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शिमला से दोगुणा वसूली जा रही मंडी में हाउस टैक्स की दरें, जयराम सरकार दे टैक्स में राहत

Wed, 09 Jan 2019 11:30 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Jan 2019 11:30 PM IST
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शिमला से दोगुणा वसूली जा रही मंडी में हाउस  टैक्स की दरें, जयराम सरकार दे टैक्स में राहत
मंडी में शिमला से दोगुणा वसूला जा रहा हाउस टैक्स
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शहरवासियों ने जयराम सरकार दे टैक्स में मांगी राहत
रिहायशी भवनों के लिए 12 प्रतिशत दर, गैर रिहायशी के लिए 14-15 फीसदी है टैक्स
पानी के बिल के साथ 50 फीसदी सीवरेज का चार्ज हटे
अमर उजाला ब्यूूूरो
मंडी। शहरवासियों ने उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को ज्ञापन भेज कर मंडी में हाउस टैक्स की दरें कम करने की मांग उठाई है। साथ ही पानी के बिल के साथ 50 फीसदी सीवरेज का चार्ज हटाने की मांग भी की है। लोगों का तर्क है कि मंडी में हाउस टैक्स की दरें रिहायशी भवनों के लिए बहुत अधिक निर्धारित की गई हैं। मंडी में ये दरें 12 प्रतिशत हैं, जबकि शिमला में ये 2 से 6 प्रतिशत हैं। उसी तरह गैर रिहायशी के लिए मंडी में 14-15 प्रतिशत है तो शिमला में यह 5 से 10 प्रतिशत है। शहर के बाशिंदों ने प्रदेश सरकार से मांग की गई कि शिमला की तरह मंडी में भी गृह कर में कमी की जाए। इसके अलावा पानी के बिलों के साथ 50 प्रतिशत सीवरेज चार्ज रखे गए हैं। उन्हें हटाया जाए तथा इन दरों में प्रति वर्ष की जाने वाली 10 प्रतिशत वृद्धि की बजाय इसे 5 प्रतिशत की दर के साथ तीन वर्षों में बढ़ाया जाए। फाउंडेशन के प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष अमर चंद वर्मा तथा पदाधिकारी हितेंद्र शर्मा, उत्तम चंद सैनी, समीर कश्यप और प्रदीप परमार मौजूद रहे।


भवनों का सर्वे हो तो नब्बे फीसदी घर होंगे अवैध
वहीं, ज्ञापन में 40 साल पुराने नगर नियोजन अधिनियम को धरातल की वास्तविकताओं के अनुरूप न होने का आरोप लगाया है। भवनों का सर्वे किया जाए तो ये तथ्य सामने आएंगे कि 90 फीसदी घरों में इस अधिनियम का पालन नहीं हुआ है। फाउंडेशन के अनुसार नगर नियोजन विभाग में यह प्रावधान है कि निजी भूमि मालिक जिनकी भूमि का खसरा नंबर अलग नहीं है और भूमि में उनका स्वामित्व हिस्से के आधार पर है वे टीसीपी की अनुमति के बगैर अपनी भूमि का क्रय-विक्रय नहीं कर सकते। यह प्रावधान जनहित में नहीं है और यह लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन करता है। ऐसे में इसे तुरंत प्रभाव से हटाया जाए। दावा किया गया कि अधिनियम प्रदेश की भौगोलिक दशाओं को ध्यान में रख कर नहीं बनाया गया है। इसलिए इसमें संशोधन करके आम जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाए और प्रदेश के अनाधिकृत भवनों की समस्या का समाधान किया जाए।
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लोगों ने ये मांगें भी उठाई
- फ्लोर एरिया रेशो की अधिकतम सीमा 1.75 से 4-6 की जानी चाहिए
- अधिकतम मंजिलों की सीमा 3 जमा 1 होनी चाहिए और सैट बैक नियम उदार हों
- पानी के कनेक्शन लेने के लिए भी अनापति प्रमाण पत्र की शर्त को हटाई जाए
- नदी, नालों से 25 मीटर की दूरी पर निर्माण के बजाय उचित ऊंचाई का प्रावधान करने
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