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ये गौरा तेरा दुल्हा बड़ा निराला पर झूमे शिवगण
Updated Fri, 16 Feb 2018 07:40 PM IST
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गौरां तेरा दूल्हा बड़ा निराला पर झूमे शिवभक्त
नाचते गाते भगवान शिव-गौरां के ब्याह में शरीक हुए शिवगण
पड्डल मैदान में पहली दफा निकाली गई भोले की बारात
भगवान भोलेनाथ की गाथा, छोटी काशी और महोत्सव के महत्व का वर्णन
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। महाशिवरात्रि के इतिहास में पहली दफा भगवान शंकर की बारात निकली। पारंपरिक वाद्य यंत्रों, ढोल नगाड़ों पर नाचते गाते भोले के गणों ने बारात में शिरकत की। छोटी काशी मंडी में महाशिवरात्रि के मायने अलग हैं। यहां पर देव आस्था का महाकुंभ सदियों से सजता आ रहा है। लेकिन, इतिहास में पहली दफा जलेब, सांस्कृतिक संध्याओं से आगे बढ़ते हुए भगवान शंकर को समर्पित महाशिवरात्रि में शिव गाथा का वर्णन सर्वदेवता सेवा समिति के तत्वावधान में ऐतिहासिक पड्डल मैदान में किया गया। इस दौरान मांडव ऋषि की तपोस्थली, देवी देवताओं के इतिहास, महाशिवरात्रि महोत्सव में देवों के महत्व और छोटी काशी के महत्व का वर्णन किया गया।
पौने दो बजे से तीन बजे तक चला कार्यक्रम
समय करीब पौने दो बजे कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कथा वाचक एवं देव चंडोही के कारदार ने कथा का वर्णन किया। उन्होंने पधारो हमारे घर गणेश जी से कार्यक्रम का आगाज किया। इसके बाद उन्होंने मांडव ऋषि की धरती के इतिहास का वर्णन किया। दो बजे के बाद नागिन डांस का कार्यक्रम में खूब तड़का लगा। उन्होंने कथा वाचन करते हुए कहा कि बदलाव प्रकृति का नियम है। इसके बाद कार्यक्रम में शिव विवाह की भव्य झांकी निकाली गई। जिसमें भगवान शिव के गणों ने नृत्य किया। इस दौरान ऐ गौरां तेरा दूल्हा बड़ा निराला, आज भोले शंकर की शादी है, हारा वाले मेरा साईं गानों पर माता गौरां की सखियों और भगवान शिव के गणों ने नृत्य किया।
इन कलाकारों ने लिया भाग
तीर्थ राम शर्मा, भाणू राम ठाकुर, पुष्पराज, कल्पना ठाकुर, अर्चना ठाकुर, कमलकांत, लेद राम, यशपाल, कृष्ण, बलदेव, भानु, अर्चना, शेर सिंह, झाबे राम ने कार्यक्रम में भाग लिया। सर्वदेवता सेवा समिति के अध्यक्ष पंडित शिवपाल शर्मा ने कहा कि महोत्सव में पहली दफा इस तरह का प्रयास किया गया है।
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नाचते गाते भगवान शिव-गौरां के ब्याह में शरीक हुए शिवगण
पड्डल मैदान में पहली दफा निकाली गई भोले की बारात
भगवान भोलेनाथ की गाथा, छोटी काशी और महोत्सव के महत्व का वर्णन
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। महाशिवरात्रि के इतिहास में पहली दफा भगवान शंकर की बारात निकली। पारंपरिक वाद्य यंत्रों, ढोल नगाड़ों पर नाचते गाते भोले के गणों ने बारात में शिरकत की। छोटी काशी मंडी में महाशिवरात्रि के मायने अलग हैं। यहां पर देव आस्था का महाकुंभ सदियों से सजता आ रहा है। लेकिन, इतिहास में पहली दफा जलेब, सांस्कृतिक संध्याओं से आगे बढ़ते हुए भगवान शंकर को समर्पित महाशिवरात्रि में शिव गाथा का वर्णन सर्वदेवता सेवा समिति के तत्वावधान में ऐतिहासिक पड्डल मैदान में किया गया। इस दौरान मांडव ऋषि की तपोस्थली, देवी देवताओं के इतिहास, महाशिवरात्रि महोत्सव में देवों के महत्व और छोटी काशी के महत्व का वर्णन किया गया।
पौने दो बजे से तीन बजे तक चला कार्यक्रम
समय करीब पौने दो बजे कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कथा वाचक एवं देव चंडोही के कारदार ने कथा का वर्णन किया। उन्होंने पधारो हमारे घर गणेश जी से कार्यक्रम का आगाज किया। इसके बाद उन्होंने मांडव ऋषि की धरती के इतिहास का वर्णन किया। दो बजे के बाद नागिन डांस का कार्यक्रम में खूब तड़का लगा। उन्होंने कथा वाचन करते हुए कहा कि बदलाव प्रकृति का नियम है। इसके बाद कार्यक्रम में शिव विवाह की भव्य झांकी निकाली गई। जिसमें भगवान शिव के गणों ने नृत्य किया। इस दौरान ऐ गौरां तेरा दूल्हा बड़ा निराला, आज भोले शंकर की शादी है, हारा वाले मेरा साईं गानों पर माता गौरां की सखियों और भगवान शिव के गणों ने नृत्य किया।
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इन कलाकारों ने लिया भाग
तीर्थ राम शर्मा, भाणू राम ठाकुर, पुष्पराज, कल्पना ठाकुर, अर्चना ठाकुर, कमलकांत, लेद राम, यशपाल, कृष्ण, बलदेव, भानु, अर्चना, शेर सिंह, झाबे राम ने कार्यक्रम में भाग लिया। सर्वदेवता सेवा समिति के अध्यक्ष पंडित शिवपाल शर्मा ने कहा कि महोत्सव में पहली दफा इस तरह का प्रयास किया गया है।
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