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40 से 60 फीसदी तक सिमटा सूबे में सेब का उत्पादन
Updated Tue, 01 May 2018 07:32 PM IST
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ओलावृष्टि से 40 से 60 फीसदी सेब उत्पादन प्रभावित
करोड़ों की चपत : मौसम की बेरुखी से सेब की सेटिंग प्रभावित
एंटी हेलगन और नेट भी नहीं बचा पाए सेब सेटिंग को
मौसम परिवर्तन से सेब बागवानों को लगा करोड़ों का झटका
बिंदर ठाकुर
गोहर (मंडी)।
ओलावृष्टि, बारिश और तापमान में गिरावट से सूबे में सेब का उत्पादन 40 से 60 फीसदी तक सिमट कर रह जाएगा। मौसम ने सेब की सेटिंग बुरी तरह प्रभावित की है। फ्लावरिंग के समय हुई ओलावृष्टि और बारिश से बागवानों को करोड़ों की चपत लगी है। इस बार बर्फबारी भी कम होने से सेब बगीचों मेें चिलिंग आवर्स पूरे नहीं हो पाए हैं। जिससे सेब कारोबार में गिरावट आंकी जा रही है। एंटी हेलगन और नेट भी सेब की फसल को बचा नहीं पाए हैं। 4 से 6 हजार फीट ऊंचाई के बगीचों में सेटिंग पर मौसम परिवर्तन से प्रतिकूल असर पड़ा है। बागवानी विशेषज्ञ डा. एसपी भारद्वाज का कहना है कि मौसम में हो रहे लगातार परिवर्तन से सेब सेटिंग पर प्रतिकूल असर पड़ा है। मंडी, कुल्लू, चंबा, शिमला और किन्नौर में उत्पादित होने वाले सेब कारोबार को इस साल मौसम की मार पड़ने से सेब बगीचों में परागण प्रक्रिया सही नहीं हो पाई है। जिससे सेब की सेटिंग फेल हो गई है। प्रदेश में ओलावृष्टि से बचने के लिए सरकार ने अनुदान पर एंटी हेलगन भी बागवानों की सुविधा के लिए लगाई है। मगर जहां यह मशीन लगी है उन क्षेत्रों में भी ओलावृष्टि और बारिश ने फ्लावरिंग के समय कहर ढाया है।
यह कहना है सेब बागवानों का
मंडी जिले की सराज घाटी सेब उत्पादक संघ के प्रधान चतर सिंह ठाकुर ने कहा कि जंजैहली घाटी में करोड़ों की बागवानों ने नेटिंग की है। लेकिन, मौसम की मार पड़ने से बागवानों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। जिसका प्रमुख कारण मौसम परिवर्तन रहा है। उधर, नाचन फ्रूट ग्रोवर एसोसिएशन के उप प्रधान प्रेम सिंह ठाकुर ने कहा है कि क्षेत्र में फ्लावरिंग के समय ठंड पड़ने और बारिश होने से सेब बगीचों में परागण नहीं हुआ है। जिससे लाखों बागवानों का गहरा झटका लगा है।
सेब उत्पादन का आंकड़ा
वर्ष 2011 में 1 करोड़ 37 लाख 51 हजार 763 पेटी सेब उत्पादन रहा था। प्रदेश में वर्ष 2010 में 8 साल पहले सबसे अधिक सेब उत्पादन हुआ था। इस वर्ष सूबे में 4.47 करोड़ पेटी सेब की पैदावार हुई। वर्ष 2011 में ये आंकड़ा 1.38 करोड़ पेटी, वर्ष 2012 में 2.07 करोड़ पेटी, वर्ष 2013 में 3.70 करोड़ पेटी वर्ष 2014 में 3.12 करोड़ पेटी, वर्ष 2015 में 3.89 करोड़ तथा साल 2016 में 2.35 करोड़ पेटी सेब उत्पादन हुआ था। 2017 में 2.80 करोड़ पेटी उत्पादन हुआ था।
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40 से 60 फीसदी सेटिंग प्रभावित: निदेशक
निदेशक बागवानी एमएस राणा ने कहा कि हिमाचल में मौसम परिवर्तन से सेब की सेटिंग बेहद कम हुई है। 40 से 60 फीसदी सेटिंग प्रभावित हुई है। लिहाजा उत्पादन में उतनी ही गिरावट आंकी जा रही है। जिससे लाखों सेब बागवानों को निराशा का सामना करना पड़ा है।
10 मई से आढ़ती करेंगे आकलन
के क्रास एन कंपनी के आढ़ती आजादपुर फल मंडी दिल्ली नरेश ढल्ल का कहना है कि हिमाचल में सेब सेटिंग कम होने की बागवान खबरें सुना रहे हैं। सेब उत्पादित क्षेत्रों से फीड बैक ली गई है। जहां से सेब की कम सेटिंग की सूचनाएं है। 10 मई से हिमाचल में दिल्ली के आढ़ती सेब के आकलन का दौरा शुरू करेंगे।
कहां कहां कितना नुकसान
मंडी : 40 फीसदी, कुल्लू मनाली 60 फीसदी, शिमला 50 फीसदी, किन्नौर 60 फीसदी, चंबा 40 फीसदी, सिरमौर 50 फीसदी, लाहुल स्पीति 40 फीसदी।
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करोड़ों की चपत : मौसम की बेरुखी से सेब की सेटिंग प्रभावित
एंटी हेलगन और नेट भी नहीं बचा पाए सेब सेटिंग को
मौसम परिवर्तन से सेब बागवानों को लगा करोड़ों का झटका
बिंदर ठाकुर
गोहर (मंडी)।
ओलावृष्टि, बारिश और तापमान में गिरावट से सूबे में सेब का उत्पादन 40 से 60 फीसदी तक सिमट कर रह जाएगा। मौसम ने सेब की सेटिंग बुरी तरह प्रभावित की है। फ्लावरिंग के समय हुई ओलावृष्टि और बारिश से बागवानों को करोड़ों की चपत लगी है। इस बार बर्फबारी भी कम होने से सेब बगीचों मेें चिलिंग आवर्स पूरे नहीं हो पाए हैं। जिससे सेब कारोबार में गिरावट आंकी जा रही है। एंटी हेलगन और नेट भी सेब की फसल को बचा नहीं पाए हैं। 4 से 6 हजार फीट ऊंचाई के बगीचों में सेटिंग पर मौसम परिवर्तन से प्रतिकूल असर पड़ा है। बागवानी विशेषज्ञ डा. एसपी भारद्वाज का कहना है कि मौसम में हो रहे लगातार परिवर्तन से सेब सेटिंग पर प्रतिकूल असर पड़ा है। मंडी, कुल्लू, चंबा, शिमला और किन्नौर में उत्पादित होने वाले सेब कारोबार को इस साल मौसम की मार पड़ने से सेब बगीचों में परागण प्रक्रिया सही नहीं हो पाई है। जिससे सेब की सेटिंग फेल हो गई है। प्रदेश में ओलावृष्टि से बचने के लिए सरकार ने अनुदान पर एंटी हेलगन भी बागवानों की सुविधा के लिए लगाई है। मगर जहां यह मशीन लगी है उन क्षेत्रों में भी ओलावृष्टि और बारिश ने फ्लावरिंग के समय कहर ढाया है।
यह कहना है सेब बागवानों का
मंडी जिले की सराज घाटी सेब उत्पादक संघ के प्रधान चतर सिंह ठाकुर ने कहा कि जंजैहली घाटी में करोड़ों की बागवानों ने नेटिंग की है। लेकिन, मौसम की मार पड़ने से बागवानों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। जिसका प्रमुख कारण मौसम परिवर्तन रहा है। उधर, नाचन फ्रूट ग्रोवर एसोसिएशन के उप प्रधान प्रेम सिंह ठाकुर ने कहा है कि क्षेत्र में फ्लावरिंग के समय ठंड पड़ने और बारिश होने से सेब बगीचों में परागण नहीं हुआ है। जिससे लाखों बागवानों का गहरा झटका लगा है।
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सेब उत्पादन का आंकड़ा
वर्ष 2011 में 1 करोड़ 37 लाख 51 हजार 763 पेटी सेब उत्पादन रहा था। प्रदेश में वर्ष 2010 में 8 साल पहले सबसे अधिक सेब उत्पादन हुआ था। इस वर्ष सूबे में 4.47 करोड़ पेटी सेब की पैदावार हुई। वर्ष 2011 में ये आंकड़ा 1.38 करोड़ पेटी, वर्ष 2012 में 2.07 करोड़ पेटी, वर्ष 2013 में 3.70 करोड़ पेटी वर्ष 2014 में 3.12 करोड़ पेटी, वर्ष 2015 में 3.89 करोड़ तथा साल 2016 में 2.35 करोड़ पेटी सेब उत्पादन हुआ था। 2017 में 2.80 करोड़ पेटी उत्पादन हुआ था।
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40 से 60 फीसदी सेटिंग प्रभावित: निदेशक
निदेशक बागवानी एमएस राणा ने कहा कि हिमाचल में मौसम परिवर्तन से सेब की सेटिंग बेहद कम हुई है। 40 से 60 फीसदी सेटिंग प्रभावित हुई है। लिहाजा उत्पादन में उतनी ही गिरावट आंकी जा रही है। जिससे लाखों सेब बागवानों को निराशा का सामना करना पड़ा है।
10 मई से आढ़ती करेंगे आकलन
के क्रास एन कंपनी के आढ़ती आजादपुर फल मंडी दिल्ली नरेश ढल्ल का कहना है कि हिमाचल में सेब सेटिंग कम होने की बागवान खबरें सुना रहे हैं। सेब उत्पादित क्षेत्रों से फीड बैक ली गई है। जहां से सेब की कम सेटिंग की सूचनाएं है। 10 मई से हिमाचल में दिल्ली के आढ़ती सेब के आकलन का दौरा शुरू करेंगे।
कहां कहां कितना नुकसान
मंडी : 40 फीसदी, कुल्लू मनाली 60 फीसदी, शिमला 50 फीसदी, किन्नौर 60 फीसदी, चंबा 40 फीसदी, सिरमौर 50 फीसदी, लाहुल स्पीति 40 फीसदी।