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किसान बागवान योजना से मंडी के मेहनकशों के चेहरों पर खिलेगी मुस्कराहट
Updated Tue, 21 Nov 2017 10:43 PM IST
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मंडी। जिले में अब बागवानों के चेहरे पर मुस्कराहट दिखेगी। बागवानी विकास परियोजना के साथ हाथ मिलाकर बागवान हाइटेक होगा। उत्पादकता बढ़ाने के साथ आर्थिक रूप से भी संबल का सपना पूरा हो सकेगा। छोटे, सीमांत, महिला और मंझोले किसानों के लिए विशेष योजना जिला मंडी में शुरू की गई है। जिसका उद्देश्य इस परियोजना के साथ जुड़ने के इच्छुक बागवानों के ग्रुप बनाकर परियोजना के अंतर्गत सेब, चेरी, नाशपाती, खुमानी, पलम, आड़ू, आम, लीची और नींबू, प्रजाति के साथ अनार और अखरोट जैसे चिन्हित बागवानों के फलोत्पादन को बढ़ावा देना है। जिसमें उत्पादन से पहले और उत्पादन के बाद फल को मार्केट तक पहुंचाने की तमाम आधुनिक सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। इस परियोजना में 18 हजार 200 हेक्टेयर क्षेत्र में नए बगीचे लगाने के अलावा 3 हजार हेक्टेयर में पुराने बगीचों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 8 हजार 800 हेक्टेयर क्षेत्र में फल बगीचों की सुधरी वैज्ञानिक तकनीक के अंतर्गत लाया जाएगा। यह खुलासा मंगलवार को आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में उपायुक्त मंडी मदन चौहान ने किया। जिसमें लगभग सभी उपमंडलों के अधिकारियों व बागवानों ने भाग लिया।
डेढ़ लाख को मिलेगा लाभ
कार्यशाला की अध्यक्षता उपायुक्त मदन चौहान ने की। उन्होंने कहा कि 1134 करोड़ की इस विश्व बैंक पोषित परियोजना प्रदेश केे सभी जिलों में लागू होगी। इस परियोजना के तहत डेढ़ लाख लाभार्थियों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों से कहा कि हाइटेक बागवानी से जुड़ने वाले इच्छुक फलोत्पादकों में केवल बेहतर फल उत्पादन के लिए नहीं बल्कि इसके तहत छोटे सीमांत और मंझोले किसानों और खासतौर पर महिला किसानों की आय के जरिये में भी सकारात्मक वृद्धि कर सके।
इनपर भी किया फोकस
कार्यशाला में इसके बाद हिमाचल प्रदेश बागवानी विकास परियोजना के विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। इस परियोजना के अंतर्गत सघन बागवानी से जुड़ी वैज्ञानिक पद्धति को कैसे किसानों तक क्लस्टर फोर्मेशन के जरिये पहुंचाया जा सके, इस बारे भी विचार साझा किए गए। सघन बागवानी को लेकर परियोजना में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि पर्यावरण संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
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डेढ़ लाख को मिलेगा लाभ
कार्यशाला की अध्यक्षता उपायुक्त मदन चौहान ने की। उन्होंने कहा कि 1134 करोड़ की इस विश्व बैंक पोषित परियोजना प्रदेश केे सभी जिलों में लागू होगी। इस परियोजना के तहत डेढ़ लाख लाभार्थियों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों से कहा कि हाइटेक बागवानी से जुड़ने वाले इच्छुक फलोत्पादकों में केवल बेहतर फल उत्पादन के लिए नहीं बल्कि इसके तहत छोटे सीमांत और मंझोले किसानों और खासतौर पर महिला किसानों की आय के जरिये में भी सकारात्मक वृद्धि कर सके।
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इनपर भी किया फोकस
कार्यशाला में इसके बाद हिमाचल प्रदेश बागवानी विकास परियोजना के विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। इस परियोजना के अंतर्गत सघन बागवानी से जुड़ी वैज्ञानिक पद्धति को कैसे किसानों तक क्लस्टर फोर्मेशन के जरिये पहुंचाया जा सके, इस बारे भी विचार साझा किए गए। सघन बागवानी को लेकर परियोजना में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि पर्यावरण संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
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