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सेब की नई पौधे लगाने में जुटे बागवान
Mandi
Updated Tue, 01 May 2012 12:00 PM IST
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करसोग (मंडी)। एप्पल वैली के नाम से विख्यात करसोग घाटी में जहां बागवान वैज्ञानिक तकनीक एवं पौधों को नई वैराइटी की ओर आकर्षित हुए हैं, वहीं वर्षों से सेब की फसल देने वाले पुराने पौधों को उखाड़ कर विदेशी पौधे लगाए जा रहे हैं। हालांकि, करसोग क्षेत्र से हर वर्ष करोड़ों का सेब बाहरी बाजारों में पहुंचता है। मौजूदा समय में 27000 बागवान करसोग में सेब का उत्पादन कर रहे हैं। क्षेत्र के अधिकांश बागवान अपने बागों में विदेशी पौधों का रोपण कर रहे हैं। जबकि ज्यादातर बागवान परंपरागत सेब की किस्में लगा रहे हैं। इनमें शमैल, रिच रेड, गोल्डन आदि किस्में हैं। बाजार में अरली किस्म के सेब की पौध पहुंचने से क्षेत्र के बागवान इस ओर आकर्षित हो रहे हैं। अरली किस्म का सेब जल्दी तैयार हो जाता है और इसके दाम भी अच्छे मिल जाते हैं। स्थानीय बागवान अरली की विभिन्न किस्मों जिनमें रेड चीफ, ओरगन, स्पर, सुपर चीफ, गेलगाला सहित सेब की नई पौध को उगाकर बाहरी सेब की मनोपली को तोड़ सकते हैं। करसोग क्षेत्र के बागवान पुराने सेब के पौधों को उखाड़ कर नई किस्म के पौधे लगाने में जुटे हुए हैं। स्थानीय बागवानों में अमर जोत, रत्न, विनोद, सुभाष ने बताया कि बागवानी विशेषज्ञ डा. गुरदेव सिंह भी मान रहे हैं कि बागवान नई किस्म के माध्यम से अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं। बागवान संघ के प्रधान चेतराम वर्मा ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि बागवानों की इस बारे जागरूक करने के लिए शिविर लगाए जाएं ताकि उन्हें उचित जानकारी मुहैया हो सके।
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