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13 वर्ष बाद भी ऊहल विद्युत परियोजना की पैनस्टोक जुगाड़ के सहारे

Wed, 18 Apr 2018 11:08 PM IST
Updated Wed, 18 Apr 2018 11:08 PM IST
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13 वर्ष बाद भी ऊहल विद्युत परियोजना की पैनस्टोक जुगाड़ के सहारे
जोगिंद्रनगर (मंडी)। 13 वर्ष से निर्माणाधीन 100 मेगावाट की ऊहल तृत्य चरण जल-विद्युत परियोजना की पैनस्टोक को परियोजना प्रबंधन जुगाड़ के सहारे टिका कर उद्घाटन की तैयारियों में जुटा है। योजना की पैनस्टोक लकड़ी के फट्टों के सहारे टिकी हुई है। इस योजना का कार्य 2008 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन, 13 वर्ष बाद भी 2004 से बनना शुरू हुई इस योजना के मई माह में बिजली उत्पादन शुरू करने पर संशय बरकरार है। पैनस्टोक के कई पिल्लरों में दरारें आने से अब परियोजना प्रबंधन लकड़ी के फट्टों के सहारे जुगाड़ से टेस्टिंग में जुटा है। इससे पैनस्टोक के कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठना शुरू हो गए हैं। ट्रायल में ही परियोजना प्रबंधन की पोल खुलने से अब साथ सटे तीन गांवों के 800 लोगों पर भी खतरा मंडरा गया है। ऊहल चरण तीन परियोजना का कार्य 2004 में शुरू किया गया था। जिसको 2008 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। इस परियोजना पर 432 करोड़ लागत आनी थी। लेकिन, अब इस परियोजना के निर्माण पर करीब 1500 करोड़ से अधिक खर्च किया जा चुका है। बावजूद इसके अभी तक योजना बिजली उत्पादन के लिए मुकम्मल नहीं हो सकी है।
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केमिकल से रिसाव रोकने की जुगत में परियोजना प्रबंधन
परियोजना के पैनस्टोक के नीचे लगाए गये लकड़ी के स्लीपर गुणवत्ता की पोल खोल रहे हैं। कहा जा रहा है कि पैनस्टोक में पानी भरते समय दरारें आ गई हैं। वहीं, टेस्टिंग में रिसाव भी पाया गया है। जिसे रोकने के लिए विशेष तौर के केमिकल का इस्तेमाल करने की प्रबंधन ने योजना बाई है। यदि केमिकल से भी यह रिसाव न रुका तो मई माह पर परियोजना का उद्घाटन टल सकता है। मच्छयाल से चूल्हा तक करीब 8 किमी की टनल बनाई गई है। चूल्हा से ऊपर रक्तल साइट के पास ही लीकेज प्रबंधन के लिए परेशानी बन गई है।
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निर्माण कार्य की सीबीआई जांच की उठाई मांग
तुलाह पंचायत के पूर्व प्रधान रणजीत चौहान ने कहा कि बीवीपीसीएल अपनी खामियों को छुपा कर इस परियोजना का जैसे तैसे उद्घाटन करवाना चाहती है। लेकिन, उनकी यह जल्दबाजी स्थानीय गांव गुलाणा, सनहाली तथा रक्तल के लोगों के लिये जानलेवा भी साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि पैनस्टोक को लकड़ी के स्लीपरों के सहारे खड़ा रखना जोखिम भरा है। यह कोताही योजना से सटे तीन गांवों के लगभग 800 से 1000 लोगों पर भारी पड़ सकती है। वह वर्ष 2009 से ही परियोजना के निर्माण पर सवाल उठाते आ रहे हैं और इसके निर्माण की गुणवत्ता की जांच सीबीआई तथा एंटी क्रप्शन विभाग से करवाने की मांग कर रहे हैं।
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टेस्टिंग में पिलर में आई हैं दरारें : अभियंता
परियोजना के अधिशाषी अभियंता राजीव शर्मा ने कहा कि परियोजना की टेस्टिंग का कार्य चल रहा है। कोई भी त्रुटि सामने आती है तो उसे ठीक किया जाएगा। टेस्टिंग के दौरान एक पिलर में दरारेें आई हैं। इन कमियों को दूर किया जा रहा है।
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