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Mandi News: मृतक के परिजनों को 17.17 लाख मुआवजा
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मंडी। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण सुंदरनगर ने हादसे में जान गंवाने वाले युवक तिलक राज के आश्रितों को कुल 17.17 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही मुआवजा राशि पर याचिका दायर करने की तारीख से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।
मामले के तथ्यों के अनुसार 16 नवंबर 2021 की रात करीब 8:45 बजे तिलक राज कार में सवार होकर सुंदरनगर की ओर जा रहे थे। नौलखा क्षेत्र में वालिया मोटर्स के पास चालक की लापरवाही से कार लोहे के डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में तिलक राज गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें नेरचौक स्थित लाल बहादुर शास्त्री राजकीय मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस संबंध में पुलिस थाना में चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
हादसे के बाद मृतक की पत्नी, नाबालिग पुत्र और माता ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत 80 लाख रुपये मुआवजे की मांग को लेकर दावा याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण ने यह स्पष्ट माना कि दुर्घटना चालक की लापरवाही से हुई। आय से संबंधित ठोस साक्ष्य न होने के कारण न्यायालय ने उस समय की न्यूनतम मजदूरी के आधार पर मृतक की आय आंकी और भविष्य की संभावनाओं को जोड़ते हुए मुआवजे की गणना की।
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न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि वाहन की बीमा पॉलिसी केवल एक्ट पॉलिसी थी और उसमें कार में बैठे यात्री शामिल नहीं थे। न्यायालय ने उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए बीमा कंपनी को मुआवजा भुगतान के लिए जिम्मेदार ठहराया। संवाद
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मामले के तथ्यों के अनुसार 16 नवंबर 2021 की रात करीब 8:45 बजे तिलक राज कार में सवार होकर सुंदरनगर की ओर जा रहे थे। नौलखा क्षेत्र में वालिया मोटर्स के पास चालक की लापरवाही से कार लोहे के डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में तिलक राज गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें नेरचौक स्थित लाल बहादुर शास्त्री राजकीय मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस संबंध में पुलिस थाना में चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
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हादसे के बाद मृतक की पत्नी, नाबालिग पुत्र और माता ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत 80 लाख रुपये मुआवजे की मांग को लेकर दावा याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण ने यह स्पष्ट माना कि दुर्घटना चालक की लापरवाही से हुई। आय से संबंधित ठोस साक्ष्य न होने के कारण न्यायालय ने उस समय की न्यूनतम मजदूरी के आधार पर मृतक की आय आंकी और भविष्य की संभावनाओं को जोड़ते हुए मुआवजे की गणना की।
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न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि वाहन की बीमा पॉलिसी केवल एक्ट पॉलिसी थी और उसमें कार में बैठे यात्री शामिल नहीं थे। न्यायालय ने उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए बीमा कंपनी को मुआवजा भुगतान के लिए जिम्मेदार ठहराया। संवाद