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मरीज को नहीं मिला हैल्थ कार्ड का लाभ
Updated Tue, 10 Apr 2018 11:08 PM IST
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। मुख्यमंत्री के गृह जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल हैं। हर दिन कहीं न कहीं लोगों को असुविधाओं से जूझना पड़ रहा है। जोगिंद्रनगर अस्पताल में उपचाराधीन मरीज ने अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अस्पताल में दाखिल मरीज बीपीएल परिवार से संबधित हैं। उसने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से उसे हेल्थ कार्ड जारी किया गया है, बावजूद इसके मरीज को इलाज के लिए अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। मरीज का कहना है कि अभी तक उसके द्वारा उपचार के लिए करीब दो हजार का खर्च अपने स्तर पर किया गया है। स्थानीय अस्पताल में उसे स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किए गए हेल्थ कार्ड का लाभ नहीं मिला है। जोगिंद्रनगर के टिकरू पंचायत के चांदनी गांव निवासी हरनाम सिंह अस्पताल में करीब चार दिन पहले शरीर में खून की कमी और वजन अचानक घट जाने के चलते दाखिल हुआ था। इस दौरान चिकित्सकों की ओर से अल्ट्रासाउंड और बीमारी से संबंधित कुछ टेस्ट करवाने के लिए कहा गया था। मरीज का कहना है कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड न होने पर उन्हें निजी लैब में मुंह मांगे दाम अदा कर अल्ट्रासाउंड करवाने को मजबूर होना पड़ा, जबकि चिकित्सकों की ओर से लिखे गए टेस्टों पर भी हजारों रुपये वहन करने पड़ रहे हैं। यही नहीं कुछ दवाइयों और इंजेक्शनों का भी खर्च उठाना पड़ा है। मरीज के परिजनों ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और सरकारी सुविधा का उन्हें कोई लाभ नहीं मिला है।
मरीज टांडा रेफर, नहीं मिली एंबुलेंस
स्थानीय अस्पताल से बेड नंबर 3 में दाखिल मरीज के स्वास्थ्य में सुधार न आने पर उसे सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए रेफर किया गया। उपचाराधीन मरीज का कहना है कि उनके द्वारा अस्पताल की एंबुलेंस की मांग की गई। लेकिन, उन्हें एंबुलेंस उपलब्ध नहीं करवाई गई। बाद में उन्हें टैक्सी हायर कर टांडा उपचार के लिए पहुंचना पड़ा। जहां पर वह अपनी गंभीर बीमारी का उपचार करवा रहे हैं।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई : सह निदेशक
अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं पर अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्साधिकारी को दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया, जबकि मुख्य चिकित्साधिकारी ने मामले पर व्यस्तता जाहिर की। बाद में स्वास्थ्य विभाग के सह निदेशक देश राज शर्मा के ध्यान में मामला लाया गया। उन्होंने तमाम बातों को ध्यानपूर्वक सुनते हुए नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाने का भरोसा दिलवाया। वहीं विभागीय अधिकारियों की लापरवाही पर भी कार्रवाई करने की बात की है।
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मरीज टांडा रेफर, नहीं मिली एंबुलेंस
स्थानीय अस्पताल से बेड नंबर 3 में दाखिल मरीज के स्वास्थ्य में सुधार न आने पर उसे सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए रेफर किया गया। उपचाराधीन मरीज का कहना है कि उनके द्वारा अस्पताल की एंबुलेंस की मांग की गई। लेकिन, उन्हें एंबुलेंस उपलब्ध नहीं करवाई गई। बाद में उन्हें टैक्सी हायर कर टांडा उपचार के लिए पहुंचना पड़ा। जहां पर वह अपनी गंभीर बीमारी का उपचार करवा रहे हैं।
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लापरवाही पर होगी कार्रवाई : सह निदेशक
अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं पर अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्साधिकारी को दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया, जबकि मुख्य चिकित्साधिकारी ने मामले पर व्यस्तता जाहिर की। बाद में स्वास्थ्य विभाग के सह निदेशक देश राज शर्मा के ध्यान में मामला लाया गया। उन्होंने तमाम बातों को ध्यानपूर्वक सुनते हुए नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाने का भरोसा दिलवाया। वहीं विभागीय अधिकारियों की लापरवाही पर भी कार्रवाई करने की बात की है।
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