{"_id":"5c0d54debdec224176131d80","slug":"21544377566-mandi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीनाग हुंगलू के नए मंदिर की आज होगी प्राण प्रतिष्ठा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीनाग हुंगलू के नए मंदिर की आज होगी प्राण प्रतिष्ठा
Updated Sun, 09 Dec 2018 11:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करसोग (मंडी)। उपमंडल के तहत च्वासी क्षेत्र की पोखी पंचायत के श्रीनाग हुंगलू (झाकड़ु नाग) के मंदिर का निर्माण पूरा हो चुका है। यह कार्य करीब पांच वर्षों के बाद पूरा हो सका है। मंदिर की प्रतिष्ठा 10 दिसंबर को की जाएगी। इस मंदिर के निर्माण में पुरानी काष्ठकला को बड़े ही परिश्रम और लगन से पुनर्जीवित किया गया है। मंदिर और कोठी भवन के झरोखों, स्तंभों, द्वारों, दीवारों, छत और फलकों पर बेल-बूटे, देवी-देवताओं की बारीक चित्रकारी करके उसे जीवित किया गया है। मंदिर समिति के प्रधान फिल्लौर सिंह ठाकुर ने बताया कि इस मंदिर की प्रतिष्ठा 10 दिसंबर को की जाएगी। इस अवसर पर विनणी महादेव, नाग च्वासी महोग, वैणसी महादेव, नाग पोखी, सोमेश्वर महादेव, ममलेश्वर महादेव, कामाक्षा माता कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे।
.............
क्या है मान्यता
समाजसेवी टीसी ठाकुर ने बताया कि मान्यता है कि नाग हुंगलू मन, वचन और कर्म से एक न्यायप्रिय राजा थे। वह राजपाठ त्याग कर मानसिक शांति के लिए डींग गांव पहुंचे थे। इस स्थान पर उन्हें चौरासी सिद्ध मिले, जिनसे राजा ने दीक्षा प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने इतना कठिन तप किया कि इनके चारों ओर कंटीली झाड़ियां उग आईं। इन्होंने कुचाली प्रवृत्ति की थोई, कमाडू, ढबरैची आदि यक्षिणियों को अपने तप बल से हराकर ख्याति प्राप्त की। इससे वह देवता के रूप में पूजे जाने लगे। इनके भक्त यहां आज भी यहां पर आकर देवता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
..
अत्यंत सुंदर स्थान पर तैयार हुआ अनुपम मंदिर
ऐतिहासिक और धार्मिक च्वासी क्षेत्र करसोग का नितांत पिछड़ा इलाका है। यहां अनेक दर्शनीय मंदिर काष्ठ कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इन मंदिरों की काष्ठकला आज भी सैकड़ों वर्षों के बाद जीवित है। यहां की सुंदरता दर्शकों और पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। मंदिर अत्यंत सुंदर स्थान पर तैयार किया गया है।
विज्ञापन
000
विज्ञापन
.............
क्या है मान्यता
समाजसेवी टीसी ठाकुर ने बताया कि मान्यता है कि नाग हुंगलू मन, वचन और कर्म से एक न्यायप्रिय राजा थे। वह राजपाठ त्याग कर मानसिक शांति के लिए डींग गांव पहुंचे थे। इस स्थान पर उन्हें चौरासी सिद्ध मिले, जिनसे राजा ने दीक्षा प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने इतना कठिन तप किया कि इनके चारों ओर कंटीली झाड़ियां उग आईं। इन्होंने कुचाली प्रवृत्ति की थोई, कमाडू, ढबरैची आदि यक्षिणियों को अपने तप बल से हराकर ख्याति प्राप्त की। इससे वह देवता के रूप में पूजे जाने लगे। इनके भक्त यहां आज भी यहां पर आकर देवता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
विज्ञापन
..
अत्यंत सुंदर स्थान पर तैयार हुआ अनुपम मंदिर
ऐतिहासिक और धार्मिक च्वासी क्षेत्र करसोग का नितांत पिछड़ा इलाका है। यहां अनेक दर्शनीय मंदिर काष्ठ कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इन मंदिरों की काष्ठकला आज भी सैकड़ों वर्षों के बाद जीवित है। यहां की सुंदरता दर्शकों और पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। मंदिर अत्यंत सुंदर स्थान पर तैयार किया गया है।
विज्ञापन
000