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श्रम मंत्रालय का आईआईटी मंडी को नोटिस
Updated Tue, 06 Feb 2018 11:01 PM IST
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मंडी। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने आईआईटी मंडी को आउटसोर्स कर्मियों को बोनस न देने पर नोटिस जारी किया है। मंत्रालय ने आईआईटी एवं संबंधित आउटसोर्स कंपनी प्रबंधन से 10 दिन के भीतर जवाब मांगा है। दिसंबर माह में आईआईटी मंडी में कार्यरत 122 सुरक्षा कर्मियों ने मंत्रालय को बोनस न दिए जाने की शिकायत सौंपी थी। जिस पर मंत्रालय ने जवाब मांगा है। नियमानुसार शिक्षण संस्थानों में आउटसोर्स कर्मियों को बोनस दिया जाना अनिवार्य है। सोशल एक्टिविस्ट सुजीत स्वामी ने कहा कि वर्तमान में आईआईटी गांधीनगर, पटना, एनआईटी हमीरपुर में आउटसोर्स कर्मियों को बोनस दिया जा रहा है। यहां तक सालाना 10 हजार तक का लाभ इन आउटसोर्स कर्मियों को दिया जा रहा है। श्रम मंत्रालय के अनुसार श्रम कानून 1965 की धारा आठ की उपधारा 2 (14) (2) के तहत शिक्षण संस्थानों में आउटसोर्स कर्मी बोनस के हकदार हैं। यह कानून सभी शिक्षण संस्थान पर लागू होता है। चाहे वह केंद्र सरकार के अधीन हो अथवा राज्य सरकार के।
350 कर्मियों को नहीं मिल रहा है बोनस
350 के लगभग आउटसोर्स कर्मी वर्तमान में आईआईटी मंडी में सेवाएं दे रहे हैं। संस्थान में तीन कंपनियों के माध्यम से यह कर्मचारी आउटसोर्स किए गए हैं। शिकायतकर्ता सिक्योरिटी सुपरवाइजर सुच्चा सिंह ने कहा कि सिक्योरिटी ब्रांच के कर्मियों को पहले संबंधित कंपनी बोनस दे रही थी। वे 2010 में आईआईटी में सेवाएं दे रहे हैं। इस दौरान कई कंपनियां बदलीं। अक्तूबर 2014 को जब एमएस कंपनी ने टेंडर लिया तो वेतन के साथ 292 रुपये मासिक बोनस कंपनी देती थी। जिसे अप्रैल 2017 से रोक दिया गया है। यह कर्मचारियों के साथ सरासर न्याय है। जबकि, अन्य आउटसोर्स कर्मियों को कभी बोनस दिया ही नहीं गया है।
तैनात कर्मियों का एक करोड़ से अधिक बनता है बोनस
श्रम कानून के अनुसार जिन आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन 21000 हजार प्रतिमाह से कम है। उन्हें संशोधित बोनस एक्ट जोकि पहली अप्रैल 2014 से लागू है, के तहत सात हजार रुपये सालाना बोनस कम से कम दिया जाना अनिवार्य है। इस हिसाब से सात सालों से आईआईटी में तैनात इन 350 कर्मचारियों का कुल बोनस एक करोड़ से अधिक बनता है।
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संबंधित कंपनी से ले रहे जानकारी : आईआईटी
आईआईटी मंडी के कार्यकारी रजिस्ट्रार डा. विशाल सिंह चौहान ने कहा कि मंत्रालय ने 10 दिन के भीतर जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि संबंधित कंपनी से इस बाबत जानकारी ली जा रही है। आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमानुसार बोनस दिया जाएगा। चाहे यह कर्मी सिक्योरिटी ब्रांच में हो अथवा अन्य ब्रांच में। लेकिन, इसे लेकर पहले जांच की जाएगी और जो जरूरी कदम होंगे उठाए जाएंगे।
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350 कर्मियों को नहीं मिल रहा है बोनस
350 के लगभग आउटसोर्स कर्मी वर्तमान में आईआईटी मंडी में सेवाएं दे रहे हैं। संस्थान में तीन कंपनियों के माध्यम से यह कर्मचारी आउटसोर्स किए गए हैं। शिकायतकर्ता सिक्योरिटी सुपरवाइजर सुच्चा सिंह ने कहा कि सिक्योरिटी ब्रांच के कर्मियों को पहले संबंधित कंपनी बोनस दे रही थी। वे 2010 में आईआईटी में सेवाएं दे रहे हैं। इस दौरान कई कंपनियां बदलीं। अक्तूबर 2014 को जब एमएस कंपनी ने टेंडर लिया तो वेतन के साथ 292 रुपये मासिक बोनस कंपनी देती थी। जिसे अप्रैल 2017 से रोक दिया गया है। यह कर्मचारियों के साथ सरासर न्याय है। जबकि, अन्य आउटसोर्स कर्मियों को कभी बोनस दिया ही नहीं गया है।
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तैनात कर्मियों का एक करोड़ से अधिक बनता है बोनस
श्रम कानून के अनुसार जिन आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन 21000 हजार प्रतिमाह से कम है। उन्हें संशोधित बोनस एक्ट जोकि पहली अप्रैल 2014 से लागू है, के तहत सात हजार रुपये सालाना बोनस कम से कम दिया जाना अनिवार्य है। इस हिसाब से सात सालों से आईआईटी में तैनात इन 350 कर्मचारियों का कुल बोनस एक करोड़ से अधिक बनता है।
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संबंधित कंपनी से ले रहे जानकारी : आईआईटी
आईआईटी मंडी के कार्यकारी रजिस्ट्रार डा. विशाल सिंह चौहान ने कहा कि मंत्रालय ने 10 दिन के भीतर जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि संबंधित कंपनी से इस बाबत जानकारी ली जा रही है। आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमानुसार बोनस दिया जाएगा। चाहे यह कर्मी सिक्योरिटी ब्रांच में हो अथवा अन्य ब्रांच में। लेकिन, इसे लेकर पहले जांच की जाएगी और जो जरूरी कदम होंगे उठाए जाएंगे।