{"_id":"66bf5ea039770373640c3855","slug":"26-government-buildings-will-be-made-earthquake-proof-apoorva-mandi-news-c-90-1-ssml1045-133466-2024-08-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"भूकंपरोधी किए जाएंगे 26 सरकारी भवन : अपूर्व","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भूकंपरोधी किए जाएंगे 26 सरकारी भवन : अपूर्व
विज्ञापन
मंडी। जिले में 26 सरकारी भवनों में भूकंप से बचाव की तकनीक अपनाई जाएगी। इन भवनों का भूकंप पुनरुद्धार मूल्यांकन किया जाएगा ताकि भूकंप जैसी आपदा में बचाव हो सके। इस तकनीक से अवगत करवाने के लिए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मंडी ने भवन निर्माण में लगे कारीगरों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया।
यह कार्यशाला जिला प्रशासन ने आईआईटी रोपड़ के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. मितेश सुराना और डॉ. आदित्य सिंह राजपूत की ओर से भूकंप रेट्रोफिटिंग (एक पुरानी मशीन में एक नया उपकरण डालने का कार्य) मूल्यांकन की तकनीकों के बारे में जानकारी देने के बाद लिया है। सेंटर फॉर एजुकेशन ऑन वर्नाकुलर ऑर्किटेक्चर कार्यक्रम के तहत मंडी के डीआरडीए हाल में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में इन प्रोफेसरों ने सुरक्षित भवन निर्माण और भवनों को भूकंप रेट्रोफिटिंग मूल्यांकन की तकनीकों की जानकारी दी।
इस कार्यशाला का आयोजन जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मंडी की ओर से आईआईटी रोपड़ के सहयोग से किया गया। इस मौके पर उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने कार्यशाला की अध्यक्षता की। कहा कि जिले में 26 सरकारी भवनों को भूकंप से सुरक्षित करने के लिए उनका भूकंप पुनरुद्धार मूल्यांकन करवाया जा रहा है। रेट्रोफिटिंग के उपरांत ये भवन भूकंप आने पर भी सुरक्षित रहेंगे। इस कार्यशाला में लोक निर्माण, जल शक्ति, विद्युत, नगर नियोजन, नगर निगम, नगर पंचायत और खंड विकास कार्यालयों में कार्यरत इंजीनियरों ने भाग लिया।
विज्ञापन
-- --
भूकंप से नहीं भवन गिरने से जाती हैं जानें
आईआईटी रोपड़ के सहायक प्रोफेसर डॉ. मितेश सुराना और डॉ. आदित्य सिंह राजपूत ने बताया कि भूकंप से लोगों की जान नहीं जाती है बल्कि भवनों के गिरने से जाती है। इसलिए हमें भूकंपरोधी भवन निर्माण करना चाहिए। भूकंपरोधी मकान बनाने का खर्च भवन की कुल लागत का केवल 5 से 10 प्रतिशत होता है। उन्होंने मंडी जिले में ढलानदार भूमि होने के कारण सुरक्षित भवन निर्माण के लिए भूमि के तल को मजबूत करने पर जोर दिया।
विज्ञापन
यह कार्यशाला जिला प्रशासन ने आईआईटी रोपड़ के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. मितेश सुराना और डॉ. आदित्य सिंह राजपूत की ओर से भूकंप रेट्रोफिटिंग (एक पुरानी मशीन में एक नया उपकरण डालने का कार्य) मूल्यांकन की तकनीकों के बारे में जानकारी देने के बाद लिया है। सेंटर फॉर एजुकेशन ऑन वर्नाकुलर ऑर्किटेक्चर कार्यक्रम के तहत मंडी के डीआरडीए हाल में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में इन प्रोफेसरों ने सुरक्षित भवन निर्माण और भवनों को भूकंप रेट्रोफिटिंग मूल्यांकन की तकनीकों की जानकारी दी।
विज्ञापन
इस कार्यशाला का आयोजन जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मंडी की ओर से आईआईटी रोपड़ के सहयोग से किया गया। इस मौके पर उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने कार्यशाला की अध्यक्षता की। कहा कि जिले में 26 सरकारी भवनों को भूकंप से सुरक्षित करने के लिए उनका भूकंप पुनरुद्धार मूल्यांकन करवाया जा रहा है। रेट्रोफिटिंग के उपरांत ये भवन भूकंप आने पर भी सुरक्षित रहेंगे। इस कार्यशाला में लोक निर्माण, जल शक्ति, विद्युत, नगर नियोजन, नगर निगम, नगर पंचायत और खंड विकास कार्यालयों में कार्यरत इंजीनियरों ने भाग लिया।
विज्ञापन
भूकंप से नहीं भवन गिरने से जाती हैं जानें
आईआईटी रोपड़ के सहायक प्रोफेसर डॉ. मितेश सुराना और डॉ. आदित्य सिंह राजपूत ने बताया कि भूकंप से लोगों की जान नहीं जाती है बल्कि भवनों के गिरने से जाती है। इसलिए हमें भूकंपरोधी भवन निर्माण करना चाहिए। भूकंपरोधी मकान बनाने का खर्च भवन की कुल लागत का केवल 5 से 10 प्रतिशत होता है। उन्होंने मंडी जिले में ढलानदार भूमि होने के कारण सुरक्षित भवन निर्माण के लिए भूमि के तल को मजबूत करने पर जोर दिया।