फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Mandi News ›   मंडी जैसे पुराने शहरों में भूमी की कमी के कारण सेटबैक जैसे नियमों लागू ना हो

मंडी जैसे पुराने शहरों में भूमी की कमी के कारण सेटबैक जैसे नियमों लागू ना हो

Thu, 22 Mar 2018 11:12 PM IST
Updated Thu, 22 Mar 2018 11:12 PM IST
विज्ञापन
मंडी जैसे पुराने शहरों में भूमी की कमी के कारण सेटबैक जैसे नियमों लागू ना हो
मंडी। मकान नियमितीकरण संघर्ष समिति कुल्लू और मंडी की संयुक्त बैठक में अनियमित भवनों को जहां है जैसा है की तर्ज पर नियमित करने की मांग की गई है। निर्णय लिया गया कि इस मामले को पुनर्विचार के लिए मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया जाएगा और सभी संबंधित पक्षों की राय जानकर अनाधिकृत भवनों को नियमित करने के लिए एकमुश्त पॉलिसी लाने की मांग की जाएगी। वहीं समिति ने मांग की है कि मंडी जैसे पुराने शहरों में भूमि की कमी के कारण सेट बैक जैसे नियमों को लागू न किया जाए। इसके अलावा टीसीपी नियमों में एफएआर के नियमों को उदार किया जाए। पूरे प्रदेश में समान रूप से चार मंजिलों तक भवन निर्माण की अनुमति दी जाए।
विज्ञापन

समिति ने यह भी मांग की है कि प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों के तहत नदी तट से 25 मीटर की दूरी तक भवन निर्माण पर रोक लगा दी गई है। समिति का मानना है कि प्रदेश के ज्यादातर शहर और कस्बे नदी के किनारे ही बसे हैं। ऐसे में न्यायालय के आदेशों के कारण नदी तट पर बने हजारों भवन अवैध हो गए हैं। समिति ने मांग की है कि सरकार इस मामले को प्रदेश उच्च न्यायालय में उठाए और नदी से 25 मीटर की दूरी के पैमाने के बजाय तट से ऊंचाई का नियम बनाया जाए। समिति ने यह भी मांग की है कि अपनी मलकीयती भूमि में बिना स्वीकृति के बनाए गए अनियमित भवनों को बिजली-पानी का कनेक्शन अस्थायी तौर पर जारी किया जाए। बैठक में मकान नियमितीकरण संघर्ष समिति कुल्लू के अध्यक्ष इंद्र देव शास्त्री, उपाध्यक्ष मनोहर लाल शास्त्री, मंडी की संघर्ष समिति के संयोजक उत्तम चंद सैनी, अमर चंद वर्मा, हितेंद्र शर्मा, एम एल शर्मा, प्रदीप परमार और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में संघर्ष समितियों की इस संयुक्त बैठक में यह आम राय थी कि प्रदेश के लाखों लोगों ने मुश्किलें उठाकर अपने आशियाने बनाए हैं। यह भवन उन्होंने अपनी मलकीयती जमीन पर नक्शे के बगैर या नक्शे का उल्लंघन करके बनाए होने के कारण इन्हें टीसीपी के प्रावधानों के तहत अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी न करके बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है।
विज्ञापन


ज्यादा फीस होने से फायदा नहीं उठा पाए लोग
समिति के मीडिया प्रभारी समीर कश्यप ने बताया कि इस मुद्दे को अनेकों बार प्रदेश सरकार के संज्ञान में लाया है। जिसके चलते हालांकि पिछली सरकार ने इन भवनों के नियमितीकरण के लिए जहां है जैसा है की तर्ज पर पॉलिसी बनाई थी। लेकिन, नियमितीकरण की भारी फीस होने के कारण लोग इस योजना का फायदा नहीं उठा पाए और लाखों भवनों में से सिर्फ 9000 लोग ही भवनों को नियमित करने के लिए आगे आए थे। प्रदेश सरकार के संशोधित टीसीपी एक्ट 2016 की ठीक ढंग से पैरवी न होने के कारण प्रदेश उच्च न्यायालय ने इसे निरस्त कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


नई पॉलिसी का विधेयक लाया जाए
समिति ने मांग की है कि प्रदेश सरकार नियमितीकरण के मुद्दे पर फिर से विचार करे और सभी संबंधित संस्थाओं और आम नागरिकों से विचार विमर्श करके प्रदेशवासियों के हक में एक नई पॉलिसी का विधेयक लाया जाए। जिससे अनियमित भवनों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की जा सके।


यह तय हो फीस और नियम
समिति ने मांग की है कि नियमितीकरण की फीस छोटे और मझोले रिहायशी और व्यावसायिक भवनों के लिए 50 से 100 रुपये प्रति वर्गमीटर से ज्यादा न रखी जाए। संशोधित अधिनियम 2016 में यह दर 500 से 1000 रुपये प्रति वर्गमीटर रखी थी जो आम नागरिकों की पहुंच से बाहर थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed