'My Result Plus
'My Result Plus

मंडी के अराध्य देव बाबा भूतनाथ के लिंग का मक्खन से श्रृंगार, एक माह तक नहीं चढ़ेगा जल

Shimla Bureau Updated Sun, 14 Jan 2018 10:33 PM IST
ख़बर सुनें
मंडी। प्राचीन परंपरा का निर्वाह करते हुए छोटी काशी मंडी के आराध्य देव बाबा भूतनाथ में शिवलिंग का शृंगार मक्खन के लेप की विधि धृत कंबल से किया जाएगा। मकर संक्रांति की मध्यरात्रि किए गए लेप को शिवरात्रि के एक दिन पहले निकाला जाएगा। करीब 30 दिनों तक शिवलिंग पर किसी भी प्रकार का जल नहीं चढ़ाया जाता है।
मान्यता है कि यह परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। हालांकि हर वर्ष भगवान भोलेनाथ के शृंगार में बदलाव किया जाता है। लेकिन इस बार आर्थिक स्थिति को देखते हुए शृंगार को लेकर कोई राय नहीं बन सकी है। शिवलिंग पर हर बार लेप चढ़ाने की विधि और विधान अलग ही रहता है।

एक माह पहले शुरू होता है शृंगार
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि पर्व के लिए बाबा भूतनाथ का शृंगार एक माह पहले शुरू हो जाता है। मंडी के आराध्य देव भूतनाथ को इस दौरान हर दिन मक्खन का लेप लगाया जाता है और हर दिन विशेष पूजन किया जाता है। मकर संक्रांति को मध्य रात्रि में बाबा भूतनाथ जी के शिवलिंग पर मक्खन का लेप पूरे विधि विधान के साथ चढ़ाया जाता है। इस बार रविवार को मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर शाम 6 बजे बाबा भूतनाथ मंदिर में संध्याकालीन आरती की गई। इसके बाद करीब 8 बजे मंदिर का मुख्यद्वार बंद कर दिया गया। इससे पहले जो भी श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर गए, वही पूजन में भाग ले सके। रात करीब 11 बजे शिवलिंग पर मक्खन का लेप घृत कंबल चढ़ाया गया। मंदिर के महंत देवानंद सरस्वती ने बताया कि मकर संक्रांति से लेकर शिवरात्रि तक रोजाना मक्खन का लेप किया जाएगा। मान्यता है कि जो भी भक्त पूजन-कीर्तन करता है, उसे भोले बाबा हर प्रकार का सुख प्रदान करते हैं।

मकर संक्रांति को ही क्यों चढ़ता है लेप
महंत देवानंद के अनुसार यह मकर संक्रांति का दिन और रात दोनों ही इतनी फलदायी हैं कि इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का सौ गुणा फल मिलता है। मकर संक्रांति पूरे भारत में किसी न किसी रूप में मनाई जाती है। जब सूर्य मकर राशि में आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। अकसर यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पंद्रहवें दिन ही पड़ता है, क्योंकि इसी दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। यह अवसर बहुत पवित्र होता है। इसीलिए मकर संक्रांति के दिन से ही भगवान शिव के लिंग पर मक्खन का लेप किया जाता है।

देवताओं की रात्रि या तारारात्रि का महत्व
मकर संक्रांति की रात से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। इस रात को लोग अगल-अलग नामों से पुकारते हैं। कोई इसे तारारात्रि कहते हैं तो कई इसे देवताओं की रात्रि कहते हैं। इस दिन से रातें छोटी एवं दिन बड़े होने लगते हैं तथा गर्मी का मौसम शुरू हो जाता है। दिन बड़ा होने से प्रकाश अधिक होगा तथा रात्रि छोटी होने से अंधकार कम होगा। मकर संक्रांति का दिन इतना शुभ माना गया है कि इस दौरान अगर किसी की मृत्यु हो जाए तो वह सीधा स्वर्ग में जाता है। इसी दिन से सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारंभ होती है। इसलिए इस पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं। शास्त्रों के अनुसार दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

Spotlight

Most Read

Jharkhand

झारखंड: चतरा में हुआ भीषण सड़क हादसा, 9 बारातियों की मौत

झारखंड के चतरा में हुए एक भीषण सड़क हादसे में 9 बारातियों की मौत हो गयी। सदर थाना क्षेत्र के गंधरिया मोड़ के पास बुधवार देर रात यह हादसा हुआ। इस घटना में कई बाराती घायल हो गए।

26 अप्रैल 2018

Related Videos

VIDEO: उड़कर मकान की छत पर जा पहुंची कार

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के एक गांव में अजीबो गरीब हादसा देखने को मिला।

4 मार्च 2018

आज का मुद्दा
View more polls

अमर उजाला ऐप चुनें

सबसे तेज अनुभव के लिए

क्लिक करें Add to Home Screen