की सात हारियों (क्षेत्रों) के हारियान अपने बच्चों के मुंडन संस्कार की रस्म भी पूरी की गई।
विज्ञापन
देवता कमेटी के अध्यक्ष देवराज रावत ने बताया कि बीते मंगलवार रात हूम प्रक्रिया के तहत हारियानों ने नाटी का आयोजन किया, जिसके बाद मशालें जलाई गईं। देवता के कारदार बुद्धे राम ने बताया कि देवता की कोठी से मूल स्थान तक की चार किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई में कई परंपराएं निहित हैं। रास्ते में माता जोगणी का निवास है, जो देवता को रोकने का प्रयास करती हैं।
इसे रोकने के लिए सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार पहले देव रथ को एक रस्सी (देव नीति में रैज कहा जाता है) से खींचकर चुंजवाला गढ़ तक लाया जाता था। अब युवा कारिंदे और देवलु एक-दूसरे के हाथ पकड़कर मजबूत चेन बनाकर इस चढ़ाई को पार करते हैं।
विज्ञापन
20 से 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य देवता के दर्शन कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस उत्सव के लिए देव रथ को देवता की मुख्य कोठी कांडा से वाद्य यंत्रों और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ चुंजवाला के मूल मंदिर तक लाया गया।
विज्ञापन
पूरी रात भक्तों ने देव आराधना में भाग लिया और देव रथ को गर्भगृह में प्रवेश करवाया गया। देव आज्ञा से देवता के गूर ने देव खेल के दौरान श्रद्धालुओं की समस्याओं का समाधान भी किया। देव समाज में देव श्री चुंजवाला को महादेव शिव का अवतार माना जाता है। इस वार्षिक हूम में देवता की सात हारियों (क्षेत्रों) के हारियान अपने बच्चों के मुंडन संस्कार की रस्म भी पूरी की गई।
विज्ञापन
देवता कमेटी के अध्यक्ष देवराज रावत ने बताया कि बीते मंगलवार रात हूम प्रक्रिया के तहत हारियानों ने नाटी का आयोजन किया, जिसके बाद मशालें जलाई गईं। देवता के कारदार बुद्धे राम ने बताया कि देवता की कोठी से मूल स्थान तक की चार किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई में कई परंपराएं निहित हैं। रास्ते में माता जोगणी का निवास है, जो देवता को रोकने का प्रयास करती हैं।
इसे रोकने के लिए सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार पहले देव रथ को एक रस्सी (देव नीति में रैज कहा जाता है) से खींचकर चुंजवाला गढ़ तक लाया जाता था। अब युवा कारिंदे और देवलु एक-दूसरे के हाथ पकड़कर मजबूत चेन बनाकर इस चढ़ाई को पार करते हैं।